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सोनीपत का जलवा:टोक्यो ओलिंपिक के लिए सोनीपत के छह खिलाड़ियों का हुआ चयन, 20 जगह बनाएं जाएंगे सेल्फी पाॅइंट

सोनीपतएक महीने पहले
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सोनीपत के 4 महिला खिलाड़ी और दो पुरुष खिलाड़ियों ने टोक्यो ओलिंपिक के लिए क्वालीफाई किया है। - Dainik Bhaskar
सोनीपत के 4 महिला खिलाड़ी और दो पुरुष खिलाड़ियों ने टोक्यो ओलिंपिक के लिए क्वालीफाई किया है।
  • चार महिला खिलाड़ी व दो पुरुष खिलाड़ी टोक्यो ओलिंपिक में दिखाएंगे दमखम

सोनीपत के खिलाड़ियों ने नया इतिहास रच दिया है। जिले के 6 खिलाड़ियों ने टोक्यो ओलिंपिक के लिए क्वालीफाई किया है। इनमें 4 महिला खिलाड़ी और दो पुरुष खिलाड़ी शामिल हैं। इस बार ओलिंपिक में और बेहतरीन प्रदर्शन की उम्मीद लगाई जा रही है। खेल प्रतिभाओं को प्रेरणा व प्रोत्साहन देने के लिए जिला प्रशासन भी आगे आया है।

खेल विभाग के माध्यम जिले में 20 स्थानों पर ओलिंपिक सेल्फी पाॅइंट बनाया जाएगा। 23 जुलाई 2021 से 5 सितंबर 2021 तक टोक्यो (जापान) में आयोजित होने वाले ओलिंपिक खेलों में भाग लेने के लिए मोनिका मलिक (हॉकी), निशा (हॉकी), नेहा (हॉकी), सुमित (हॉकी), रवि दहिया (रेससिंग) तथा सोनम मलिक (रेससिंग) ने क्वालीफाई किया है। मोनिका मलिक गामड़ी गांव की है व निशा वेस्ट राम नगर सोनीपत की, नेहा आर्य नगर सोनीपत की, रवि दहिया नाहरी गांव के तथा सोनम मलिक मदीना गांव की और सुमित कुराड़ गांव के निवासी हैं।

कुश्ती हाकी में फिर सोनीपत का जलवा
उपायुक्त ललित सिवाच ने टोक्यो ओलिंपिक के लिए चुने गए सभी खिलाड़ियों को बधाई दी। उन्होंने चयनित खिलाड़ियों को ओलंपिक में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं भी दी। उन्होंने कहा कि कुश्ती और हॉकी में सोनीपत के खिलाड़ियों ने सदैव चमक बिखेरी है। एक बार पुन: इन दोनों खेलों में जिला के खिलाड़ियों ने जिले का नाम रोशन किया है।

मनोबल बढ़ाने के लिए चलाएंगे अभियान
जिला खेल व युवा कार्यक्रम अधिकारी ज्योति रानी ने बताया कि कहा कि भारतीय खेल प्राधिकरण तथा भारतीय ओलिंपिक संघ की ओर से क्वालीफाई खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि क्वालीफाई खिलाड़ियों के अभिभावकों को गणमान्य व्यक्तियों से सम्मानित करवाया जाएगा।

तीन हॉकी खिलाड़ियों की ये है मजबूती
सुमित कुमार: सोनीपत के गांव कुराड निवासी सुमित का बचपन बेहद गरीबी में बीता। संसाधनों की कमी ऐसी कि हॉकी स्टिक तो छोड़िए, जूते खरीदने तक के भी पैसे नहीं थे। रोजाना गांव से ही पैदल साई सेंटर अभ्यास के लिए जाते थे। अभ्यास कर मिडफील्डिंग में मिस्टर भरोसेमंद बन गए। जूनियर वर्ल्ड चैंपियन टीम का हिस्सा रहे हैं। इसके अलावा वे पहले इंडिया हॉकी लीग में अमेजिंग प्लेयर ऑफ टूर्नामेंट बने।

सुरेंद्र कुमार: मजबूत डिफेंस के चलते सुरेंद्र भारतीय पुरुष हॉकी में दीवार की भूमिका निभाते हैं। वे आज भी समय की परवाह किए बिना घंटों एक ही पोजिशन में अभ्यास करते हैं। करनाल के बराना गांव निवासी सुरेंद्र का परिवार बेहतर शिक्षा के लिए कुरुक्षेत्र आ गया था। वे वर्ष 2011 के जूनियर नेशनल गेम्स में 50 साल बाद चैंपियन बनने वाली टीम हरियाणा का हिस्सा थे। फिर 2012 में इंडिया की जूनियर व 2016 में सीनियर टीम में शामिल हुए।

गुरजंट सिंह: पंजाब के अमृतसर में जन्मे गुरजंत सिंह कॅरिअर के शुरुआती पांच साल तक हरियाणा के लिए खेलते रहे। दो भाइयों की जोड़ी के रूप में गुरजंट सिंह ने कजिन सिमरनजीत सिंह के साथ खेलते हुए देश को जूनियर वर्ल्ड कप जीताया। सीनियर टीम में वह मनोवैज्ञानिक की भूमिका निभाते हुए जूनियर खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाते हैं।

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