नगर निगम का खजाना खाली::छूट व नोटिस के बाद भी नहीं हुई प्रॉपर्टी टैक्स की रिकवरी

सोनीपत2 महीने पहले
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  • जमीन बेच लगा रहे टेंडर, नए प्रोजेक्ट रोके, 80 करोड़ टैक्स वसूल नहीं पाए, केवल नोटिस दे रहे

नगर निगम में वार्डों के विकास के लिए अभी बजट की कमी है। हालात ऐसी है कि बेची गई जमीन से मिली राशि से नए टेंडर लगाए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर नगर निगम का करोड़ों रुपए का प्रॉपर्टी टैक्स डिफाल्टर दबाए बैठे हैं। निगम अधिकारी टैक्स वसूली में सफल साबित नहीं हो पा रहे हैं। एक बार नहीं बार-बार नोटिस के बावजूद हालात नहीं सुधरने के बजाए बिगड़ रहे हैं। नगर निगम का इस वित्त वर्ष का लक्ष्य 25 करोड़ रुपए था। अभी 10 करोड़ ही वसूली हुई है। महज चार महीने शेष है, निगम लक्ष्य से करीब 15 करोड़ रुपए अभी भी दूर है। शहर में प्रोपर्टी टैक्स के तौर पर नगर निगम के 80 करोड़ रुपए बकाया है। बार-बार छूट दी गई. लेकिन फिर भी टारगेट से अधिकारी दूर हैं। बकायादारों पर ठोस कार्रवाई नहीं होना इसका कारण माना जा रहा है। नगर निगम के प्रॉपर्टी टैक्स के डिफाल्टरों के प्रति ठंडे रूख का आलम यह है कि सिलिंग की भी परवाह नहीं है। मुरथल में चार ढाबों को नगर निगम ने सील किया था, लेकिन वहां व्यापारिक कारोबार अभी भी चल रहा है। इन ढाबों पर निगम का कभी 85 लाख रुपए बकाया है।

नोटिस पर नोटिस, रिकवरी कम हो रही

नगर निगम ने शहर में पांच लाख से अधिक वाले 100 बकायदारों को नोटिस जारी किया हुआ है। बार-बार नोटिस जारी हो रहे हैं लेकिन पूरी राशि रिकवरी नहीं हो रही है। 20 प्रतिशत ने इनमें से कुछ-कुछ राशि जमा करवाई है। टैक्स वसूली में पिछड़ रहे नगर निगम से शहर में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

टैक्स वसूली में देरी से लाेगों को यह नुकसान

1. विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। छह वार्डों के नए विकास कार्य इंजीनियरिंग विंग से मंजूर होने के बावजूद अकाउंट ब्रांच में रोक दिए गए। बाद में दावा किया गया कि पहले पुराने कार्य करवाए जाएंगे, इसके बाद नए टेंडर होंगे। 2. निगम चुनाव पर खर्च की राशि की अदायगी तक नहीं नगर निगम के पिछले साल चुनाव में खर्च हुई राशि का भुगतान अभी तक नहीं हो सका है। विभिन्न मदों पर 26 लाख रुपए की राशि इस पर खर्च हुई थी, लेकिन डीसी कार्यालय तो कभी नगर निगम में चक्कर काटने में यह भुगतान अब अटका हुआ है। 3.बजट की कमी आ असर निगम की सेविंग योजनाओं पर भी पड़ा है। हाल ही में निगम ने एक 15 करोड़ रुपए की जमीन बेची थी, जिसकी एफडी करवाने की योजना थी, लेकिन अब विकास कार्यों के लिए राजनैतिक दबाव के चलते उसे खर्च किया जा रहा है।

संस्थान ही नहीं सरकारी विभाग भी नहीं दे रहे लाखों रुपए टैक्स

प्रतिष्ठान प्रॉपर्टी टैक्स अनंतराज लिमिटेड 19 करोड़ रुपए साई सेंटर 2करोड़ 23 लाख हरचरण सिंह देवडू 98 लाख रुपए किशनचंद, वरदान चौक 56 लाख रुपए पन्ना लक्ष्मी लिमिटेड 55 लाख रुपए जुगल किशोर राइस मिल 49 लाख रुपए गरम धर्म ढाबा 49 लाख रुपए मोतीलाल खेल स्कूल राई 42 लाख रुपए महेन्द्र सिंह रायपुर 42 लाख रुपए हरियाणा एग्रो इंडस्ट्रीज 40 लाख रुपए

5 करोड़ के ऊपर के कार्यों पर लगी है रोक

दाे माह से ग्रांट नहीं मिली है। पांच करोड़ से अधिक के नए कार्यों पर रोक लगा दी गई है। इससे रोड रिपेयर, सीवरेज व दुरुस्त करने काम रुक गए। इन कार्यों के लिए तकनीकी मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन वित्तीय मंजूरी अभी नहीं मिल सकी है। इनके लिए निगम को अपनी एफडी तोड़ने की नौबत आती।
निगम का दावा है कि आठ महीनों म करीब 93 करोड़ 35 लाख रुपए के कार्य करवाए जा रहे हैं। इन दिनों प्रदूषण को लेकर निर्माण कार्यों पर रोक है।
बिना टैक्स चुकाए सील खोलने पर होगी कार्रवाई
प्रॉपर्टी टैक्स डिफॉल्टरों कड़ा रुख अपनाएगा। जिन लोगों ने सीलिंग के बावजूद बिना टैक्स चुकाए प्रतिष्ठान खोले हैं, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं दूसरी ओर अन्य बड़े डिफाल्टर प्रतिष्ठानों को सील किया जाएगा। इसके लिए प्रशासनिक अनुमति ले ली गई है।

राजेन्द्र चुघ, जेटीओ, सोनीपत।​​​​​​​

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