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  • Dharmashala McLeodganj Ropeway, Detachable Gondola (cabin) System To Be Completed From Italy By 31 May 2021

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कोरोना इफ़ेक्ट:अब 31 मई 2021 तक पूरा होगा धर्मशाला-मैक्लोडगंज रोपवे, केबिन सिस्टम अभी इटली से आना है

धर्मशाला10 महीने पहले
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धर्मशाला और मैक्लोडगंज को जोड़ने वाले रोपवे का काम तेजी से चल रहा है। यह अगले साल तक शुरू हो जाएगा। - Dainik Bhaskar
धर्मशाला और मैक्लोडगंज को जोड़ने वाले रोपवे का काम तेजी से चल रहा है। यह अगले साल तक शुरू हो जाएगा।
  • छह साल बाद मई 2021 तक शुरू हो जाएगा धर्मशाला-मैक्लोडगंज को जोड़ने वाला रोपवे, कंपनी ने सरकार से मांगी अनुमति

(प्रेम सूद). प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने और पर्यटन सीजन के दौरान यातायात के साधनों को आसान बनाने के उद्देश्य से धर्मशाला और मैक्लोडगंज को जोड़ने वाले रोपवे का काम तेजी से चल रहा है। 144.9 करोड़ रुपए की लागत से निर्माणाधीन 1.75 किलोमीटर हवाई दूरी वाले रोपवे का निर्माण कार्य अब 31 मई 2021 तक पूरा होने की संभावना है। कोरोना महामारी से पहले इसे 30 जून 2020 तक पूरा कर लिया जाना प्रस्तावित था। लेकिन अभी तक प्रशासनिक उदासीनता के चलते धर्मशाला स्थित टेक-ऑफ प्वाइंट के पास बनने वाली पार्किंग की भूमि की पर्यावरण मंजूरी नहीं मिली है।

भूमि की पर्यावरण मंजूरी के लिए सरकार को लिखा

अधिकारियों का कहना है कि भूमि चिन्हित कर भूमि की पर्यावरण मंजूरी के लिए प्रदेश सरकार को प्रेषित कर दिया गया है। टाटा रियल्टी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की 76% हिस्सेदारी वाली कंपनी धर्मशाला रोपवे लिमिटेड द्वारा इस परियोजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। धर्मशाला रोपवे परियोजना के प्रमुख कर्नल सुरेश पठानिया ने कहा कि निर्माण कार्य पूरा होने वाला है और जल्द ही रोपवे प्रणाली की स्थापना शुरू हो जाएगी। परियोजना को 30 जून 2021 तक पूरी करने की समय सीमा तक इसे चालू करने की उम्मीद कर रहे हैं।

पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा

पर्यटन के क्षेत्र की प्रदेश की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना हैं। इसके निर्माण से जहां प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। वहीं साहसिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। इनके निर्माण से स्थानीय लोगों को स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे जिससे उनकी आर्थिकी भी सुदृढ़ होगी।
लामा बौद्ध मठ के पास होगा ऊपरी टर्मिनल

रोपवे की कुल लंबाई 1.75 किमी होगी। निचला या बेस टर्मिनल धर्मशाला बस-स्टैंड और ऊपरी टर्मिनल दलाई लामा बौद्ध मठ के समीप होगा। 13 टावरों के साथ, यह एक मोनो-केबल डिटैचेबल गोंडोला (केबिन) सिस्टम रोपवे होगा, जिसमें 18-24 केबिन होंगे और प्रति घंटे 1,000 व्यक्तियों को लाने व ले जाने की क्षमता होगी। धर्मशाला और मैकलोडगंज के बीच सड़क की दूरी लगभग 10 किमी है। हालांकि, पर्यटक सीजन के दौरान कभी-कभी वाहनों की भारी आमद के कारण ट्रैफिक जाम के कारण धर्मशाला से मैकलोडगंज पहुंचने में तीन या चार घंटे लगते हैं। मैक्लोडगंज से रोपवे तक पहुंचने का अनुमानित समय नौ मिनट होगा।
पार्किंग क्षेत्र से संबंधित नहीं हुई कोई प्रगति
परियोजना समय पर पूरी तरह से चालू नहीं हो सकती है क्योंकि पार्किंग क्षेत्र से संबंधित कोई प्रगति नहीं हुई है, जिसे धर्मशाला बस स्टैंड के पास रोपवे के बेस टर्मिनल के समीप बनाया जाना प्रस्तावित था। बेस टर्मिनल पर निर्माण एजेंसी द्वारा एक छोटी भूमिगत पार्किंग का निर्माण किया जा रहा है।  धर्मशाला नगर निगम द्वारा टेक-ऑफ पॉइंट के पास एक बड़ा निर्माण किया जाना था। प्रस्तावित पार्किंग के लिए वन विभाग से मंजूरी लेनी शेष है। धर्मशाला-मैकलोडगंज रोपवे की परिकल्पना साल 2013 में की गई थी और इसे 13 फरवरी 2015 को सरकार की अंतिम मंजूरी मिल गई थी। सरकार द्वारा 8 जून 2015 को टीआरआईएल के पक्ष में एक पत्र जारी किया गया था। 16 जनवरी 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह द्वारा परियोजना की आधारशिला रखी गई थी। परियोजना को 2018 के अंत तक पूरा किया जाना था, लेकिन वन मंजूरी में देरी के कारण स्थगित कर दिया गया था। रोपवे परियोजना के लिए कुल 2.24 हेक्टेयर भूमि चिन्हित की गई थी, जिसमें से 1.69 हेक्टेयर वन भूमि थी। परियोजना के लिए 439 पेड़ काटे गए।

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