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नागरिक अस्पताल:बेड न होने से ठंड में लोहे की बेंच पर सो रहीं मां, एसएनसीयू में भर्ती हैं इनके बच्चे

सोनीपत6 दिन पहले
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सोनीपत. मदर्स रूम में जगह न होने से बरामदे में लगे लोहे के बेंच पर रजाई ओढ़कर लेटी दो प्रसूता।
  • ठंड से बचाव के लिए इन्हें रजाई भी अपने घर से लानी पड़ रही हैं

भले सरकार सुरक्षित प्रसव और जच्चा बच्चा की सुरक्षा पर हर साल करोड़ों रुपए खर्च कर रही हो, लेकिन नागरिक अस्पताल सुविधाओं के अभाव के कारण उनका इलाज मुश्किलों में हैं। नागरिक अस्पताल में कड़ाके की ठंड में कई प्रसूता बरामदें में बेंच पर सोने को मजबूर हैं। वह कंबल और रजाई भी अपने घर से लाती हैं।

सबसे ज्यादा दिक्कत उन प्रसूताओं को जिनके बच्चे अभी कम वजन के हैं और एसएनसीयू में भर्ती हैं। क्योंकि उनके लिए बनाया गया मदर रूम मात्र सात बेड का है जबकि यहां इस समय भी 15 बच्चे भर्ती हैं। रात को ठंड ज्यादा होने पर दो रिजाई ओड़कर सोना पड़ रहा है। यहां प्रसूताओं को संख्या ज्यादा देखकर सात साल पहले बेडों की संख्या 100 करने का प्रपोजल बना था लेकिन आजतक इसपर काम नहीं हुआ।

18 बेड की एसएनसीयू, मदर रूम सात बेड का

नागरिक अस्पताल में एसएनसीयू 18 बेड की है। यहां समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों को इलाज के लिए रखा जाता है। अस्पताल में अकसर एसएनसीयू में 11 से 15 बच्चे रहते हैं। जबकि अस्पताल में बच्चों की मां के लिए बनाया गया मदर रूम 7 बेड का है। यहां अतिरिक्त बेड लगाने का स्पेश भी नहीं है। इससे 50 फीसदी प्रसूताओं को बेंच पर ही सोना पड़ता है। इस ठंड में यह उनके लिए खतरना हो सकता है।

कोरोना को लेकर सतर्कता भी नहीं

मदर रूम में जो बेड रखे गए हैं वह एक दूसरे सटे हुए हैं। यहां कोरोना को लेकर सतर्कता नहीं है। महिलाओं के बीच सोशल डिस्टेंस नहीं बन पा रहा। ऐसे में यहां यह चूक भारी पड़ सकती है।

ओपीडी एरिया में भी गर्भवती परेशान

अस्पताल के ओपीडी एरिया में भी गर्भवती महिलाएं परेशानी हो रही हैं। महिलाओं को ओपीडी के समाने खड़ा होकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। इसका प्रमुख कारण ओपीडी के बाहर लगी टोकन मशीन खराब होना है। मशीन खराब होने से गर्भवती महिलाओं को अपने नंबर का पता नहीं चल रहा।

मां की पड़ती है जरूरत, इसलिए यहां ठहरना जरूरी

जो बच्चें एसएनसीयू अर्थात नर्सरी में भर्ती करके रखे जाते हैं उन्हें मां की जरूरत पड़ती रहती है। कभी शौच साफ करने के लिए तो कभी दूध पिलाने के लिए। जबकि अस्पताल में नर्सरी के बेड के अनुसार मदर रूम की व्यवस्था ही नहीं है। आधे बच्चों की माताओं को ईधर-उधर बैठकर समय बिताना पड़ता है। जबकि रात को सोने की चिंता दिन भर रहती है। अस्पताल में बरामदें में रखे बेंच शाम होते ही बिस्तर बन जाते हैं।

नागरिक अस्पताल के अंदर मदर रूम छोटा है। इसका विस्तार कर जल्दी ही कर प्रसूता के ठहरने की व्यवस्था की जाएगी। यह काम प्राथमिकता से किया जाएगा। -डॉ. जयभगवान जाटान, पीएमओ नागरिक अस्पताल, सोनीपत।

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