निहंगों के डेरे में ही मिला ‘मर्डर वैपन’:सिंघु बॉर्डर पर 2 तलवारों से काटे गए लखबीर के हाथ-पांव, खून से सने कपड़े भी मिले

सोनीपत2 महीने पहले
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हरियाणा में सोनीपत के सिंघु बॉर्डर पर लखबीर सिंह की हत्या जिन दो तलवारों से की गई, उन्हें पुलिस ने बरामद कर लिया है। सोनीपत पुलिस ने दावा किया कि केस की जांच कर रही दो स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीमों (SIT) में से एक टीम ने ‘मर्डर वैपन’ निहंगों से डेरे से बरामद किया।

लखबीर की हत्या की बात कबूल कर चुके निहंग नारायण सिंह, सरबजीत सिंह, भगवंत सिंह और गोविंदप्रीत के खून से सने वो कपड़े भी पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिए हैं जो उन्होंने वारदात के समय पहन रखे थे।

इस केस में सरेंडर कर चुके चारों निहंगों की निशानदेही पर SIT ने सोमवार को सिंघु बॉर्डर स्थित उनके डेरे से वो दोनों तलवारें बरामद कीं जिनसे लखबीर का हाथ और पांव काटा गया। इन्हीं दोनों तलवारों से उसके शरीर पर घाव किए गए।

फोरेंसिक टीम करेगी जांच
पुलिस ने खून से सने कपड़े और दोनों तलवारों को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। फोरेंसिक टीम पता लगाएगी कि कपड़ों पर लगा खून लखबीर का है या नहीं? गौरतलब है कि इससे पहले शुक्रवार शाम को सरबजीत सिंह के सरेंडर के समय पुलिस को निहंगों की ओर से मर्डर वैपन बताकर एक तलवार सौंपी गई थी, मगर जांच में स्पष्ट हो गया कि लखबीर को उस तलवार से नहीं मारा गया था।

सरेंडर कर चुके निहंग नारायण सिंह ने रविवार को सोनीपत कोर्ट में जज के सामने कबूल किया था कि उसने अपनी तलवार से लखबीर का पांव और सरबजीत ने उसका हाथ काटा था। भगवंत और गोविंदप्रीत ने लखबीर की बॉडी बैरिकेड पर लटकाने में मदद की थी।

भगवंत ने लखबीर को पावन ग्रंथ उठाकर भागते देखा: SP
सोनीपत के SP जशनदीप सिंह रंधावा ने सोमवार देर शाम बताया कि चारों निहंगों से पूछताछ में वारदात की कड़ियां जुड़ती दिख रही हैं। निहंगों से पूछताछ में बताया कि सबसे पहले भगवंत सिंह ने लखबीर को श्री गुरु ग्रंथ साहिब का पावन स्वरूप उठाकर भागते हुए देखा। भगवंत सिंह के तुरंत शोर मचाने पर लखबीर पकड़ा गया। लखबीर की मौत हो जाने के बाद उसे बैरिकेड से लटकाने में भी भगवंत सिंह शामिल रहा।

केस की जांच के लिए बनाई दो SIT
इस बीच हरियाणा पुलिस ने लखबीर सिंह की हत्या से जुड़े केस की जांच के लिए 2 स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीमें (SIT) बना दी हैं। ये दोनों SIT इस केस की अलग-अलग एंगल से जांच करेंगी। SIT में शामिल अधिकारी लखबीर की हत्या की असल वजहों के साथ-साथ उस समय मौका-ए-वारदात के हालात के अलावा निहंगों की ओर से लगाए जा रहे बेअदबी के आरोपों की पड़ताल भी करेंगे।

इनमें से पहली SIT IPS अधिकारी मयंक गुप्ता की अगुआई में बनाई गई है। मयंक गुप्ता सोनीपत के ही खरखौदा में बतौर ASP तैनात हैं। उनके नेतृत्व वाली SIT इस घटना से जुड़े उन तमाम वीडियो की जांच करेगी जो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुए।

दूसरी SIT को इस केस की ओवरऑल जांच का जिम्मा दिया गया है। इसकी अगुवाई सोनीपत के DSP वीरेंद्र सिंह कर रहे हैं। अभी तक इस मामले में ओवरऑल जांच अधिकारी (IO) वीरेंद्र सिंह ही हैं।

मारने के बाद लखबीर सिंह को इस जगह लटकाया गया था।
मारने के बाद लखबीर सिंह को इस जगह लटकाया गया था।

बेअदबी का मामला दर्ज नहीं
निहंगों ने सोनीपत के SP जशनदीप सिंह रंधावा से मिलकर शिकायत दी थी कि बेअदबी का मामला दर्ज कर उसकी भी जांच की जाए। हालांकि सोमवार शाम तक शिकायत पर पुलिस ने ऐसा कोई मामला दर्ज नहीं किया। SP रंधावा ने बताया कि अभी निहंगों की शिकायत की जांच चल रही है।

3 दिन बाद रोहतक लौटे रेंज IG
हरियाणा पुलिस पर इस वारदात के बाद कितना दबाव था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रोहतक रेंज के IG संदीप खिरवार 3 दिन सोनीपत में ही जमे रहे। शनिवार को सरेंडर करने वाले 3 निहंगों नारायण सिंह, भगवंत सिंह और गोविंदप्रीत को रविवार को कोर्ट में पेश करने से पहले सेक्टर-7 के सीआईए थाने ले जाया गया।

वहां संदीप खिरवार और सोनीपत के SP जशनदीप रंधावा ने तकरीबन घंटेभर तक खुद निहंगों से पूछताछ की। सोमवार को संदीप खिरवार रोहतक लौट गए।

सोनीपत पुलिस के सामने कई चुनौतियां
सिंघु बॉर्डर पर शुक्रवार सुबह हुई लखबीर सिंह की हत्या में बेशक चार निहंगों ने सरेंडर कर कत्ल करने की बात कबूल कर ली है मगर इस मामले में अभी भी सोनीपत पुलिस पर दबाव बना हुआ है। सोनीपत पुलिस चारों निहंगों को पुलिस रिमांड पर ले चुकी है और अब उसके सामने इस केस की सभी कड़ियां जोड़ने की चुनौती है।

पुलिस मर्डर वैपन और खून से सने कपड़े भी बरामद कर चुकी है, लेकिन घटनास्थल की शिनाख्त करना और इस केस में यदि कोई और भी शामिल है तो उसे पकड़ना बाकी है। निहंग बार-बार कह रहे हैं कि 20 लोगों को बेअदबी करने के लिए 30-30 हजार रुपए दिए गए हैं और उनमें से लखबीर भी एक था।

बाकी बचे हुए 19 लोग कौन हैं? ये भी पुलिस को पता लगाना है। लखबीर आखिर अपने गांव से सिंघु बॉर्डर पर क्यों आया? इसका जवाब भी तलाशना बाकी है।

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