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सेवा का भाव:10 हजार बेसहारा का बन चुके सहारा, शेल्टर होम बनाने के लिए बेचेंगे मकान

सोनीपतएक महीने पहले
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बेसहारा का अंतिम संस्कार करते देव गोस्वामी व उनकी पत्नी। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
बेसहारा का अंतिम संस्कार करते देव गोस्वामी व उनकी पत्नी। (फाइल फोटो)
  • ये समाज के उन लाेगाें की उम्मीद जिनका काेई नहीं, मृतकों को रीति-रिवाज के साथ देते हैं अंतिम विदाई

जितेंद्र बूरा, ​​ सड़कों पर भूखे-बदहाल बेसहारा लोगों के लिए आशियाना बनाने के लिए गन्नौर क्षेत्र के खेड़ी गुज्जर निवासी 62 वर्षीय देव गोस्वामी दिल्ली में अपना मकान बेचेंगे। 25 प्रतिशत राशि बेटा-बेटी को और बाकी द्वारका में किराए की जमीन पर चला रहे शेल्टर होम के लिए जमीन खरीदेंगे। पिछले 36 साल से बेसहारा को सहारा दे रहा यह ट्रक चालक देवो आश्रम के नाम से दो शेल्टर होम चला रहे हैं, एक गन्नौर में और एक दिल्ली के द्वारका में। गन्नौर में 95 और द्वारका में 65 लोगों का पालन-पोषण हो रहा है।

चित्तौडगढ़ में जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई के लिए सेंटर भी शुरू किया है। उन्होंने बताया कि 42 साल पहले काम-धंधे के तौर पर ट्रक पर जाना शुरू कर दिया। एक बार ट्रक ड्राइवर से कहासुनी हुई तो मुझे महाराष्ट्र में बीच रास्ते में ही छोड़ दिया। 3-4 दिन भूखा-प्यासा पैदल चला था। कहीं कुछ मांगकर खाया तो कहीं लोगों की डांट सहनी पड़ी। जैसे-तैसे दिल्ली पहुंचा। उस पल मेरी आंखों में आंसू थे पर मन में बस यही आया कि एक दिन ऐसा बनना है कि मैं सड़कों पर ऐसे बेसहारा का सहारा बनूं।

पत्नी संस्कार में देती है अर्थी को कंधा : न धर्म और न किसी जात की बाधा रखते हैं। देव के साथ उनकी पत्नी तारा भी सेवा में लगी है। जब पहली बार देव ने एक लावारिस का अंतिम संस्कार किया तो उनकी पत्नी ने उस अर्थी को कंधा दिया। सैकड़ों मृत लोगों का अंतिम संस्कार कर चुके देव कहते हैं कि उनकी पत्नी सैकड़ों की अर्थी को कंधा दे चुकी हैं। शेल्टर होम में पहुंचने वाला हर लावारिश उनके परिवार का सदस्य बन जाता है।

सीएम ने भी ट्वीट पर गोस्वामी के नेक कार्यों की सराहना की थी

गोस्वामी ने शेल्टर होम में बकायदा चिकित्सा सुविधा, खाना, कपड़ा और रहने की व्यवस्था की है। 10 हजार से अधिक लोगों को सड़कों से उठाकर शेल्टर होम में ला चुके हैं। सबसे पहले उन्हें शीशा दिखाते हैं फिर नहलाते हैं। हेयर कट, ड्रेसिंग होती है और इलाज चलता है। जो लोग ठीक हो जाते हैं और उनके परिवारों की पहचान हो जाती है तो उन्हें उसकी सहमति से घर भेज दिया जाता है। बाकी शेल्टर होम में जीवन बिताते हैं। मुख्यमंत्री ने भी कुछ माह पहले ट्वीट कर इनके नेक कार्यों की सराहना की थी।

पिता ने दिल्ली में मकान लिया था। उसके बाद वे भी वहां रहते आए हैं। गोस्वामी ने कहा कि द्वारका में किराए की जगह एक प्लाट लेकर शेल्टर होम बनाने की इच्छा है। ऐसे में घर वालों की सहमति से अब दिल्ली वाला मकान बेचना निकाल दिया है। करीब 85 लाख का यह जाएगा। सोनीपत के सब इंस्पेक्टर जगत सिंह, समाज कल्याण शिक्षा समिति अध्यक्ष आनंद, समाज सेवा समिति अध्यक्ष अनिल गुप्ता आदि लोग भी शहर में बेसहारा लोगों को ऐसे अपना घर आश्रम में पहुंचा रहे हैं।

1984 में ड्राइवरी छोड़ पुल के नीचे तिरपाल लगा शुरू की सेवा

62 वर्ष के हो चुके देव के पिता भी ड्राइवर थे। नौंवी तक पढ़े फिर वे भी ड्राइवरी करने निकल पड़े, लेकिन सड़कों पर असहाय लोगों को देख मन बदला और 1984 में सेवा शुरू की। रास्तों में न जाने कितने ही लोगों को भूखे-प्यासे, नंगे पैर, बहुत बार बिना कपड़ों के चलते देखा। उन्हें खाना खिलाता। भावना बदली और ड्राइवरी छोड़ कर तिहाड़ जेल के पास पुल के नीचे ऐसे लोगों के खाने और तिरपाल लगाकर रहने की व्यवस्था की।

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