मेरीकॉम के पूर्व कोच इबोम्चा ने कहा:मैंने सिर्फ मुक्केबाजी सिखाई, वह दुनिया को खेल सिखा गई

सोनीपत3 महीने पहलेलेखक: अनिल बंसल
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एमसी मेरीकॉम के शुरुआती कोच और द्रोणाचार्य अवाॅर्डी इबोम्चा सिंह ने कहा कि वह भले ही मुकाबला हारी है, लेकिन भारतीय मुक्केबाजी को जिताने वाली मेरीकॉम है। मैंने उसे मुक्केबाजी ही सिखाई थी, लेकिन वह तो सारी दुनिया को खेल का असली सबक सिखा गई। उन्होंने रोते हुए अपना दर्द साझा किया और कहा, ‘मेरीकाॅम खेल के प्रति जो समर्पण आज से 20 साल पहले दिखाती थी, वह आज भी ओलिंपिक रिंग में उतरते वक्त कायम था। ऐसा कोई विरला ही होता है जो हार के बाद इतना विनम्र दिखा हो। उसकी खेल भावना को देखकर मुझे उस पर नहीं बल्कि खुद पर गर्व होता है।

मेरीकॉम तुम खूब खेली, तुम हारी नहीं जीती हो। छह बार मुक्केबाजी में दुनिया को जीतने वाली मेरीकॉम को रेफरी के गलत फैसले ने हराया है। आज जितना खराब ज्यूर सिस्टम मैंने नहीं देखा। मेरीकॉम के साथ नाइंसाफी की गई है। उसका डिफेंस और पंच सही लगे थे। मौजूदा प्वाइंट सिस्टम भी मुझे सही नहीं लगता।’ मेरीकॉम को रियो ओलिंपिक की ब्रॉन्ज मेडलिस्ट कोलंबिया की विक्टोरिया इनग्रिट वेंलेंसिया ने करीबी मुकाबले में 3-2 (30-27, 29-28, 27-30, 29-28, 28-29) से हराया।

मेरीकॉम को लगा था कि वे मैच जीत गईं: मेरीकॉम ने कहा, ‘मैच के बाद मुझे लगा कि मैं जीत गई हूं। लेकिन सोशल मीडिया और अपने कोच को देखा तब अहसास हुआ कि मैच गंवा चुकी हूं। ये सबसे खराब ओलिंपिक है। जो हुआ वो दुर्भाग्यपूर्ण है। इस बात का दुख है कि इस फैसले को चुनौती नहीं दे सकती।’

पहली बार खेल रहे सतीश क्वार्टर फाइनल में, जीते तो मेडल पक्का होगा

सतीश कुमार सुपर हैवीवेट राउंड के क्वार्टर फाइनल में पहुंच गए। सतीश ने जमैका के रिकार्डो ब्राउन को 4-1 से हराया। सतीश ने ब्राउन के खराब फुटवर्क का फायदा उठाया। दोनों खिलाड़ी पहला ओलिंपिक खेल रहे हैं। सतीश क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाले भारत के तीसरे मुक्केबाज हैं। उनसे पहले, लवलीना और पूजा रानी अंतिम-8 में पहुंच चुकी हैं। अगर इन खिलाड़ियों ने अपना अगला मुकाबला जीत लिया तो मेडल पक्का हो जाएगा। सतीश का क्वार्टर फाइनल में वर्ल्ड और एशियन चैंपियन उजबेकिस्तान के बखोदिर जालोलोव से सामना होगा।

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