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दिल्ली जाने वाले वाहन गांवों की सड़कों से गुजर रहे:किसानों के धरने से जीटी रोड 292 दिन से बंद, लिंक रोड 60 हजार वाहनों के लोड से चूर-चूर, 2-2 फीट गहरे गड्‌ढों में फंस रहे

सोनीपत5 दिन पहले
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जठेड़ी रोड पर फंसे वाहन। - Dainik Bhaskar
जठेड़ी रोड पर फंसे वाहन।
  • 45 मिनट के सफर में 3 घंटे लग रहे, भारी वाहनों के गुजरने से ग्रामीण परेशान, रोज हो रहे हादसे

नेशनल हाईवे-44 का रास्ता 292 दिन से बंद है। प्रतिदिन हाईवे पर दौड़ने वाले 60 हजार वाहन दिल्ली में प्रवेश करने के लिए आसपास के लिंक मार्गों का प्रयोग कर रहे हैं। बारिश और वाहनों के दबाव में उनकी हालत भी कंडम हो चुकी है। सबसे अधिक परेशानी कुंडली, राई, नाथूपुर, साबौली व मुरथल औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगपतियों को हो रही है। राई व कुंडली की तीन हजार से अधिक उद्योग इससे आर्थिक मार झेल रहे हैं। कुंडली के मॉल, शोरूम और बाजार पर कारोबार चौपट है। इसी वजह से लोग हाईवे पर एक तरफ का 44 फीट का रास्ता खोलने की मांग कर रहे हैं। उद्योग और बाजार से यहां करीब 15000 करोड़ का कारोबार पिछले 9 महीनों में प्रभावित हुआ है।

याचिकाकर्ता मोनिका अग्रवाल की जनहित याचिका (सिविल) नंबर-249/2021 पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दे चुका है कि जनहित में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-44 पर कुंडली-सिंघू बॉर्डर पर धरनारत किसानों से एक तरफ के मार्ग पर आम लोगों को रास्ता दिलाया जाए। इन्हीं आदेशों के तहत किसान प्रतिनिधियों के साथ डीसी ललित सिवाच, एसपी जश्नदीप सिंह रंधावा व अन्य अधिकारियों ने लघु सचिवालय में बैठक की। किसानों ने संयुक्त मोर्चा की बैठक में इससे इसे रखकर उचित आश्वासन दिया है, साथ ही दिल्ली पुलिस की तरफ से पक्के बैरीगेट्स लगाकर रास्ता बंद करने की भी बात कही। राष्ट्रवादी परिवर्तन मंच भी लगातार जीटी रोड पर रास्ता खुलवाने की मांग को लेकर गांव-गांव में पंचायत कर रहा है। मंच के अध्यक्ष हेमंत नांदल ने कहा कि वे आंदोलन के खिलाफ नहीं वे तो बंद रास्ता खुलवाने की मांग कर रहे हैं।

बीसवां मिल से 8 किमी के सफर में लग रहे 50 मिनट

दिल्ली में प्रवेश करने का दूसरा लिंक मार्ग सफियाबाद गांव के साथ लगता है। बीसवां मिल चौक से इस बॉर्डर की दूरी 8 किलोमीटर है, लेकिन इस 8 किलोमीटर की दूरी तय करने में भी 50 मिनट का समय लग रहा है। यहां भी सड़क की हालत काफी खराब हो चुकी है। जठेड़ी गांव, बारोटा गांव व सफियाबाद गांव के पास सड़क से पैदल निकलना भी मुश्किल हो चुका है। सड़क से उद्योगपतियों के हैव्वी वाहन ज्यादा निकलते हैं। बारोटा से लेकर सफियाबाद तक दो घंटे तक जाम लग रहा है। वहीं, राई से दिल्ली बस अड्‌डे के 45 मिनट के सफर के लिए लिंक रोड से 3 घंटे लग रहे हैं। गांवों की सड़कों पर रोज हादसे हो रहे हैं।

उद्योग और बाजार पर आर्थिक संकट

राई इंडस्ट्रियल एरिया के 1600 उद्योगपति, कुंडली इंडस्ट्रियल एरिया के 1800 उद्योगपति और नाथूपुर औद्योगिक क्षेत्र के 400 उद्योगपति बंद रास्ते से आर्थिक संकट झेल रहे हैं। तीनों औद्योगिक क्षेत्र के 4 हजार से अधिक श्रमिकों के सामने रोजगार का संकट पैदा है। कुंडली इंडस्ट्री एसो. प्रधान सुभाष गुप्ता, राई इंडस्ट्री एसो. प्रधान राकेश देवगन का कहना है कि एक्सपोर्ट की 65 प्रतिशत इंडस्ट्रीज में डेयरी प्रोडक्टस, दवाई व स्टील के बर्तन बनाने वाली इंडस्ट्री में कच्चा माल नहीं मिल रहा है।

नांगल कलां से गुजरते हैं अधिक वाहन

दिल्ली में आने-जाने के लिए सबसे अधिक रास्ता नांगल कलां गांव से होते हुए भैराबाकिपुर से सेरसा होकर दिल्ली के सिंघू गांव में प्रवेश करता है। यह सड़क 9 महीने पहले चकाचक थी। जैसे ही कुंडली बॉर्डर बंद हुआ तो दिल्ली जाने वाला ट्रैफिक इसी सड़क से निकलना शुरू हुआ। अब 9 महीने में इस रोड की हालत सबसे ज्यादा खराब हो चुकी है।

नाहरी से लामपुर लिंक रोड भी हुआ खस्ता

सोनीपत से दिल्ली जाने के लिए तीसरा लिंक रोड नाहरी गांव से आगे लामपुर बॉर्डर है। यहां भी बारोटा से होकर जाना पड़ता है। नाहरी गांव से लामपुर की दूरी मात्र 5 किलोमीटर है। यहां से हैव्वी वाहन निकलने की वजह से सड़क कंडम हालत में पहुंच चुकी है। नाहरी से लामपुर होते हुए वाहन नरेला में प्रवेश करते हैं। हाईवे बंद होने पर स्थानीय निवासी काफी परेशान हैं।

बीसवां मिल चौक पर रोजाना लग रहा है लंबा जाम

किसान आंदोलन की वजह से केएमपी पुल के पास पुलिस ने पिछले 292 दिन से नाका लगा रखा है। यहां से वाहनों को कुंडली बॉर्डर तक नही जाने दिया जाता। वाहनों को केएमपी या लिंक रोड की तरफ डायवर्ट किया जाता है। जिस वजह से प्रतिदिन केएमपी से लेकर राई गांव तक करीब चार किलोमीटर लंबा जाम लगता है। लोग एक घंटा तक जाम में फंसे रहते हैं।

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