टेलीकॉम घोटाला, जिसने छीनी सुखराम की कुर्सी:निजी फर्म को ठेका दिलाया, 2 संदूकों और 22 सूटकेसों से 5 करोड़ रुपए मिलने से हिल गई राव सरकार

हमीरपुर5 महीने पहले
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80 के दशक में बोफोर्स घोटाले की वजह सत्ता खोने वाली कांग्रेस 90 के दशक में संचार घोटाले की वजह से फिर विवादों में आ गई। नरसिम्हा राव सरकार में सुखराम के संचार मंत्री रहते हुए ये घोटाला हुआ। इस घोटाले ने न सिर्फ कांग्रेस की सरकार को हिला दिया बल्कि सुखराम को मंत्री और कांग्रेस पार्टी का साथ दोनों ही खोने पड़े। इस 5 करोड़ 91 लाख के घोटाले की वजह से विपक्षी भाजपा ने तब 1996 में 10 दिनों तक संसद नहीं चलने दी थी। इस घोटाले में सुखराम के साथ टेलिकॉम विभाग की अफसर रुनू घोष को भी दोषी पाया। पंडित सुखराम को 3 साल की सजा भी हुई। ये उस समय तक का बोफोर्स के बाद दूसरा सबसे बड़ा घोटाला माना गया।

8 अगस्त 1996 को पहली दफा सुखराम का नाम टेलीकॉम घोटाले में आया। जांच में पता चला कि केंद्रीय मंत्री पंडित सुखराम ने पद का इस्तेमाल करते हुए हैदराबाद की एक निजी फर्म को ठेका दिया। बदले में तीन लाख रुपये की रिश्वत ली। सीबीआई ने सुखराम, टेलीकॉम विभाग की तत्कालीन अधिकारी रुनु घोष और हैदराबाद स्थित एडवांस रेडियो फॉर्म कंपनी के मालिक पर केस दर्ज किया।

16 अगस्त को सीबीआई की एक टीम उनके दिल्ली के सफदरजंग स्थित आवास पर छापे मारे। सुखराम के घर से 2.45 करोड़ रुपए बरामद हुए। सीबीआई ने मंडी स्थित बंगले पर भी छापेमारी के बाद 1.16 करोड़ रुपए बरामद किए। पैसे दो संदूकों और 22 सूटकेस में रखे थे। अधिकांश सूटकेस पूजा वाले घर में थे।

सेब के बागीचों में भी पड़े छापे
पंडित सुखराम के दिल्ली और मंडी के आवास पर छापों के बाद उनके सेब के बगीचों पर भी छापे मारे गए। उस समय कुछ पैसा उन बागीचों में भी मिला जिसे बाकी जगह मिली रकम के साथ ही अटैच किया गया। कहा तो ये भी जाता है कि सुखराम के करीबी लोगों तक के पास उस समय पैसा पड़ा था लेकिन वहां तक जांच नहीं पहुंच पाई।

सामने आया एक और केस
फिर 27 अगस्त को आय से अधिक संपत्ति मामले में नया केस दर्ज हुआ। इस केस में पंडित सुखराम को 16 साल बाद 19 नवंबर 2011 को सीबीआई अदालत ने पांच साल की सजा सुनाई। यूपीए सरकार के समय बाकी घोटालों के साथ पंडित सुखराम को सजा दिए जाने का केस भी कांग्रेस के लिए मुसीबत लेकर आया। ये वही दौर था जब अन्ना हजारे जंतर मंजर पर भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन कर रहे थे और पूरे देश की कांग्रेस के खिलाफ माहौल तैयार हो रहा था।

इस तरह किया पद का दुरुपयोग
पंडित सुखराम के टेलीकॉम मिनिस्टर रहते हुए तार बेचने के लिए हरियाणा की एक अन्य निजी कंपनी टेलीकॉम लिमिटेड (एचटीएल) को भी काम दिया गया। इस कंपनी को पॉलीथीन इन्सुलेटेड जेली फिल्ड (पीआईजेएफ) के 3.5 लाख कंडक्टर किमी (सीकेएम) केबल बिछाने थे। इस काम की लागत 30 करोड़ रुपये थी। इस केस में भी कोर्ट ने पाया कि सुखराम ने दोनों मामलों में अपने पद का दुरुपयोग किया।

सुखराम बोले- पैसा कांग्रेस पार्टी का
सुनवाई के दौरान सुखराम ने अदालत में दलील दी कि उनके आवास से बरामद रुपए कांग्रेस पार्टी के हैं। उन्होंने दावा किया कि ये पैसा जम्मू-कश्मीर में होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी फंड के रूप में इस्तेमाल करने के लिए भेजा गया। हालांकि तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सीताराम केसरी ने सीबीआइ की पूछताछ में बरामद राशि के पार्टी फंड होने से इनकार कर दिया।

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