सिंघु बॉर्डर के व्यापारी परेशान:किसान आंदोलन से प्रभावित कारोबार पटरी पर लौटने की आस बढ़ी, धरना खत्म न करने के बयान से चिंता भी

सोनीपत6 महीने पहले
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कृषि कानून वापसी के ऐलान के बाद भी सिंघु बॉर्डर पर किसानों का जमावड़ा ज्यों का त्यों है। किसानों के जश्न के माहौल के बीच व्यापारियों को उम्मीद बंधी है कि रोजगार जल्द पटरी पर आएगा। हालांकि किसान नेताओं ने बयान दिए हैं कि अभी आंदोलन खत्म नहीं होने वाला, इसको लेकर बॉर्डर आसपास के दुकानदारों की चिंता बढ़ गई। कारेाबारियों की अपील है कि केंद्र सरकार जल्द किसानों से वार्ता कर उनके घर जाने का माहौल बनाए।

27 का स्टाफ था अब 2 बचे हैं

सिंघु बॉर्डर पर कोस्ट टू कोस्ट में काउंटर संभाल रहे मैनपुरी यूपी निवासी श्याम सिंह ने कहा कि पिछले साल 27 सितंबर को शोरूम आरंभ किया था। कुल 27 का स्टाफ था। अब मैं और एक नौकर बचे हैं। जो सीनियर हैं, वे घर पर ही रहते हैं। दो माह ही काम चला था कि किसान यहां जम गए। अब डेढ़ लाख रुपए महीने का भाड़ा, बैंक लोन, बिजली बिल का खर्च भी नहीं निकल पा रहा। किसान आंदोलन खत्म होने पर ही अच्छे कारोबार की उम्मीद है।

सिंघु बॉर्डर के पास खाली पड़ा कॉस्ट टू कॉस्ट का शोरूम।
सिंघु बॉर्डर के पास खाली पड़ा कॉस्ट टू कॉस्ट का शोरूम।

लगता नहीं अभी किसान उठेंगे

तायल इलेक्ट्रिक शॉप के मालिक शिवराज तायल ने कहा कि पिछले एक साल से काम धंधा कुछ नहीं बचा। अभी लगता नहीं कि किसान उठेंगे और रोड पर आवागमन शुरू होगा। उनको सोनीपत से दुकान पर आने जाने में ही परेशानी झेलनी पड़ रही है। काम धंधा 90 प्रतिशत तक डाउन है। किसानों की मांग जल्द स्वीकार हों, ताकि वे घरों को लौटें।

काम धंधा नहीं बचा

सागर इंटर प्राइज के मालिक सुनील कुमार ने कहा कि किसान आंदोलन का उनके कारोबार पर पूरा असर पड़ा है। किसानों की मांगों पर अब जो सकारात्मक माहौल बना है, उम्मीद जगी है कि जल्द वे यहां लौट जाएंगे। किसानों ने भी समस्याएं झेली हैं, लेकिन हमारा तो रोजगार ही ठप पड़ा है।

सोनीपत में खाली पड़ी मार्केट।
सोनीपत में खाली पड़ी मार्केट।

इंडस्ट्री खत्म हो गई

कुंडली इंस्डस्ट्रीयल एसोसिएशन के प्रधान राकेश देवगन ने कहा कारेाबारियों को करोड़ों का नुकसान झेलना पड़ा है। न तो तैयार माल को भेजने के रास्ते हैं और न ही काई ऑर्डर ले पा रहे। सरकार को कई बार समस्याएं बता चुके हैं। अनेक बैठकें हो चुकी हैं। कोई समाधान नहीं निकला। उम्मीद है कि किसानों और सरकार में अब माहौल सकारात्मक बातचीत का बनेगा और उनकी परेशानी भी दूर होगी।