नाहरी से लाइव:ग्रामीण बोले- छौरे ने जमकर लड़ी कुश्ती, जीत-हार तो चलती रहती है, लौटने पर जश्न मनाएंगे

राई/सोनीपत6 महीने पहलेलेखक: देवेंद्र शर्मा
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राई. गांव की चौपाल में अपने लाडले की फाइनल कुश्ती देखते ग्रामीण। - Dainik Bhaskar
राई. गांव की चौपाल में अपने लाडले की फाइनल कुश्ती देखते ग्रामीण।
  • रवि की हार पर 3 मिनट छाया सन्नाटा, फिर सिल्वर जीतने की खुशी जताई
  • नाहरी से तीन ओलिंपियन हैं, लेकिन पदक जीतने वाला पहला पहलवान बना रवि दहिया

नाहरी गांव की चौपाल रवि दहिया के प्रशंसकों से ठसाठस भरी थी। कुश्ती का फाइनल मुकाबला शुरू होने से 45 मिनट पहले ही चौपाल में ग्रामीणों की भीड़ लग गई थी। हर तरफ से जीतेगा भई जीतेगा- रवि दहिया जीतेगा के नारे और दादा शंभू के जयकारे लग रहे थे। हलका राई के विधायक मोहनलाल बड़ौली, भाजपा के प्रदेश संगठन मंत्री रविंद्र राजू व पूर्व विधायक जयतीर्थ दहिया के बेटे अर्जुन दहिया, कांग्रेस नेता जसपाल आंतिल ग्रामीणों के बीच फाइनल मैच देखने के लिए पहुंचे हुए थे।

फाइनल मैच शुरू हुआ तो ग्रामीणों को उम्मीद थी कि रवि गोल्ड मेडल जरूर जीतेगा, लेकिन जैसे- जैसे रवि मैच में पिछड़ता गया तो लोगों के चेहरों का रंग उड़ने लगे। जब रवि फाइनल मैच हार गया तो 3 मिनट तक चौपाल में सन्नाटा छा गया। फिर एकाएक गांव के युवाओं ने हाथों में रवि की फोटो लेकर भारत माता की जय के नारे लगाए।

वे अब इस हार से बड़ी रवि के रजत पदक जीतने की खुशी मना रहे थे। ग्रामीणों ने कहा कि उनका छौरा मर्दानी कुश्ती लड़ा है। हार- जीत खेल में चलती रहती है। ग्रामीणों ने कहा रवि दहिया जैसे हीरे को ब्रह्मचारी हंसराज ने तरासा था।

सरपंच सुनील दहिया, सरपंच लता देवी, महेश प्रधान, ब्लॉक समिति सदस्य सुकेश रानी, पदम दहिया, पूर्व सरपंच रविंद्र दहिया, पूर्व सरपंच शोभा दहिया ने कहा कि रवि के स्वागत में कोई कमी नहीं आएगी। जब उनका लाडला सिल्वर मेडल लेकर देश लौटेगा तो पूरा गांव अपने बेटे के लिए यादगार जश्न मनाएगा।

पिता बोले- जिसकी तपस्या ज्यादा थी, वह जीत गया

रवि दहिया के पिता राकेश दहिया ने कहा कि रवि की हार का मलाल है, लेकिन हार- जीत खेल का हिस्सा होती है। खेल में जो ज्यादा तपस्या करता है, उसे उसका फल मिलता है। रूस के पहलवान ने ज्यादा तपस्या की थी, इसलिए उसे गोल्ड मिल गया। वे जीतने वाले पहलवान व उसके माता- पिता को बधाई देते हैं। जब रवि से बात होगी तो यहीं कहेंगे कि हार से निराश न होकर अभी से अगले ओलिंपिक की तैयारी के लिए जी तोड़ मेहनत शुरू कर दे।

मां ने कहा- बेटे ने अपना सबकुछ झोंक दिया

बेटे की हार पर एक बार मां उर्मिला की आंखों में आंसू आ गए। थोड़ी नर्वस होकर बोली बेटे से गोल्ड की उम्मीद थी। रवि ने अपना सब कुछ झोंक दिया। बेटे ने देश के लिए रजत पदक जीता है, इसकी भी दिल में बहुत खुशी है। जब रवि गांव में आएगा तो सबसे पहले देशी घी का चूरमा खिलाउंगी। दादी सावित्री ने कहा कि वह पेड़े बनाएंगी। रवि को पेड़े बहुत पसंद है।

नाहरी गांव में 3 ओलिंपियन, 4 अर्जुन अवाॅर्डी व 21 अंतरराष्ट्रीय पहलवान

नाहरी के पूर्व सरपंच रविंद्र दहिया ने कहा कि उनके गांव में अब तक 3 ओलिंपियन खिलाड़ी, 4 अर्जुन अवाॅर्डी व 21 अंतरराष्ट्रीय पहलवान दिए हैं। अब गांव का नाम ओलिंपिक मेडल विजेता के रूप में जुड़ गया है। 1984 में उनके गांव से महाबीर पहलवान ओलिंपिक में गए थे। 2012 में अमित दहिया व अब 2021 में रवि दहिया ओलिंपिक में गए। रवि दहिया उनके गांव के पहले ओलिंपिक मेडल विजेता बन गए हैं।

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