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विभाग कर रहा नजरअंदाज:जेबीआर की डंपिंग साइट पर एक माह में 3 बार लगी आग, लेकिन सवाल सुलग रहे

नालागढ़एक महीने पहले
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केंदूवाल के कचरा साइट पर लगी आग। - Dainik Bhaskar
केंदूवाल के कचरा साइट पर लगी आग।
  • ट्रीटमेंट प्लांट शुरू नहीं, कचरे के लगे पहाड़

जेबीआर इंवायरमेंट के केंदूवाल प्लांट में एक माह में तीसरी बार आग लग चुकी है। एक बार फिर लगी आग ने कई टन कचरा तो राख कर दिया, लेकिन सवाल अभी भी सुलग रहे है कि आखिर हर बार प्लांट के साथ लगे कचरे के ढेर में लगने वाली आग से कैसे प्लांट बाल-बाल बच रहा है। सबसे ज्यादा नुकसान वातावरण को पहुंच रहा है और एरिया की हवा में जहर घुल रहा है।

ऐसे में खतरनाक कैमिकल सांस के जरिए क्षेत्रवासियों के शरीर में प्रवेश हो रहा है, जिससे तरह-तरह की बीमारियां भी लग सकती है। शुक्रवार शाम कचरा प्लांट के साथ लगे कचरे के पहाड़ में लगी आग भयंकर रूप से फैल गई। आगजनी की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाना शुरू कर दिया। दमकल विभाग बद्दी की एक गाड़ी के साथ-साथ एक फॉयर टेंडर वर्धमान उद्योग से लिया। इस कूड़े में प्लास्टिक होने के कारण आग तेजी से फैलने लगी और धुंए की लपटों से आसमान में अंधेरा छाया रहा।

जानकारी के अनुसार जेबीआर की टीम ने भी कचरे को प्लांट से दूर करने का कार्य शुरू कर दिया। प्लांट में आगजनी के चलते प्लांट के बाहर ट्रेक्टरों और कूड़े से भरे डंपरों की लंबी-लंबी कतारें लग गई। गौरतलब रहे कि इस डंपिंग साइट पर बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ के अलावा परवाणू का कचरा भी पहुंचता है। जेबीआर कंपनी के एमडी जोगिंद्र सिंह का कहना है कि आग लगने का कारण अज्ञात है। प्लांट चारों तरफ से खुला है ऐसे में शरारती तत्वों द्वारा भी आग लगाई जा सकती है। राष्ट्रीय मजदूर संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज कुमार चौधरी ने कहा कि जेबीआर के प्लांट में महीने में तीसरी बार आगजनी की घटना हो चुकी है। राज कुमार चौधरी ने आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसा तो नहीं कंपनी प्रबंधन द्वारा जानबूझकर आग कचरे को खत्म करने के लिए लगा दी जाती है ताकि ट्रीटमेंट पर होने वाले खर्चे से बचा जा सके। उन्होंने उच्च अधिकारियों से जांच की मांग उठाई है।

बीबीएनडीए सीईओ बोले-खुद लग जाती है आग

बीबीएनडीए सीईओ विनोद शर्मा ने कहा कि जब ज्यादा कचरे का ढ़ेर लग जाता है तो आग खुद लग जाती है। उन्होंने कहा कि परवाणू व बीबीएन का कचरा काफी अधिक है, लेकिन प्लांट की प्रोसेसिंग बहुत कम है। जिसके कारण कचरा का पहाड़ बना हुआ है। सबसे हैरानी की बात तो यह है कि बार-बार आग लगने के बावजूद भी अधिकारी द्वारा जांच बैठाने की बात तक नहीं की गई।

हजारों टन कचरा नहीं हो रहा प्रोसेस

डंपिंग साइट पर हजारों टन कचरा एकत्रित हो चुका है। प्लांट अपनी क्षमता के मुताबिक भी रोजाना कचरे की प्रोसेसिंग नही कर रहा है। जिसके कारण केंदूवाल में कचरे का बड़ा पहाड़ बनता जा रहा है। एरिया में फैल रही गंदगी से बीमारियों के संक्रमण फैलना का खतरा बना हुआ है। अगर रोजाना 15 से 20 टन कचरा भी ट्रीट किया जाता है तो आने वाले कुछ समय तक कचरे का पहाड़ कम हो सकता है।

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