तैयारी:बारिश सीजन में खेतों से पानी निकासी के लिए लगेंगे 379 क्यूसिक क्षमता वाले 92 पंपसेट

सोनीपत3 वर्ष पहले
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  • 10 गांवों में लगे हैं 29 स्थाई पंपसेट, 63 पंपसेट होंगे अस्थाई, बरसात होने पर खेतों में नहीं होगा जलभराव

बरसात सीजन में खेतों में भरे पानी की निकासी के लिए सिंचाई विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। अधिकारियों ने कर्मचारियों को बरसात सीजन शुरू होने से पहले खेतों में लगाए जाने वाले पंपसेटों की मरम्मत का कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों के अनुसार चिह्नित गांवों में 92 पंप सैट लगवाए जाएंगे। पंपसेट 379 क्यूसिक क्षमता के होंगे। इनमें 63 पंप सैट अस्थाई होंगे। बरसात सीजन खत्म होने के बाद इन पंपों को हटा दिया जाएगा। 

प्रदेश में जुलाई माह में मानसून का आगमन हो जाता है। बरसात सीजन में खेतों में भरे अतिरिक्त पानी की निकासी ड्रेनों पर निर्भर रहती है। बनवासा, रिंढाणा, धनाना, छपरा, कहैल्पा, कथूरा आदि गांवों में खेतों का स्तर ड्रेन के स्तर से नीचे है। इसके चलते इन गांवों से खेतों से पानी की निकासी ड्रेन में कम होती है। इन गांवों के खेतों से अतिरिक्त पानी की निकासी पंप द्वारा की जाती है। सिंचाई विभाग की मैकेनिकल विंग ने चिह्नित गांवों में पंपसेटों की व्यवस्था करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पंपसैट लगाने का कार्य बरसात सीजन शुरू होने से पहले ही पूर्ण कर लिया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि बरसात सीजन शुरू होने से पहले सभी चिह्नित गांवों में अस्थाई पंपसैट भी लगवा दिए जाएंगे। 

सिंचाई विभाग ने क्षेत्र के खेतों से पानी निकासी के लिए 10 गांवों में स्थाई पंपसैट लगवा रखे हैं। इन पंपसेटों की क्षमता 225 क्यूसिक है। विभाग ने नांदल, रिंढाणा, कथूरा, बुटाना, आहुलाना, बनवासा, रोलाद, कासंडी, चटिया, सलारपुर माजरा आदि गांवों में 29 पंप सैट लगवा रखे हैं। इसके अतिरिक्त बरसात सीजन में विभाग द्वारा 35 डीजल पंपों की भी व्यवस्था की है। 

बनसासा, धनाना, कथूरा व रिंढ़ाणा अधिक संवेदनशील
सिंचाई विभाग की बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों की सूची में बनवासा, कथूरा, धनाना और रिंढ़ाणा अधिक संवेदनशील हैं। बरसात सीजन में इन गांवों के खेतों में पानी का स्तर दूसरे गांवों के खेतों से अधिक होता है। प्रत्येक बरसात सीजन में इन गांवों के खेतों में जलभराव हो जाता है। जिससे किसानों की फसलें खराब हो जाती हैं। अधिकारियों का कहना है इस बार खेतों में बरसात का पानी अधिक दिनों तक भरा नहीं रहने दिया जाएगा।

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