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रोजी-रोटी पर छाए संकट के बादल:कोरोना के कारण फूलों की मांग हुई कम; चायल घाटी में तैयार खड़ी फसल, उत्पादक कहते हैं- कर्ज में डूब जाएंगे

चायल11 दिन पहले
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हिमाचल प्रदेश में फूलों की खेती करके गुजर बसर कर रहे किसान आज आर्थिक संकट से जूझ रहे है। कोरोना महामारी के कारण लगे लॉकडाउन की स्थिति ने शादी-विवाह, धार्मिक व मांगलिक कार्यों पर ब्रेक लगा दिया है। अब समारोह बिना सजावट के हो रहे है, जिसके कारण फूलों की पैदावार करने वाले किसान प्रभावित हो रहे हैं। इन दिनों कारनेशन व गुल-दाउदी की फसल तैयार हो चुकी है, जो डिमांड न होने पर मुरझाती जा रही है।

कोरोना महामारी के चलते देश की बड़ी फूल मंडियों से चायल, कंडाघाट सहित अन्य क्षेत्रों के फूल उत्पादकों को फोन आना बंद हो चुके है। ऐसे में खेतों में खड़ी फूलों की तैयार पैदावार से लाखों का नुकसान झेलना पड़ रहा है। उत्पादकों का कहना है कि फूलों की फसल को तैयार करने के लिए मेहनत के साथ-साथ कीटनाशक, लेबर व खाद पर भारी भरकम राशि लगती है, लेकिन फूलों की डिमांड खत्म होने से आर्थिक संकट पैदा हो चुका है।

कर्ज में डूब जाएंगे

चायल घाटी के पुष्प उत्पादक वीरेंद्र ठाकुर, सुरेन्द्र ठाकुर, दिनेश, अशोक कुमार, नंदराम ठाकुर, माधोराम, बाबू राम ठाकुर, मदन ठाकुर, आत्मस्वरूप व प्यारेलाल का कहना है कि फूल न बिकने से उन पर भारी आर्थिक संकट पड़ रहा है। अगर जल्द से जल्द कोई राहत नहीं मिली तो फूलों की फसल से लाखों का नुकसान होगा।

पिछले साल की तरह इस साल भी फूल न बिकने के कारण फसलों के खराब होने का खतरा हो गया है। जबकि फसल को तैयार करने के लिए भारी भरकम कर्ज लिया है। ऐसे में कर्जा वापस करना चुनौती है। बीते साल भी फसल कोरोना से प्रभावित हुई। लाखों की पैदावार खेतों में सड़ गई थी। प्रदेश सरकार की ओर से भी सहायता का आश्वासन दिया थ, लेकिन अज तक कुछ नही मिला।

इन फूलों की पैदावार सबसे ज्यादा

कंडाघाट के अलावा चायल सहित कई क्षेत्रों में कारनेशन, गुल-दाउदी, औरग्लैंड, लिलियम, एस्टोमेरिया, गेंदा सहित कई किस्मों के फूलों की पैदावार होती है। अधिकतर फसल पूरी तरह से तैयार हो चुकी है। लेकिन अब डिमांड न होने से संकट मंडराना शुरू हो गया है। इन फूलों के लिए देश की बड़ी मंडियों से हर माह लाखों रुपयों का व्यापार होता है। फूलों को विभिन्न समारोह व शादियों में इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन अब शादियों व समारोह पर ब्रेक लगने से संकट पैदा होना शुरू हो गया है।

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