नवरात्र पर सजे शक्तिपीठ, आज से आराधना:दर्शन को मिलेगा सिर्फ 1 मिनट, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाओं और बच्चों को नहीं मिलेगा प्रवेश

हिमाचल15 दिन पहले
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आज पहले नवरात्र पर करें मां चिंतपूर्णी के दर्शन। - Dainik Bhaskar
आज पहले नवरात्र पर करें मां चिंतपूर्णी के दर्शन।

नवरात्र मेलों के लिए हिमाचल के मंदिरों में पूरी तैयारी है। सभी मंदिरों को फूलों से सजाया गया है। कोविड-19 के चलते बिना मास्क के श्रद्धालु मंदिराें में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। 65 साल से अधिक आयु वर्ग के लाेगाें, गर्भवती महिलाओं और 10 साल से कम उम्र के बच्चाें काे मंदिर परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। भक्ताें काे एक मिनट ही भगवान के दर्शन करने की अनुमति दी जाएगी। मंदिर परिसर में सिर्फ खड़े-खड़े दर्शन करने की अनुमति होगी, मंदिर के भीतर प्रवेश वर्जित होगा। मंदिर परिसर में बैठने पर सख्त मनाही रहेगी।

मंदिरों में भंडारे भी नहीं होंगे। भक्त मंदिराें में काेराेना प्राेटाेकाॅल काे फाॅलाे करते हुए हवन यज्ञ कर सकते है, लेकिन इसमें साेशल डिंस्टेंसिंग का पूरा ख्याल रखना हाेगा। मंदिराें में मूर्तियाें काे नहीं छू सकते। मंदिर में किसी काे भी रात्री ठहराव की अनुमति नहीं दी जाएगी। विभाग ने दिव्यांगाें के लिए मंदिराें में भगवान के दर्शन के लिए अलग से व्यवस्था करने काे कहा है।

सख्ती बरकरार: प्रदेश के मंदिरों में केवल उन्हीं श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति होगी, जो आरटीपीसीआर या रेपिड एंटिजन टेस्ट की नेगेटिव रिपोर्ट साथ लाएंगे अथवा जिन्होंने कोरोना की दोनों वैक्सीन लगवा ली हों। बिना मास्क और दर्शन पर्ची के श्रद्धालुओं को दर्शनों की अनुमति नहीं दी जाएगी। ढोल नगाड़ों, भिक्षावृति पर प्रतिबंध रहेगा। नवरात्र के दौरान धारा 144 लागू रहेगी। अस्त्र-शस्त्र को लाने ले जाने की अनुमति नहीं होगी।

दर्शन-मंदिरों के कपाट सुबह 5 बजे से देर रात 10 बजे तक खुले रहेंगे। दोपहर को भी केवल आधे घंटे के लिए बंद रहेंगे। भीड़ अधिक होने पर मंदिर के द्वार रात 2 बजे से ही खोल दिए जाएंगे।

अनुष्ठान-मंदिरों में हवन यज्ञ और भजन कीर्तन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। मेलों के दौरान न तो पुजारी यात्रियों को प्रसाद वितरित करेंगे और न ही कोई पुजारी यात्रियों को मौली बांधेगा।

व्यवस्था- व्रजेश्वरी में बड़े वाहनों को कांगड़ा बाईपास व छोटे वाहनों को शहर के भीतर आने की इजाजत होगी। तहसील चौक से बाईपास व गुप्त गंगा से श्रद्धालुओं को लाने व जाने को मुद्रिका बस भी चलाई जाएगी। चिंतपूर्णी में मेले को 4 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। सभी सेक्टरों में नायब तहसीलदारों को तैनात किया गया है। कोलांवाला टोबा से केवल बसों और छोटे वाहनों को ही नयनादेवी आने की परमिशन होगी।

सुरक्षा-श्रद्धालुओं की सुरक्षा, कानून व यातायात व्यवस्था का जिम्मा संभालने को पुलिस व होमगार्ड के अतिरिक्त जवान तैनात किए गए हैं। सीसीटीवी से भी नजर रखी जाएगी।

अपील- मेले के दौरान यात्री अपने जूते चप्पल वाहन में उतार कर आएं। कोरोना के नियमों की अवहेलना करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी। मंदिर परिसरों में कंजक पूजन पर प्रतिबंध रहेगा।

नवरात्र के दौरान नयनादेवी में हो सकती है पानी की किल्लत
अश्विन नवरात्र के दौरान नयनादेवी में पानी की किल्लत होने की आशंका जताई जा रही है। दरअसल, नयनादेवी को मुख्य रूप से आनंदपुर हाइडल चैनल की नहर से पानी आपूर्त किया जाता है, लेकिन रिपेयर वर्क के चलते यह योजना इन दिनों बंद है। इस समय कालाकुंड पर आधारित पुरानी स्कीम से पानी की आपूर्ति की जा रही है। रोज हजारों श्रद्धालुओं की आमद की स्थिति में इस स्कीम से पानी की डिमांड पूरी हो पाना मुश्किल लग रहा है।

सूखा प्रसाद ला सकते हैं भक्त
डीसी ऊना राघव शर्मा ने मेले के दौरान बाहरी राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को शांतिपूर्वक ढंग से मां चिंतपूर्णी के दर्शन करने ओर कोविड नियमों का पालन करने की अपील की है। मेले के दौरान मंदिर में कड़ाह प्रसाद और नारियल ले जाने व प्रतिबंध रहेगा। सूखा प्रसाद,ड्राई फ्रूट,मेवा आदि लेकर मंदिर में प्रवेश कर सकते है।

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