मंडी आढ़ती आज से हड़ताल पर:बोले-सरकार ने कमीशन घटाई, कई मांगों पर फैसला नहीं लिया

यमुनानगर6 दिन पहले
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अनाज मंडी आढ़ती आज से अनिश्चितकाल के लिए हड़ताल पर जा रहे हैं। पिछले सीजन की तरह इस बार भी सरकार और आढ़तियों के बीच टकराव होता दिख रहा है। आढ़तियों ने ऐलान कर दिया है कि हड़ताल के दौरान मंडी में आने वाली धान नहीं खरीदेंगे। किसानों से अपील की है कि वे धान लेकर मंडी में न आएं। हालांकि अभी सरकारी खरीद शुरू नहीं हुई, लेकिन किसान धान लेकर आ रहे हैं। आढ़ती अपने स्तर पर उसे बिकवा रहे हैं। आढ़तियों ने रणनीति बनाई है कि सोमवार को सभी मंडी में सांकेतिक प्रदर्शन किया जाएगा।

वहीं, मंगलवार को जिला की सभी मंडियों के आढ़ती शिक्षा मंत्री के आवास पर जाएंगे। वहां पर अगर उनसे मंत्री की ओर से बातचीत का न्योता मिलता है तो अपनी बात रखेंगे। अगर बात नहीं की गई तो घेराव करेंगे। इसके बाद आढ़ती 21 सितंबर को करनाल अनाज मंडी में एकत्रित होंगे। वहां से सीएम आवास पर जाएंगे। अगर वहां भी उनसे सही बात नहीं की गई तो घेराव किया जाएगा।

इन मांगों को लेकर होगी हड़ताल
अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के जिला प्रधान एवं राज्य वरिष्ठ उपप्रधान शिव कुमार संधाला और जगाधरी अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन प्रधान एवं जिला सचिव मनीष चौधरी ने बताया कि पहले आढ़तियों का फसल बेचने पर प्रति क्विंटल ढाई प्रतिशत कमीशन होता था, लेकिन सरकार ने इसे 46 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया। इससे आढ़तियों को नुकसान है। वहीं, जे फार्म पर लेबर चार्ज नहीं दिया जा रहा। सरकार ने पोर्टल पर सीमांतर किसान के लिए कोई व्यवस्था नहीं की।

उनका कहना है कि एक तरफ तो सरकार कहती है कि किसान देश में कहीं पर भी अपनी फसल बेच सकता है, लेकिन हरियाणा की मंडियों में दूसरे प्रदेश में खेती करने वाले किसानों की फसल नहीं खरीदी जा रही। उनका कहना है कि हरियाणा के बहुत से किसान यूपी में खेती करते हैं। उनकी फसल तक नहीं खरीदी जा रही। वहीं, उनका कहना है कि सरकार ने किसानों को सीधी पेमेंट देने की बात कही, लेकिन बहुत से किसान चाहते हैं कि आढ़ती के माध्यम से पेमेंट लें। इसलिए आढ़ती चाहते हैं कि किसान जैसे चाहे वैसे उसे फसल की पेमेंट दी जाए।

सरकार अपनी बात से मुकर रही : शिवकुमार
शिव कुमार ने बताया कि सरकार ने घोषणा की थी कि पेमेंट जारी होने में अगर देरी होती है तो ब्याज समेत पेमेंट आढ़ती को दी जाएगी, लेकिन सरकार ने ब्याज नहीं दिया। आढ़तियों का करीब 70 करोड़ रुपए ब्याज तीन सीजन का सरकार की तरफ बनता है। सरकार उसे नहीं दे रही। आढ़तियों ने अपने पास से पेमेंट दी और सरकार से उन्हें छह-छह माह बाद पेमेंट मिली। उनकी मांग है कि सरकार ब्याज का पैसा आढ़तियों को दे। फसल खरीद के सीजन से पहले आढ़तियों की हड़ताल पहली बार नहीं हो रही। हर बार किसी तरह किसी तरह का विरोध होता है। सरकार हर बार आश्वासन देकर मना लेती है, लेकिन मांगें सिरे नहीं चढ़ती।

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