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डोगरा रेजिमेंट में भर्ती की राह देख रहे युवा:2 साल में कई बार परीक्षा हुई स्थगित; जैक राइफल की प्रक्रिया भी लटकी

हमीरपुर5 महीने पहले
रिटायर्ड कैप्टन जगदीश वर्मा।

हिमाचल प्रदेश के युवा भारतीय सेना की डोगरा रेजिमेंट में जाकर देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं। पिछले 2 सालों से यहां के हजारों युवा भारतीय सेना की लिखित परीक्षा की तैयारी तो कर रहे हैं, लेकिन परीक्षा आयोजित ही नहीं कराई जा रही है। अब अग्निपथ योजना के आने के बाद युवाओं का हौसला टूटने लगा है। भारतीय सेना के तीनों अंगों सहित पैरामिलिट्री फोर्स में लगभग 2 लाख के करीब प्रदेश के सैनिक भर्ती है। यहां 1 लाख 60 हजार के करीब पूर्व सैनिक है। भर्ती न होने की वजह से युवाओं को उम्र निकलने का भय सता रहा है।

क्षेत्र के जबलपुर में जैक राइफल की ओर से युवाओं के लिए भर्ती प्रक्रिया एक साल में भी पूरी नहीं हो पाई है। इसके अलावा युवाओं ने भर्ती कार्यालय हमीरपुर द्वारा आयोजित स्क्रीनिंग और ग्राउंड टेस्ट लगभग डेढ़ वर्ष पहले ही दे दिए थे। उनकी लिखित परीक्षा कोविड-19 के चलते स्थगित कर दी गई थी।

जैक राइफल की ओर से जबलपुर में पिछले वर्ष 1 जनवरी को प्रक्रिया शुरू हुई थी। फिर 14 जनवरी को मेडिकल प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद लिखित परीक्षा के लिए पहले 28 फरवरी, 25 अप्रैल, 29 अगस्त और फिर 28 नवंबर को परीक्षा की तिथि निर्धारित की गई थी। कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए चारों बार परीक्षा नहीं हो पाई।

रिटायर्ड कैप्टन जगदीश वर्मा ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा लाई गई अग्निपथ योजना कि क्या रिपोर्ट है, यह तो सार्वजनिक होने के बाद ही पता चल पाएगा। भारतीय सेनाओं में रेगुलर भर्ती ही होनी चाहिए। प्रदेश के कई युवा स्क्रीनिंग टेस्ट और ग्राउंड टेस्ट दे चुके हैं, लेकिन फिर भी भर्ती नहीं की गई। 4 साल के बाद युवा फिर से बेरोजगार हो जाएंगे।

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