हिमाचल में खोजे जाएंगे गुमनाम फ्रीडम फाइटर:संस्कृति मंत्रालय ने सौंपी 3 इतिहासकारों को जिम्मेदारी, 3 महीने में देंगे रिपोर्ट

हमीरपुर6 महीने पहले

देशभर में स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम नायकों के रिकॉर्ड को सूचीबद्ध करने का दायित्व इतिहासकारों के जिम्मे आ गया है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने देश के कुछ इतिहासकारों को यह जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें तीन महीनों में यह काम पूरा करके सरकार को सौंपना होगा। जिला हमीरपुर से तालुक रखने बाले डॉ राकेश कुमार शर्मा सहायक आचार्य इतिहास विभाग नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्मारक राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर इस प्रोजेक्ट में कार्य करेंगे।

इस संदर्भ में पत्र भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के विशेष कार्य अधिकारी डॉ संजय गर्ग की तरफ से जारी किया गया है। हिमाचल प्रदेश के गुमनाम नायकों की जानकारी को एकत्रित करने के लिए संस्कृति मंत्रालय ने डॉ राघवेंद्र यादव इतिहास विभाग केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला, डॉ राकेश कुमार शर्मा सहायक आचार्य नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्मारक राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर व डॉ राजकुमार विभागाध्यक्ष इतिहास विभाग हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय क्षेत्रीय केंद्र धर्मशाला को यह कार्य सौंपा है।

रिकॉर्ड इकट्‌ठा करके संस्कृति मंत्रालय को देंगे

डॉ राघवेंद्र यादव के साथ रिसर्च असिस्टेंट के रूप में डॉ राकेश कुमार व डॉ राजकुमार इस कार्य को अंजाम देंगे। इन तीनों इतिहासकारों की टीम तीन महीने के अंदर हिमाचल प्रदेश के गुमनाम नायकों का रिकॉर्ड संकलित करके संस्कृति मंत्रालय को देगी। डॉ राघवेंद्र यादव ने बताया कि आजादी के अमृत महोत्सव के तहत देशभर के स्वतंत्रता संग्राम में शामिल रहे गुमनाम नायकों का रिकॉर्ड एकत्रित कर एक जगह संस्कृति मंत्रालय के माध्यम से प्रकाशित करने का निर्णय लिया गया है। जिसमें इस पहाड़ी राज्य के असंख्य देशभक्तों ने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर किया है।

गुमनाम नायकों की सूची तैयार करने की योजना बनाई जा रही

उन्होंने बताया कि प्रदेश में ऐसे स्वतंत्रता के नायक हैं जिनके बारे में राष्ट्रीय स्तर पर बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। गुमनाम नायकों के कार्यों को प्रस्तुत करने का प्रयास करेंगे। डॉ राजकुमार ने बताया कि सभी जिलों के गुमनाम नायकों की सूची तैयार करने की योजना बनाई जा रही है। गौरतलब है कि तीनों युवा इतिहासकार हिमाचल प्रदेश के इतिहास में अच्छी जानकारी रखते हैं। ये तीनों ही इतिहास शोध संस्थान नेरी से जुड़े हुए हैं। उन्होंने इस क्षेत्र में इससे पूर्व भी कार्य किया है।