झबोला में STP मामले ने फिर पकड़ा तूल:झबोला में STP मामले ने फिर पकड़ा तूल, ग्रामीण बोले- केस हाईकोर्ट में विचाराधीन; लोगों को डरा-धमका रही पुलिस

बिलासपुर2 महीने पहले
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी बात रखे झबोला के ग्रामीण।

झबोला पंचायत की सीमा पर प्रस्तावित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का मामला तूल पकड़ गया है। 7-8 सालों से प्लांट का विरोध कर रहे झबोला के लोगों ने पिछले साल मई में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। ग्रामीणों का आरोप है कि मामला कोर्ट में होने के बावजूद प्लांट का निर्माण जबरन करने के प्रयास किया जा रहा है। राजनीतिक दबाव से पुलिस उन्हें डरा-धमका रही है। इससे उन्हें जान का खतरा है।

शनिवार को झबोला के लोगों ने गांव की ऊषा गर्ग के नेतृत्व में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी बात रखी। ग्रामीणों ने कहा कि नगर पंचायत तलाई STP बनाने जा रही है। इसके लिए चयनित जगह के आसपास मकान और लोगों की मलकियत भूमि है। पानी की स्कीम और दशकों पुराना घराट है। स्कीम से हजारों लोगों को पानी की आपूर्ति होती है। प्लांट वहां बनने पर कई समस्याएं आएंगी। पेयजल स्कीम के साथ पर्यावरण भी दूषित होगा।

जनप्रतिनिधि पहले ही जता चुके हैं आपत्ति

ऊषा गर्ग ने कहा कि पेयजल आपूर्ति प्रभावित होने जैसे कारणों से ग्रामीण इस स्थान पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का विरोध कर रहे हैं। जिप सदस्य प्रोमिला वासु, बीडीसी मेंबर मृदुला, झबोला पंचायत प्रधान मीरा और वार्ड मेंबर प्यार सिंह व अनिल भी इस पर आपत्ति जता चुके हैं। अन्य जगहों पर सरकारी भूमि उपलब्ध होने के बावजूद प्लांट को जबरन वहीं बनाने के प्रयास हो रहे हैं। आए दिन दर्जनों पुलिस कर्मियों को भेज दिया जाता है। वे रौब दिखाकर और धक्कामुक्की कर लोगों में दहशत पैदा करते हैं।

विधायक ने भी अनुरोध के बावजूद नहीं किया सहयोग

उषा गर्ग ने कहा कि स्थानीय विधायक से अनुरोध करने के बावजूद उन्होंने कोई सहयोग नहीं किया। प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि एसटीपी के लिए यह स्थान ठीक नहीं है। इससे जिला और पुलिस प्रशासन के साथ तलाई नगर पंचायत और जल शक्ति विभाग पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि गांव के किसी भी व्यक्ति के साथ कोई अनहोनी या हादसा होता है तो इसके लिए यही जिम्मेदार होंगे।

उधर, जल शक्ति विभाग के एक्सईएन रतनदेव का कहना है कि हाईकोर्ट ने स्टे नहीं दिया है। लोगों ने कोर्ट में अंडरटेकिंग दी है कि वे काम नहीं रोकेंगे। इसके बावजूद वे गैरकानूनी तरीके से काम बाधित कर रहे हैं।