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कोविड 19:हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार की पत्नी संतोष शैलजा की कोरोना से मौत; संक्रमित बेटे ने दी मुखाग्नि

कांगड़ा2 महीने पहले
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी रविवार को फोन पर शांता कुमार और उनके परिवार का हाल जाना था। - Dainik Bhaskar
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी रविवार को फोन पर शांता कुमार और उनके परिवार का हाल जाना था।
  • कांगड़ा के CMO डॉक्टर गुरदर्शन गुप्ता ने निधन होने की पुष्टि की
  • कोविड-19 नियमों के तहत हुआ अंतिम संस्कार, प्रख्यात लेखिका थीं

हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार की पत्नी संतोष शैलजा(75) का कोरोना महामारी के कारण निधन हो गया है। मंगलवार सुबह कांगड़ा जिले के टांडा स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद सरकारी मेडिकल कॉलेज में उन्होंने आखिरी सांस ली। कांगड़ा के CMO डॉक्टर गुरदर्शन गुप्ता ने निधन की पुष्टि की है।

गत शुक्रवार को ही संतोष शैलजा के कोरोना संक्रमित होने की खबर मिली थी। हालत खराब होने के चलते उन्हें टांडा मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। शांता कुमार का परिवार कोरोना संक्रमित हुआ था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी रविवार को फोन पर शांता कुमार और उनके परिवार का हाल जाना था।

शांता कुमार और उनकी पत्नी के अलावा चार अन्य सदस्य, उनका निजी सचिव, सुरक्षा अधिकारी और चालक भी संक्रमित हैं। कोरोना होने के बाद शांता कुमार ने फेसबुक पर एक भावुक पोस्ट भी लिखा था। जिसमें उन्होंने कोरोना महामारी का डटकर सामना करने की अपील लोगों से की थी।

कोविड-19 नियमों के तहत हुआ अंतिम संस्कार

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्‍टर गुरदर्शन गुप्ता ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री की पत्नी संतोष शैलजा का पालमपुर में घुग्‍गर में कोविड-19 नियमों के तहत अंतिम संस्‍कार किया गया। बेटे बिक्रम शर्मा ने चिता को मुखाग्‍न‍ि दी। इस मौके पर शांता कुमार व विधानसभा अध्‍यक्ष विपिन परमार समेत स्‍थानीय SDM व तहसीलदार भी मौजूद रहे।

लेखिका के रूप में अलग पहचान रखती थीं संतोष शैलजा

संतोष शैलजा वरिष्ठ भाजपा नेता शांता कुमार की पत्नी ही नहीं, बल्कि अध्यापिका व लेखिका के रूप में अलग पहचान रखती थीं। उन्होंने कई पुस्तकें व उपन्यास लिखे। अमृतसर (पंजाब पाकिस्तान) के एक गांव में 14 अप्रैल 1937 को जन्मी संतोष शैलजा ने 10वीं तक शिक्षा वहीं प्राप्त की। भारत विभाजन की त्रासदी के पश्चात माता-पिता सहित दिल्ली आ गई। यहीं पर उच्च शिक्षा ग्रहण की और कुछ वर्ष अध्यापन-कार्य किया। उनका विवाह वर्ष 1964 में शांता कुमार से हुआ। विवाहोपरांत संतोष शैलजा पालमपुर, हिमाचल प्रदेश में रहने लगी। यहां पर उन्हें तीन पुत्रियां व एक पुत्र हुआ। लेकिन उन्होंने अपने लेखन व पठन पाठन कार्य को जारी रखा। पति-पत्नी दोनों को लेखन में रुचि होने से दोनों की 10-10 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।

संतोष शैलजा की कुछ उल्लेखनीय पुस्तकें है:

उपन्यास : 'कनक छड़ी', 'अंगारों में फूल', 'निन्नी'
कहली-संग्रह : 'जौहर के अक्षर', ज्योतिर्मयी', 'पहाड़ बेगाने नहीं होंगे'
कविता-संग्रह : 'ओ प्रवासी मीत मेरे'
अन्य पुस्तकें : 'धोलाधार', 'हिमाचल की लोककथाएँ'

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