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दुनिया का सबसे लंबा स्नो फेस्टिवल:मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए किया समापन, 75 दिनों तक चला उत्सव

लाहौल स्पीति3 महीने पहले
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स्नो फेस्टिवल के समापन समारोह में उपस्थित लोग। - Dainik Bhaskar
स्नो फेस्टिवल के समापन समारोह में उपस्थित लोग।
  • प्रतिदिन 5000 से अधिक पर्यटक वाहन अटल टनल रोहतांग को पार करते हैं
  • टनल बनने से पहले केवल 71 होम स्टे थे और आज 450 से अधिक होम स्टे हैं

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने दुनिया के सबसे लंबे स्नो फेस्टिवल का मंगलवार सुबह वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए समापन किया। शिमला से लाहौल स्पीति तक चले स्नो फेस्टिवल के समापन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्सव 75 दिनों तक चला। यह राज्य के आदिवासी जिले की विविध संस्कृतियाें और परंपराओं को बढ़ावा देने में एक लिए महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा।

यह जिले में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में भी काम करेगा। उन्होंने कहा कि अटल टनल रोहतांग ने विकास के नए रास्ते खोले हैं, क्योंकि इसने कनेक्टिविटी को सुनिश्चित किया है। पर्यटन विकास को भी काफी बढ़ावा दिया है। इससे न केवल स्थानीय लोगों को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे, बल्कि लोगों की अर्थव्यवस्था में भी बदलाव आएगा।

5000 तक वाहन कर रहे टनल को पार

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि अटल टनल और पर्यटन धीरे-धीरे पर्याय बनते जा रहे थे, क्योंकि प्रतिदिन 5000 से अधिक पर्यटक वाहन इस टनल को पार करते हैं। ऐसे में पर्यटकों को सर्वोत्तम बुनियादी ढांचा प्रदान करने के लिए कदम उठाए जाने की आवश्यकता है, ताकि पर्यटक घाटी में आराम से अपनी छुट्टियां बिता सकें। टनल को राष्ट्र को समर्पित करने से पहले केवल 71 होम स्टे थे और आज 450 से अधिक होम स्टे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी को बताएंगे उत्सव के बारे में

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि वह लाहौल घाटी में पहली बार आयोजित किए गए स्नो फेस्टिवल के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को व्यक्तिगत रूप से अवगत कराएंगे। राज्य सरकार जल्द ही लाहौल स्पीति के पर्यटन के प्रभावी विपणन के लिए केंद्रीय पर्यटन मंत्री के समक्ष एक ठोस प्रस्ताव पेश करेगी और इस आयोजन की GI टैगिंग को सुनिश्चित करने के लिए भी कदम उठाए जाएंगे।

उत्सव का होगा डॉक्यूमेंटेशन

जनजातीय विकास, तकनीकी शिक्षा और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. राम लाल मारकंडा ने कहा कि उत्सव का डॉक्यूमेंटेशन किया जाएगा, ताकि यह उत्सव एक इतिहास के रूप में संरक्षित हो सके। इस आयोजन से आदिवासी जिले की समृद्ध संस्कृति और परंपरा को पुनर्जीवित करने में मदद मिलेगी।

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