1700 ई. में बने गोंदला किला का वजूद खतरे में:जिला परिषद प्रतिनिधियों ने की संरक्षण की मांग, बोले- पर्यटन की भूमिका से अहम

कुल्लू16 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

हिमाचल के लाहौल स्पीति में एक ऐसा किला है जो 1700 ई. में बनाया गया था। वर्तमान में इस किले की हालत दयनीय बनी हुई है। किले का निर्माण तत्कालीन कुल्लू के राजा मान सिंह ने 1700 ई. में किया था और तब से लेकर यह गोंदला नाम से जाना जाता है। गोंदला किला चंद्रा नदी के दाहिने किनारे पर स्थित है। किले में 8 मंजिल है। ऐतिहासिक पहलु के अनुसार कुल्लू के राजा मान सिंह वहां त्रिलोकीनाथ मंदिर को जाते हुए 1720 ई. में ठहरे थे।

कुछ सालों पहले तक इस किले के भीतर पुरानी चीजें मौजूद थी, जिनमें से हालांकि कुछ सामान अभी भी किले के भीतर हैं और कुछ सामान को यहां गांव के मुखिया के घर में संरक्षित रखा गया है। बताया जाता है कि इस किले के भीतर शराब राल्दी, अर्थात बुद्धिमता की तलवार जो ठाकुर को दलाई लामा द्वारा अतीत काल में दी गई थी, जिसे यहां यहां सुरक्षित रखा गया है।

बताया जाता है कि यह तलवार स्पेन की टोलडो तकनीक द्वारा बनाई गई दिखाई देती है। साथ में यहां आदम कद से बड़ी एक चट्टान है, जिसमें कुछ देवताओं की आकृतियां कुरेदी गई हैं। स्थानीय लोग इसका संबंध महाभारत काल में पांडवों से जोड़ते हैं। लेकिन हैरत है कि ये आकृतियां बौद्ध देवताओं से मेल खाती हैं। ग्रामीणों के अनुसार जुलाई के महीने में यहां एक मेला लगता है जिसमें लामा नृत्य करते हैं।

जिला परिषद प्रतिनिधियों ने संरक्षण की मांग की

जिला परिषद अध्यक्ष अनुराधा राणा के अनुसार जिला परिषद की ओर से एक मांग पत्र तकनीकी शिक्षा एवं जनजातीय विकास मंत्री को सौंप कर मांग की है कि इस ऐतिहासिक गोंदला किला का संरक्षण किया जाए। क्योंकि यह तीन सौ साल से अधिक पुराना है और अदभुत भवन निर्माण शैली से तैयार किया गया है।

जनजातीय जिला लाहौल स्पीति में इस भवन निर्माण शैली के किले बहुत ही कम संख्या में रह गए हैं। जिसके चलते इसे संरक्षित करना जरूरी है और ये किले आने वाले समय में यहां पर्यटन को बढ़ावा देने का अच्छा जरिया हो सकता है। पर्यटकों के लिए इतना पुराना भवन आकर्षण का केंद्र बन सकता है।