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वैध कॉलोनाइजर के खिलाफ 900 शिकायतें:फाइलों में दफन हैं शिकायतें, कार्रवाई का पता विभाग को भी नहीं, अब कर रहा रिव्यू

सोनीपत2 महीने पहलेलेखक: जितेंद्र बूरा
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नाथूपुर में अवैध निर्माण हटाते हुए जेसीबी मशीन। - Dainik Bhaskar
नाथूपुर में अवैध निर्माण हटाते हुए जेसीबी मशीन।
  • सरकार की 7ए की सख्ती के बाद अब डीटीपी ने बनाई रिव्यू टीम
  • दो साल से लॉकडाउन और महामारी की आड़ में बढ़ रहे अवैध निर्माण

प्रशासनिक तालमेल की कमी से अवैध कॉलोनाइजर के हौंसले बुलंद होते गए और अवैध कॉलोनियां बढ़ती गई। पिछले दस साल में नगर योजनाकार विभाग की तरफ से 900 शिकायतें अवैध कॉलोनी डेवलप करने या अवैध निर्माण की पुलिस को दी गई। अधिकतर की एफआईआर नहीं हुई तो कई शिकायतें फाइलों में दबकर रह गई।

सरकार ने 7ए नियम में बदलाव कर सख्ती शुरू की तो अब नगर योजनाकार विभाग इन शिकायतों का रिव्यू कर स्टेटस रिपोर्ट बनाकर आगामी कार्रवाई करेगा। हालात यह हैं कि पिछले डेढ़ से दो साल में ही लॉकडाउन, कोरोना महामारी व किसान आंदोलन की आड़ में 25 से अधिक जगह पर अवैध निर्माण या प्लॉटिंग हुई है।

प्रदेश सरकार द्वारा हरियाणा डेवल्पमेंट एंड रेगुलेशन ऑफ अर्बन एरिया एक्ट के सेक्शन 7ए में बदलाव कर लागू किया जा चुका है। नगर योजनाकार विभाग को सख्त हिदायत हैं कि अवैध कॉलोनियां न पनपें। इस पर जिले में डीटीपी की तरफ से कार्रवाई शुरू की गई है। सख्ती के बाद टीमें गठित कर निर्माण हटाने की कार्रवाई शुरू हुई है।

नाथुपुर के पास अवैध कमर्शियल साइट इन दिनों तैयार हो रही है। हाईवे के नजदीक होने के चलते इसे अवैध तरीके से डेवल्प कर बेचने की तैयारी है। शुक्रवार को डीटीपी टीम ने यहां पीला पंजा चलाया। अवैध तरीके से बनाई नींव व दीवारों को गिराया गया व रास्ता उखाड़ा दिया गया।

इस साल 40 पर केस, हर शिकायत रिव्यू के लिए टीम

40 के करीब एफआईआर पिछले दिनों में अवैध निर्माण और अवैध कॉलोनाइजर के खिलाफ करवाई हैं। अब पुरानी शिकायतों का ग्राउंड स्टेटस लिया जाएगा कि पुलिस की तरफ से लंबित है या संबंधित ने तय नियमानुसार रेगुलाइजेशन जमीन का करवा लिया है। इसके लिए अलग से रिव्यू टीम लगाई गई है ताकि थाना व चौकी अनुसार अपडेट लिया जाता रहे और ग्राउंड पर जमीन का स्टेट्स पता चले।

बिना एनओसी नहीं हो सकता निर्माण

कंट्रोल्ड एरिया में एक एकड़ से कम भूमि की रजिस्ट्री बिना डीटीपी की एनओसी के नहीं हो सकती। शहरी क्षेत्र में भी सिर्फ वैध कॉलोनियों में नगर निगम या परिषद के नो ड्यूज देने के बाद ही रजिस्ट्री हो सकेगी। बदलाव के तहत कंट्रोल्ड एरिया में एग्रीकल्चर लैंड की जगह खाली जमीन नाम दिया गया है। अवैध कॉलोनी में किसी ने प्लॉट लिया है या मकान बनाया है, वह अब बेचकर आगे किसी के नाम रजिस्ट्री नहीं करा सकता।

गन्नौर में कार्रवाई हुई तो लेने लगे सीएलयू

लॉकडाउन में कंटेनमेंट जोन की पालना और किसान आंदोलन में पुलिस की ड्यूटियों के बीच लंबे समय में पुलिस की उपलब्धता नहीं हो पाई। इसका फायदा अवैध कॉलोनाइजर ने भी उठाया है। 25 से अधिक जगह फिर से अवैध निर्माण पनपने लगे हैं। बिना सीएलयू के इंडस्ट्री की प्लॉटिंग व अन्य रिहायशी प्लॉटिंग के प्रयास हुए हैं। डीटीपी ने डीसी और एसपी को पत्र लिखकर लगातार पुलिस उपलब्धता की मांग की है। इसके तहत कार्रवाई की जा रही है।

40 हजार से अधिक लोग किराए के भवनों में, छोटे प्लॉट के 9 लाइसेंस मिले

अवैध कॉलोनी में रजिस्ट्री नहीं होने, सुविधा न मिलने झमेले हैं। शहर में 40 हजार से अधिक लोग किराए के भवनों में रहते हैं। हर साल 2500 से अधिक को खुद के आवास की आवश्यकता है। सेक्टरों में जमीन के ऊंचे दाम को देखते आम आदमी के लिए प्लॉट लेना मुश्किल होता है। विभाग ने सोनीपत में दीनदयाल जन आवास योजना के तहत 9 लाइसेंस विभिन्न रियल इस्टेट कंपनी को दिए हैं।

जिले में कहां तक कंट्रोल एरिया

सोनीपत शहर से बड़वासनी तक, ठरू, अब्दुलपुर, कुराड़ इब्राहिमपुर के क्षेत्र तक कंट्रोल्ड एरिया है। हाईवे की तरफ हसनपुर, मुरथल, बख्तावरपुर, मेहंदीपुर, असदपुर, नांदनौर, बसौदी, दीपालपुर, खेवड़ा, जाखौली, पबसरा, मनोली का काफी क्षेत्र, बाकीपुर, दहिसरा, जाटी कलां, जाटी खुर्द, सेरसा, कुंडली, बजीदपुर सबौली, मुनिरपुर, अकबरपुर बारोटा, छतहरा बहादुरपुर, अब्बासपुर, बिदनौली, रोहट का कुछ क्षेत्र।

शिकायतों पर लगातार चल रही कार्रवाई

कंट्रोल्ड एरिया में अवैध प्लॉट या निर्माण की रजिस्ट्री के लिए एनओसी नहीं दी जाएगी। 7ए का बदलाव सख्ती से लागू किया जा रहा है। अवैध कॉलोनाइजर पर कार्रवाई के लिए पुरानी शिकायतों का रिव्यू किया जाएगा। पिछले कुछ महीनों में 40 से अधिक एफआईआर करवा चुके हैं। नरेश कुमार, डीटीपी, सोनीपत

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