• Hindi News
  • Local
  • Himachal
  • Mandi
  • Research On Accurate Information About Stroke In Himachal Mandi, Diagnostic Technology Will Now Benefit In Less Time And Less Cost, Instruments Made By IIT

स्ट्रोक की सटीक जानकारी को लेकर शोध:कम समय व कम खर्चे में अब डायग्नोस्टिक तकनीक से मिलेगा लाभ,IIT द्वारा बनाए गए यंत्र

मंडी2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी के शोधकर्ताओं ने स्ट्रोक का जल्द से जल्द पता लगाने का एक आसान, पोर्टेबल और सस्ता डिवाइस तैयार कर रहे तैयार। - Dainik Bhaskar
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी के शोधकर्ताओं ने स्ट्रोक का जल्द से जल्द पता लगाने का एक आसान, पोर्टेबल और सस्ता डिवाइस तैयार कर रहे तैयार।

हिमाचल में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी के शोधकर्ताओं ने स्ट्रोक का जल्द से जल्द पता लगाने का एक आसान, पोर्टेबल और सस्ता डिवाइस तैयार करने का प्रस्ताव दिया है और इसका विकास किया है। स्ट्रोक की वजह मस्तिष्क में सही से खून नहीं पहुंचना है जिसका पता लगाने के इस डिवाइस के विकास में PGMIER चंडीगढ़ का सहयोग लिया गया है

शोध के बारे में IIT मंडी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शुभजीत रॉय चौधरी ने बताया, हमारा प्रयास जहां मरीज है वहीं इस्केमिक स्ट्रोक की सटीक जांच के लिए सस्ता डिवाइस तैयार करना है। खास कर गांव-देहात में मरीजों को इसका बहुत लाभ होगा। साधनहीन और दूरदराज के पिछड़े क्षेत्रों में समय से निदान मिलेगा। हमारी टीम ने एक छोटा वियरेबल डिवाइस डिजाइन और उसका विकास किया है जो नियर इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी डायोड (NIRSLD) के उपयोग से इस्केमिक स्ट्रोक का पता लगाने के लिए 650 NM से 950 NM रेंज में प्रकाश उत्सर्जन करता है। यह प्रकाश खून के रंगीन घटकों जैसे हीमोग्लोबिन से प्रतिक्रिया करता है और खून के विशेष लक्षणों को सामने रखता है, शोधकर्ताओं ने अपने डिटेक्टर प्रोटोटाइप के वैलिडेशन के लिए फोरआर्म का एक्सपेरिमेंटल ऑक्ल्जून किया और फिर फ्रंटल लोब पर इस्केमिक स्ट्रोक उत्पन्न किया और यह पाया कि डिवाइस में निदान की बेजोड़ क्षमता है।

IIT मंडी के शोध करते हुए शोधकर्ता।
IIT मंडी के शोध करते हुए शोधकर्ता।

शोध के बारे में IIT मंडी के शोध विद्वान दालचंद अहिरवार ने कहा, 'हमें प्राप्त जानकारी के अनुसार संयुक्त मैट्रिक्स से खून में हीमोग्लोबिन की अस्थायी गतिविधि दिखती है, जिसकी मदद से उस हिस्से के टिश्यू में खून के नहीं पहुंचने या रुक-रुक कर पहुंचने का आसानी से पता लगाया जा सकता है। हम ने इस्केमिक स्थितियों का अध्ययन करने के लिए ऑक्सीजन सैचुरेशन, संबंधित हिस्से में ऑक्सीजन की खपत और खून की मात्रा सूचकांक जैसे बायोमार्करों का उपयोग किया है जो अन्य तकनीकों की तुलना में इस्केमिक स्थितियों का अधिक सटीक अनुमान दे सकते हैं।"