तस्वीरों में देखिए, किसान आंदोलन के रंग:सालभर से घर नहीं गए; कोई कर रहा लंगर की सेवा तो कोई दे रहा स्वास्थ्य सुविधाएं

सोनीपत/बहादुरगढ़6 महीने पहले
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दिल्ली से सटे सिंघु और टीकरी बॉर्डर पर 377 दिन से कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन जारी है। नवंबर 2020 से किसान आंदोलन चल रहा है। पंजाब और हरियाणा के हजारों किसान मोर्चे पर डटे हैं। 32 से ज्यादा किसान संगठन दोनों बॉर्डर पर आंदोलनरत हैं। कई किसानों की आंदोलनस्थल पर ही मौत हो गई। कोई एक साल से घर नहीं गया तो कोई घर गया ही नहीं है। कोई आंदोलनस्थल पर लंगर की सेवा कर रहा तो कोई स्वास्थ्य सेवाएं दे रहा। हर कोई अपनी-अपनी सुविधा के अनुसार आंदोलन में किसानों की सेवा कर रहा है। हम आपको तस्वीरों में दिखा रहे हैं, किसान आंदोलन की खास झलकियां...

सोनीपत में सिंघु बॉर्डर से सीखी प्रधान जगजीत सिंह मंच से संबोधित करते हुए। उन्होंने गुरु गोबिंद सिंह के बारे में जानकारी दी कि कैसे गुरु गोबिंद सिंह ने गरीबों का भला किया और उन्हें सही रास्ता दिखाया।
सोनीपत में सिंघु बॉर्डर से सीखी प्रधान जगजीत सिंह मंच से संबोधित करते हुए। उन्होंने गुरु गोबिंद सिंह के बारे में जानकारी दी कि कैसे गुरु गोबिंद सिंह ने गरीबों का भला किया और उन्हें सही रास्ता दिखाया।
पंजाब के बठिंडा की रहने वाली 65 वर्षीय शांति साल में दो बार ही घर गईं। वे कहती हैं कि एक साल से बैठे हैं तो थोड़ा टाइम और सही। जब तक हमारी सभी मांगें पूरी नहीं हो जाती, तब तक वे बॉर्डर पर किसान भाइयों के साथ डटी रहेंगी।
पंजाब के बठिंडा की रहने वाली 65 वर्षीय शांति साल में दो बार ही घर गईं। वे कहती हैं कि एक साल से बैठे हैं तो थोड़ा टाइम और सही। जब तक हमारी सभी मांगें पूरी नहीं हो जाती, तब तक वे बॉर्डर पर किसान भाइयों के साथ डटी रहेंगी।
जसविंदर कौर, अमरजीत कौर, हरपाल कौर, जसविंदर कौर, बलजीत कौर, मलकीत कौर, गुरदीप कौर, करतार कौर, गर्जरन कौर, मंजीत कौर, गुरमीत कौर, मंजीत कौर यह सभी आंदोलन की शुरुआत से ही टीकरी बॉर्डर पर मंच के साथ बने पंडाल में लंगर की सेवा कर रही हैं। इस जत्थे की सिर्फ 3 महिलाएं ही दो बार घर गई हैं। बाकी पहले दिन से यहीं हैं। ये सभी मंडी कला की रहने वाली हैं। इस ग्रुप में 13 महिलाएं हैं। सुबह से शाम तक रोटी और सब्जी बनाती हैं।
जसविंदर कौर, अमरजीत कौर, हरपाल कौर, जसविंदर कौर, बलजीत कौर, मलकीत कौर, गुरदीप कौर, करतार कौर, गर्जरन कौर, मंजीत कौर, गुरमीत कौर, मंजीत कौर यह सभी आंदोलन की शुरुआत से ही टीकरी बॉर्डर पर मंच के साथ बने पंडाल में लंगर की सेवा कर रही हैं। इस जत्थे की सिर्फ 3 महिलाएं ही दो बार घर गई हैं। बाकी पहले दिन से यहीं हैं। ये सभी मंडी कला की रहने वाली हैं। इस ग्रुप में 13 महिलाएं हैं। सुबह से शाम तक रोटी और सब्जी बनाती हैं।
फतेहाबाद निवासी गुरमीत सिंह पहले दिन से टिकरी बॉर्डर पर आंदोलन में हैं। जोएसओ नौजवान छात्र सभा हरियाणा के नाम से लंगर चला रहे हैं। पूरे ग्रुप में 15 लोग हैं। रिश्तेदारी में शादी थी। चाचा के लड़के की मौत हुई, लेकिन आंदोलन स्थल नहीं छोड़ा। 50 एकड़ जमीन के मालिक हैं। परिवार के लोग शुरू में साथ आए थे, लेकिन बाद में लौट गए। कानून वापस होने की खुशी है, लेकिन अन्य कानून वापस होने पर ही घर वापसी करेंगे। गुरमीत सिंह बताते है कि परिवार ने आंदोलन में पूरा साथ दिया। पत्नी ने साथ दिया। गांव वालों ने साथ दिया। कोई भी दुख या तकलीफ आई, लेकिन पत्नी ने मुझे नहीं बताया। सब कुछ सामान्य होने पर ही बताया।
फतेहाबाद निवासी गुरमीत सिंह पहले दिन से टिकरी बॉर्डर पर आंदोलन में हैं। जोएसओ नौजवान छात्र सभा हरियाणा के नाम से लंगर चला रहे हैं। पूरे ग्रुप में 15 लोग हैं। रिश्तेदारी में शादी थी। चाचा के लड़के की मौत हुई, लेकिन आंदोलन स्थल नहीं छोड़ा। 50 एकड़ जमीन के मालिक हैं। परिवार के लोग शुरू में साथ आए थे, लेकिन बाद में लौट गए। कानून वापस होने की खुशी है, लेकिन अन्य कानून वापस होने पर ही घर वापसी करेंगे। गुरमीत सिंह बताते है कि परिवार ने आंदोलन में पूरा साथ दिया। पत्नी ने साथ दिया। गांव वालों ने साथ दिया। कोई भी दुख या तकलीफ आई, लेकिन पत्नी ने मुझे नहीं बताया। सब कुछ सामान्य होने पर ही बताया।
मुक्तसर साहिब निवासी गगनदीप आंदोलन के पहले दिन से यहां हैं। वे दो भाई हैं और 5 एकड़ जमीन के मालिक हैं। पूरे दिन किसानों के टेंटों में पानी सप्लाई करते हैं। भीषण गर्मी हो या सर्दी, उनका हौसला कम नहीं हुआ। गगनदीप बताते हैं कि यह किसानों की लड़ाई थी। सरकार ने किसानों की ताकत समझने में देरी कर दी। हम यह जंग पूरी जीत कर ही लौटेंगे। माता-पिता हैं नहीं। 25 नवंबर 2020 को घर का ताला लगाकर आया था। बड़ा भाई रमनदीप देश की सेवा कर रहा है। वह इस समय जालंधर में तैनात है।
मुक्तसर साहिब निवासी गगनदीप आंदोलन के पहले दिन से यहां हैं। वे दो भाई हैं और 5 एकड़ जमीन के मालिक हैं। पूरे दिन किसानों के टेंटों में पानी सप्लाई करते हैं। भीषण गर्मी हो या सर्दी, उनका हौसला कम नहीं हुआ। गगनदीप बताते हैं कि यह किसानों की लड़ाई थी। सरकार ने किसानों की ताकत समझने में देरी कर दी। हम यह जंग पूरी जीत कर ही लौटेंगे। माता-पिता हैं नहीं। 25 नवंबर 2020 को घर का ताला लगाकर आया था। बड़ा भाई रमनदीप देश की सेवा कर रहा है। वह इस समय जालंधर में तैनात है।
62 वर्षीय स्वरूप कौर सिंघु बॉर्डर पर सिलाई की सेवा करती हैं और सिलाई करने का कोई पैसा नहीं लेतीं। शुरुआत में बुढ़ापा पेंशन के पैसों से कपड़ा भी खुद लेकर आई, अब जो कपड़ा लेकर आते हैं, उनकी सिलाई का काम करती हैं। पंजाब के सिरंध से 8 किलोमीटर दूर खेड़ी गांव में जन्म हुआ। दिल्ली में शादी हुई। दिल्ली कालकाजी गोविंद की रहने वाली हैं। बेटे की मौत हो गई और बिटिया की शादी कर दी। कहती हैं कि घर पर अकेली थी तो सोचा कि किसानों की सेवा की जाए और आंदोलन का हिस्सा बनने आ गईं।
62 वर्षीय स्वरूप कौर सिंघु बॉर्डर पर सिलाई की सेवा करती हैं और सिलाई करने का कोई पैसा नहीं लेतीं। शुरुआत में बुढ़ापा पेंशन के पैसों से कपड़ा भी खुद लेकर आई, अब जो कपड़ा लेकर आते हैं, उनकी सिलाई का काम करती हैं। पंजाब के सिरंध से 8 किलोमीटर दूर खेड़ी गांव में जन्म हुआ। दिल्ली में शादी हुई। दिल्ली कालकाजी गोविंद की रहने वाली हैं। बेटे की मौत हो गई और बिटिया की शादी कर दी। कहती हैं कि घर पर अकेली थी तो सोचा कि किसानों की सेवा की जाए और आंदोलन का हिस्सा बनने आ गईं।
जींद निवासी डॉक्टर साक्षी पानू पहले दिन से आंदोलन में शामिल हैं। टीकरी बॉर्डर पर खुद का कैम्प लगाया हुआ है। 3 माह के बेटे वास्तविक को साथ लेकर आई थीं। आंदोलन में बेटा कब डेढ़ साल का हो गया, पता ही नहीं चला। बहादुरगढ़ में ही सेक्टर-2 में रहने लग गईं। खुद के स्तर पर खाप- खेड़ा-खेतों की विरासत व अगत संस्था के सहयोग से दवाइयां अरेंज कीं और अब इसी बैनर तले आंदोलन में किसानों की सेवा कर रही हैं। साक्षी बताती हैं कि किसानों की लड़ाई थी। किसान की बेटी हूं, किसान को मुसीबत में कैसे देख सकती हूं। जब तक आंदोलन चलेगा, यही रहूंगी।
जींद निवासी डॉक्टर साक्षी पानू पहले दिन से आंदोलन में शामिल हैं। टीकरी बॉर्डर पर खुद का कैम्प लगाया हुआ है। 3 माह के बेटे वास्तविक को साथ लेकर आई थीं। आंदोलन में बेटा कब डेढ़ साल का हो गया, पता ही नहीं चला। बहादुरगढ़ में ही सेक्टर-2 में रहने लग गईं। खुद के स्तर पर खाप- खेड़ा-खेतों की विरासत व अगत संस्था के सहयोग से दवाइयां अरेंज कीं और अब इसी बैनर तले आंदोलन में किसानों की सेवा कर रही हैं। साक्षी बताती हैं कि किसानों की लड़ाई थी। किसान की बेटी हूं, किसान को मुसीबत में कैसे देख सकती हूं। जब तक आंदोलन चलेगा, यही रहूंगी।
करतार सिंह निवासी कैथल, अंग्रेज सिंह निवासी अंबाला, सतनाम सिंह विर्क निवासी पटियाला, जयवीर सिंह निवासी रोहतक, राजेंद्र सिंह निवासी सोनीपत, करतार सिंह निवासी सोनीपत, यह छह आदमी 5 दिसंबर 2021 से सिंघु बॉर्डर भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
करतार सिंह निवासी कैथल, अंग्रेज सिंह निवासी अंबाला, सतनाम सिंह विर्क निवासी पटियाला, जयवीर सिंह निवासी रोहतक, राजेंद्र सिंह निवासी सोनीपत, करतार सिंह निवासी सोनीपत, यह छह आदमी 5 दिसंबर 2021 से सिंघु बॉर्डर भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
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