जीएसटी फ्री सब्जियों का शिक्षक कहां से लाएं बिल:परेशानी , मिड-डे मील के राशन को लेकर जीएसटी नंबर वाले दुकानदार चयनित करने के हैं निर्देश

यमुनानगरएक महीने पहले
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राजकीय स्कूलों में दिए जाने वाले मिड-डे मील के राशन की सामग्री नए नियमों में उलझ कर रह गई। स्कूलों में राशन पहुंचा दिया गया है। सभी स्कूलों में रसोई शुरू नहीं हो पाई। क्याेंकि शिक्षकाें की दिक्कत यह है कि गांवों के दुकानदार, सब्जियाें के जीएसटी बिल कहां से लाकर जमा कराएं। शिक्षकों ने डीईईओ और बीईओ से मार्गदर्शन मांगा है। अध्यापकों का कहना है कि इसके बाद ही बिल बनाए जा सकेंगे। निदेशालय की ओर से मिड-डे मील काे लेकर फंड सीधे विक्रेताओं के खाते में देने के आदेश जारी किए गए।

इसके लिए जीएसटी नंबर भी मांगा है। अध्यापकों की ड्यूटी लगाई गई कि वे बाजार में जाकर दुकानदारों के जीएसटी नंबर एकत्रित कर पोर्टल पर अपलाेड करें। शिक्षकाें का कहना है कि इससे ऐसा लग रहा है कि नए नियम ग्रामीण एरिया के स्कूलों में मिड-डे मील नहीं पकने देंगे।

गांवों में नहीं मिलते बिल | अध्यापक विशु ने बताया कि ग्रामीण एरिया में छोटी दुकानें होती है। इनके पास तो पक्के बिल तक नहीं होते। ऐसी स्थिति में वे जीएसटी नंबर कैसे लाकर दे सकते हैं। यहां तो पर्ची पर ही हिसाब लिखकर दिया जाता है। यहां से जीएसटी की शर्त हटाई जाए। इसके साथ ही सब्जी विक्रेता रेहड़ी पर सब्जी लेकर गलियों में बेच रहे हैं। इनके पास से ही मिड-डे मील के लिए कई बार सब्जी लेनी पड़ जाती है। रेहड़ी वालाें के पास जीएसटी नंबर कहां से आएंगे। इन्हें तो मौके पर ही पेमेंट की जाती है। इसके बिल कैसे बनवाए जाएं। इस दुविधा का हल निदेशालय बताए।

गैस सिलेंडर जेब से लेते हैं शिक्षक
अध्यापक कुलवंत का कहना है कि स्कूलों में गैस सिलेंडर तत्काल में भरवाने पड़ते हैं। एजेंसी के खाते में पैसे दिए जाएंगे तो सिलेंडर भरने में दिक्कत आएगी। इसी तरह गैस खत्म हाेने पर लकड़ियां खरीदी जा सकती हैं। इसका प्रावधान है। इस प्रकार की स्थिति होने पर लकड़ियों का बिल कैसे बनवाया जाएगा। अध्यापक रमेश कुमार का कहना है अधिकतर गांवों के एरिया में एक ही चक्की लगी होती है। इनके पास गेहूं से दलिया बनवाया जाता है। इनके पास भी जीएसटी के बिल नहीं होते हैं।

इस समस्या का समाधान किया जाए। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला प्रधान कुलवंत सिंह का कहना है कि यह काॅमन समस्या है। इन सभी मांगों के समाधान को लेकर जल्द डीईईओ से मुलाकात की जाएगी। वहीं, डिप्टी डीईओ पिरथी सैनी का कहना है कि यह मामला निदेशालय स्तर का है। इस बारे बता दिया गया है। समाधान को लेकर वे अपने स्तर पर कुछ कह नहीं सकते।

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