चार पुलिस वाले सस्पेंड:अफीम के केस में फंसाने का डर दिखा 4 पुलिस कर्मियों ने दो लोगों से लिए 1.10 लाख, केस

साढौरा8 दिन पहले
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सरकार और जनता की नजर में नशा तस्करों के खिलाफ चल रहे पुलिस के अभियान में कुछ पुलिस वाले अपना खेल खेल रहे हैं। ऐसा ही मामला साढौरा थाने में सामने आया है। यहां 30 अप्रैल को एक व्यक्ति को 98.33 ग्राम अफीम के साथ पकड़ लिया जाता है। इसके बाद चार पुलिस वाले एक दलाल के माध्यम से रिश्वत लेने का खेल शुरू करते हैं। पकड़े गए शामपुर निवासी गौरव उर्फ गट्टू के जानकारों के यहां पुलिस ने रेड की और केस में फंसाने का डर दिखाकर पैसे ऐंठने शुरू कर दिए। एक से 30 हजार तो दूसरे से 80 हजार रुपए रिश्वत ले ली।

वहीं तीन ओर से करीब 7.25 लाख रुपए मांगे। ये 7.25 लाख ले लिए गए या फिर सिर्फ मांगे, यह पूरी तरह से साफ नहीं है। मामला अम्बाला रेंज आईजी और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो चीफ श्रीकांत जाधव को दी। जिस पर रादौर डीएसपी ने जांच की। जांच में काफी हद तक आरोप सही मिले। जिसके बाद एसपी सुरेंद्र पाल सिंह ने केस दर्ज करने के आदेश दिए। एसपी सुरेंद्र पाल सिंह ने बताया कि साढौरा थाने में तैनात एएसआई दौलत राम, एएसआई राजेश कुमार, एचसी लाभ सिंह, जसजीत सिंह और गांव शामपुर निवासी कृष्ण कुमार पर धारा-384, 342, 120बी और सात करप्शन एक्ट में केस दर्ज किया गया है।

वहीं, चारों को सस्पेंड कर दिया गया है। एसपी का कहना है कि करप्शन करने वालों पर ऐसे ही एक्शन होगा। पुलिस का काम आम जनता को डराकर उससे पैसे लेना नहीं है, अपराधियों और गलत काम करने वालों को पकड़ कर जेल में डालने का है।

अफीम समेत पकड़ा गया था गट्‌टू

डीएसपी की रिपोर्ट के अनुसार एएसआई राजेश कुमार ने शामपुर निवासी गौरव उर्फ गट्टू को 30 अप्रैल 2022 को साढौरा सब्जी मंडी के पास पकड़ कर उसके पास से 98.33 ग्राम अफीम बरामद की थी। इस केस की जांच एएसआई दौलत राम ने की। इसी दौरान पुलिस अधिकारियों को पता चला कि साढौरा थाने के कुछ कर्मचारियों ने अफीम पकड़ने के केस में लाेगाें काे उठाकर उन्हें केस में फंसाने का भय दिखाया और उन्हें छोड़ने के नाम पर उनसे पैसे लिए। जांच में पता चला कि गांव कपूरी कलां निवासी रमन कुमार इसी केस में पुलिस उठाकर थाने में लेकर आई। यहां उसे छोड़ने के नाम पर शामपुर निवासी कृष्ण के माध्यम से पैसे लिए। रमन के बयान लिए तो उसने बताया कि वह साढौरा में ऑटो रिपेयर की दुकान चलाता है। 30 अप्रैल को वह दुकान पर था। शाम के समय पुलिस कर्मी जसजीत सिंह, दौलतराम, लाभ सिंह पकड़े गए गौरव को लेकर उसकी दुकान पर आए। उससे पूछा कि वह गौरव को कब से जानता है। उसने कहा कि वह उसे दो तीन साल से जानता है। वह कालाअम्ब में रुचिका पेपर मिल में काम करता था और वहां पर जाते समय उसकी दुकान पर अपनी बाइक खड़ी कर जाता था। इस तरह से वह उसे जानता है। इतनी बात सुनने के बाद पुलिस वाले उसे भी थाने ले गए। पीछे से आसपास के दुकानदारों ने उसके भाई रज्जी को बताया कि उसके भाई रमन को पुलिस ले गई। उसे थाने में एक कमरे में बैठाया गया। वहां पर पुलिस वाला राजेश, जसजीत, दौलतराम और लाभ सिंह भी बैठे थे। वहां कृष्ण ने कहा कि 40 हजार पुलिस को देने होंगे तो वे छोड़ देंगे। कृष्ण के माध्यम से उन्होंने 30 हजार पुलिस वालों को दिए तो उसे छोड़ा गया। वहीं उसे पता चला है कि राजन से भी पुलिस ने 80 हजार रुपए लिए हैं। वहीं सैंटी को छोड़ने के लिए दो लाख, बबल को छोड़ने के लिए 25 हजार, विक्रम भोगपुर को छोड़ने के लिए पांच लाख देने की बात चली थी।

जांच में आरोप सच निकलेः डीएसपी डीएसपी ने अपनी जांच में बताया कि पुलिस कर्मी दौलतराम, लाभ सिंह, जसजीत सिंह, राजेश ने रमन को केस में फंसाने का डर दिखाकर शामपुर निवासी कृष्ण के माध्यम से 30 हजार रुपए लिए। इस तरह से अन्य लोगों को भी केस में फंसाने का भय दिखाकर पैसे लेकर छोड़ने का पता चला है। इस शिकायत पर साढौरा थाने में केस दर्ज हुआ है। बता दें कि पुलिस वालों पर पैसे मांगने और लेने के आरोप लगते रहते हैं, लेकिन एक साथ चार पुलिस वालों पर केस दर्ज लंबे समय के बाद हुआ है। लोगों का कहना है कि पुलिस थानों में करप्शन रोकने के लिए केस दर्ज कराने जैसा कदम उठाने वाले एसपी सुरेंद्र पाल सिंह जैसे आॅफिसर की जिले को जरूरत है।

संदीप के बयान से ये खुलासा पुलिस ने गांव मोहड़ी निवासी संदीप के बयान लिए तो उसने बताया कि वह भी साढौरा में बाइक रिपेयर का काम करता है। 30 अप्रैल को रमन के भाई रज्जी ने उस पर एक युवक को भेजा और कहा कि रमन को पुलिस थाने लेकर गई है और वह उसे छुड़ाने के लिए थाने चलना है। उसने अपने जानकार कृष्ण को फोन किया और कहा कि रमन को छुड़ाने के लिए थाने जाना है। कृष्ण उसे थाने लेकर गया। वहां पर रज्जी पहले से था। वह और कृष्ण थाने के अंदर गए। वहां एक कमरे में गट्टू बैठा था। वहां पुलिस कर्मचारी लाभ सिंह और एक अन्य पुलिस वाला बैठा था। उन्होंने रमन को पूछा कि उसकी दुकान पर गट्टू आता है और सामान बेचता है, लेकिन रमन ने कहा कि वह उसकी दुकान पर शाम को आता जरूर है और वहां शराब पीता है। सामान बेचने का उसे नहीं पता। पुलिस वाले ने धमकाते हुए कहा कि वे भी नशा बेचते हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि रमन ऐसा नहीं है। कृष्ण कमरे से बाहर आया और फिर अंदर आकर उसे बोला कि छुड़ाने के 40 हजार लगेंगे। तब उसने कहा कि वह गरीब है और 30 हजार दे देगा। संदीप ने आगे अपने बयान में बताया कि उसने बाइक बेची थी। उसके 30 हजार आए थे। उसे कृष्ण को पुलिस वालों को देने के लिए दे दिए। इसके बाद रमन को छोड़ दिया। संदीप ने पुलिस को बयान में बताया कि उन्हें पता चला कि पुलिस राजन के घर पर रेड कर रही थी। वह घर से फरार रहा। उसका केस से नाम निकालने के लिए 80 हजार रुपए लिए गए। वहीं अन्य आरोपियों को केस में छोड़ने के नाम पर पैसे लेने की बात चली थी।

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