भर्ती रद्द, युवा नाराज:भर्ती रद्द होने से टूट रहे हैं युवाओं के सपने, बोले- अब सेंटर पर जाने का नहीं करता है मन

सोनीपत12 दिन पहलेलेखक: अनिल बंसल
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कोचिंग सेंटर में छाई है विरानी। - Dainik Bhaskar
कोचिंग सेंटर में छाई है विरानी।

गांव रोहट की आरती आज निराश है, क्योंकि पढ़ लिखकर कर नौकरी हासिल करने का उनका सपना अब उन्हें टूटता दिख रहा है, क्योंकि एक के बाद एक सरकार भर्ती रद्द होती जा रही है और जो राशि और समय उन्होंने इस पर खर्च किया वह सब बर्बाद। आरती की तरह गांव सिलाना के शिव कुमार की हालात भी सुखद नहीं है। सरकारी नौकरी के लिए हर वो कोशिश की जिसकी जरूरत होती है, लेकिन परीक्षा से पहले ही भर्ती रद्द कर दी गई।

साल 2020 में प्रदेश सरकार ने हरियाणा पुलिस के कुल 7,298 पदों पर भर्ती निकाली थी. जिनमें 5,500 पद पुरुष कांस्टेबल, 1100 महिला कांस्टेबल और 698 पद दुर्गा शक्ति बल में महिला कांस्टेबल के लिए थे, लगभग 8 लाख 39 हजार युवाओं ने इस परीक्षा के लिए आवेदन किया था। एक पद पर लगभग 114 उम्मीदवार इस परीक्षा के लिए रेस में थे, लेकिन परीक्षा रद्द होने की वजह से इन सब के अरमानों पर पानी फिर गया। इससे पहले ग्राम सचिव में 697 पदों के लिए लगभग 8 लाख युवाओं ने आवेदन किया था. इसके बाद हरियाणा सरकार ने ग्राम सचिव की परीक्षा को रद्द कर दिया, वहीं नायब तहसीलदार पेपर लीक मामले में जांच ज़ारी रखी मगर पेपर लीक होने के बावज़ूद भी परीक्षा को रद्द नहीं किया गया।

हर दिन पांच हजार युवा करते हैं तैयारी
सोनीपत के विभिन्न काेचिंग सेंटरों पर ही सरकारी नौकरी के लिए हर दिन पांच हजार से ज्यादा युवा तैयारी करते हैं, लेकिन मौजूदा समय में ज्यादातर निराश है, क्योंकि विभिन्न कारणों के चलते पांच भर्ती रद्द हो चुकी है और जो युवा दो साल से इनकी तैयारी में जुटे थे उनके पास सिवाए निराशा कुछ नहीं है। हर किसी को हर साल करीब 10 से 15 हजार रुपए की चपत लग रही है, इसके अतिरिक्त समय खर्च हो रहा है वह अलग। आईसीएस काेचिंग के निदेशक परिमल कुमार का कहना है कि युवा बड़ी मेहनत से तैयारी करते हैं लेकिन लगातार भर्ती कैंसिल हेना उनके साथ विश्वासघात है।

हर दिन पांच हजार युवा करते हैं तैयारी
सोनीपत के विभिन्न काेचिंग सेंटरों पर ही सरकारी नौकरी के लिए हर दिन पांच हजार से ज्यादा युवा तैयारी करते हैं, लेकिन मौजूदा समय में ज्यादातर निराश है, क्योंकि विभिन्न कारणों के चलते पांच भर्ती रद्द हो चुकी है और जो युवा दो साल से इनकी तैयारी में जुटे थे उनके पास सिवाए निराशा कुछ नहीं है। हर किसी को हर साल करीब 10 से 15 हजार रुपए की चपत लग रही है, इसके अतिरिक्त समय खर्च हो रहा है वह अलग। आईसीएस काेचिंग के निदेशक परिमल कुमार का कहना है कि युवा बड़ी मेहनत से तैयारी करते हैं लेकिन लगातार भर्ती कैंसिल हेना उनके साथ विश्वासघात है।

युवाओं की आपबीती उन्हीं की जुबानी
मेरी बड़ी ख्वाहिश थी कि अपनी मेहनत की बदौलत परिवार को मजबूती प्रदान करू। इसी उम्मीद के साथ ग्राम सचिव के लिए आवेदन किया। ससुराल वालों के साथ की बदौलत पढ़ाई भी पूरी की, अब जब परीक्षा होनी थी, भर्ती ही रद्द कर दी। मेरी तो दो साल की मेहनत पर पानी फेर दिया। -ज्योति, निवासी, रोहट।

मैंने पटवारी के लिए साल 2019 से तैयारी कर रहा हूं, लेकिन जॉब लगने से पहले ही उसकी भर्ती रद्द कर दी जाती है, यह तो गलत है,ऐसे युवाओं का हौसला टूट रहा है और उनमें गुस्सा बढ़ रहा है, क्योंकि सालों की मेहनत तो यूं कैसे व्यर्थ किया जा रहा है। -शिव कुमार, निवासी सिलाना।

बार-बार भर्ती रद्द होने से अब यूं लग रहा हैं कि जैसे मैंने ग्राम सचिव और पटवारी बनने के लिए तीन साल बर्बाद कर दिए। हजारों रुपए और बेशकीमती समय सब चला गया, लेकिन हाथ में सिवाए आश्वासन के कुछ भी हासिल नहीं हुआ है। दुख की बात यह है कि कोई किसी की जवाबदेही भी नहीं है। हर साल सिर्फ सेंटर की फीस पर ही 36 हजार खर्च होते हैं। -अमन, निवासी मल्हा माजरा।

ऐसे तानों का भी कोई जवाब नहीं
विवाहिता महिला जो सरकारी नौकरी के लिए तैयारी के लिए दो साल से सेंटर पर जा रही है, और भर्ती रद्द होने के कारण उसे मिल नहीं रही, लेकिन खामियाजा समाज में इन तानों के साथ उठाना पड़ता है कि दो साल से कहां जा रही है जो नौकरी भी नहीं लगी। असल में उन्हें पता ही नहीं कि सरकार कितनी भर्ती रद्द कर चुकी है।

पिछले साल लैब सहायक के लिए किया था, हासिल कुछ हुआ नहीं। इसके बाद अन्य नौकरी में भी आवेदन किए, लेकिन उनकी भर्ती भी रद्द हो गई। अब तो तैयारी के लिए सेंटर जाने का भी मन नहीं होता। सोचता हूं कि किस लिए जाऊ जब हर बार ऐन मौके पर भर्ती रद्द हो जाती है। मुझे ही नहीं परिवार को भी निराशा होती है। -मोहित, निवासी, खेवड़ा।



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