जागरुकता:डाॅ. कालरा ने कहा टीबी मुक्त देश बनाने के लिए चल रहे अभियान में प्राइवेट डॉक्टरों का सहयोग जरूरी

यमुनानगरएक महीने पहले
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इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक (आईएपी) यमुनानगर की ओर से एनटीईपी कार्यशाला गोबिंदपुरी रोड स्थित एक होटल में लगी। इसमें बच्चों में टीबी के इलाज को लेकर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि किस तरह से नई नई तकनीक से बच्चों में टीबी को खत्म किया जा सकता है। टीबी के लक्षण, उपचार एवं नई तकनीक के बारे में बताया। बच्चे का विकास नहीं हो रहा, उसे बुखार, खांसी लंबे समय से हैं और वजन नहीं बढ़ रहा है तो उसे डॉक्टर को दिखाएं एवं जांच कराएं।

यदि किसी की टीबी की दवाई चल रही है, तो उसे पूरा करें। जिला टीबी अधिकारी डॉ. चारू कालरा ने बताया कि साल 2025 तक टीबी को खत्म करना है। सरकार इसे लेकर रणनीति बना चुकी है। स्वास्थ्य विभाग ने इस पर काम करना शुरू कर दिया है। इस तरह की कार्यशाला से हम यह जान सकते हैं कि किस तरह के मरीज पर हम कौन सी दवा और इलाज की तकनीक इस्तेमाल कर बीमारी को खत्म कर सकते हैं। सरकार ने टीबी मुक्त देश बनाने के लिए जो अभियान चलाया है, उसमें प्राइवेट डॉक्टरों का सहयोग बहुत जरूरी है। सिविल सर्जन डॉ. मंजीत सिंह और आईएमए अध्यक्ष डॉ. सुनीला सोनी ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाओं से बहुत कुछ सीखने को मिलता है।

आईएपी नॉर्थ जोन के उपाध्यक्ष डॉ. हरिंदर सिंह और लुधियाना से ईबी सदस्य डॉ. मनप्रीत सिंह ने आईएपी के कार्य की जानकारी दी। मौके पर आईएमए के पू्र्व राष्ट्रीय प्रधान डॉ. राजन शर्मा, डॉ. वैभव अग्रवाल, डॉ. अरुण गुप्ता, डॉ. लोकेश गर्ग, डॉ. विक्रम सिंघल, डॉ. सचिन गर्ग, डॉ. डीके सोनी, डॉ. एवीएस रवि, डॉ. विजय परमार, डॉ. पृथ्वी सिंह भी माैजूद रहे।

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