फूल मुरझाए, इनका कारोबार भी / कोरोना संकट में ऊना जिला के फूल उत्पादकों का कारोबार चौपट

Business of flower growers of Una district in Corona crisis collapsed
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Business of flower growers of Una district in Corona crisis collapsed

  • दो माह से ठप है फूलों का कारोबार, ढाई करोड़ का नुकसान
  • डेढ़ लाख वर्ग मीटर में लगाया था गुलाब, विभाग ने किया 3.34 करोड़ के नुकसान होने का आकलन

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 07:12 AM IST

ऊना. कोरोना संकट में ऊना जिला के फूल उत्पादकों का कारोबार चौपट हो गया है। पिछले दो माह से गुलाब, जरबेरा और मैरीगोल्ड की कोई डिमांड नहीं आ रही है,  क्योंकि लॉकडाउन-4 में भी मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारे बंद हैं। मैरिज पैलेसों पर भी कोरोना का साया पड़ा है। बड़े आयोजन करने की अनुमति भी नहीं है, जिसका सीधा नुकसान फूल उत्पादकों को झेलना पड़ रहा है।

उधर, हॉर्टीकल्चर विभाग ने जिला में फूल उत्पादकों को अब तक 3.44 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन किया है। गगरेट एरिया की बात करें तो वहां 10-12 बागबानों ने मिलकर दो लाख वर्ग मीटर में ग्रीन हाउस लगाया है, इसमें डेढ़ लाख वर्ग में चार-पांच किस्म का गुलाब लगाया था। जबकि 50 हजार वर्ग मीटर में जरबेरा फूल लगाए हैं। अब डिमांड न होने से गुलाब के फूलों को काटकर फेंकना पड़ रहा है। हालांकि गर्मियों में गुलाब की पैदावार और रेट्स अच्छे होते हैं, लेकिन कोरोना के चलते फूल उत्पादकों को निराशा ही हाथ लगी है।

जिला में ऐसी ही स्थिति जरबेरा और मैरीगोल्ड की खेती करने वाले फूल उत्पादकों की है। फूल उत्पादक मुश्ताक मुहम्मद ने माना कि कोरोना संकट की वजह से उन्हें करीब ढाई करोड़ का नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि हमने डेढ़ लाख वर्ग मीटर में गुलाब लगा रखा है। उन्होंने कहा कि गर्मियों में गुलाब का सीजन पीक पर होता है। चंडीगढ़, दिल्ली, जयपुर और हैदराबाद की फूल मार्केट में गुलाब स्टिक के अच्छे दाम मिल जाते थे पर अबकी बार उन्हें गुलाब काटकर फैंकना पड़ा है।

ऊना में हैं 52 फूल उत्पादक

इस जिला में लगभग 52 फूल उत्पादक हैं। इनमें से अधिकतर ने ग्रीन हाउसों में गुलाब और जरबेरा के फूल लगा रखे हैं। चिंतपूर्णी और अंब क्षेत्र में कुछ उत्पादक मैरीगोल्ड फूलों की खेती करते हैं। इस बार उन्हें भी नुकसान उठाना पड़ा है। क्योंकि 17 मार्च से शक्तिपीठ चिंतपूर्णी के कपाट भी श्रद्धालुओं के लिए बंद हैं। ऐसे में मैरीगोल्ड की डिमांड नहीं रही है।  

हर माह बिकते थे लाखों के फूल, चंडीगढ़ भी जाते थे

जिला में लॉकडाउन से पहले प्रत्येक माह लाखों रुपये का गुलाब और जरबेरा का फूल मार्केट में बिकता था। पीक सीजन में गुलाब की स्टिक 10 से 12 रुपये और जरबेरा की 5 रुपये के हिसाब से बिक जाती थी। सभी फूल उत्पादक चंडीगढ़ और अमृतसर की फूल मार्केट में अपना माल भेजते थे। कुछेक तो दिल्ली की मार्केट में गुलाब व जरबेरा सप्लाई करते थे।

एक्सपर्ट व्यू: घबराएं नहीं उत्पादक,पौधों का बचाव करें

फूल उत्पादकों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। पहले उन्हें पौधों का बचाव करना चाहिए। इसके लिए पौधों की न्यूट्रीशियन कम कर दें, जिससे उनकी ज्यादा ग्रोथ न हो पाए। जरबेरा के पौधों की तुरंत बडिंग करनी चाहिए, ताकि पौधे हेल्दी रह सकें। गुलाब के पौधों की कटिंग करके रखें। युसुफ खान, एमएसई हॉर्टीकल्चर (माइकोलॉजी एंड प्लांट पैथालोजी)

  • विभाग ने फूल उत्पादकों को हुए नुकसान का ताजा आकलन किया है। जिसकी विस्तृत रिपोर्ट प्रदेश सरकार को भेजी जा रही है। डॉ. सुभाष चंद, डिप्टी डायरेक्टर हॉर्टीकल्चर ऊना

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