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हिमाचल की अटल टनल:पीएम मोदी 3 अक्टूबर को करेंगे इनॉगरेशन, 10 हजार फीट की ऊंचाई पर बनी है सुरंग; सेना के लिए बेहद अहम

कुल्लू2 वर्ष पहले
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अटल टनल बन कर तैयार, प्रधानमंत्री 3 अक्टूबर को इसका उद्घाटन करेंगे। फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
अटल टनल बन कर तैयार, प्रधानमंत्री 3 अक्टूबर को इसका उद्घाटन करेंगे। फाइल फोटो
  • अभी सिर्फ गर्मी के मौसम में ही मिलेगा लेह तक टनल का लाभ, सर्दियों के मौसम में सिर्फ लाहौल वासियों को ही मिलेगा फायदा

(गौरीशंकर). देश की सुरक्षा के लिहाज से अति महत्वपूर्ण अटल टनल का निर्माण पूरा हो गया है और 3 अक्तूबर को देश के प्रधानमंत्री इसका लोकार्पण करने आ रहे हैं। उसके बाद सिर्फ नौ मिनट में ही विलक्षण दुनियां के दीदार हो सकेंगे। सर्दियों के मौसम में खासकर लाहौल की सुंदरता को कोई निहार नहीं पाता था। लेकिन अब बर्फबारी के बीच भी सैलानी लाहौल स्पीति की सुंदरता को निहार सकेंगे।

अटल टनल बन कर तैयार। कई खासियतों से परिपूर्ण इस टनल के बनने से लाहौल वासियों को फायदा होगा
अटल टनल बन कर तैयार। कई खासियतों से परिपूर्ण इस टनल के बनने से लाहौल वासियों को फायदा होगा

टनल के निर्माण की बात करें तो शुरुआती दौर में इस टनल के निर्माण की लागत 16 सौ करोड़ रुपए थी। लेकिन, काम में देरी होने और विकट परिस्थितियों ने इसकी लागत बढ़ा दी है। अब यह प्रोजेक्ट करीब 32 सौ करोड़ में तैयार हुआ है। लिहाजा इतने सालों में इसकी लागत दो गुना से अधिक पहुंच गई है।

10 हजार फीट की ऊंचाई पर बनी टनल

यह टनल हिमाचल प्रदेश में मनाली के पास समुद्रतल से 10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित पहाड़ को भेदकर बनाई है। पहले राेहतांग टनल के नाम से बनाई जा रही थी। लेकिन बाद में इसका नामकरण अटल टनल किया गया। इस टनल का निर्माण कार्य वर्ष 2010 से बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन ने शुरू किया। सर्दियों के दौरान माइनस -23 डिग्री सेल्सियस में बीआरओ के इंजीनियर, मजदूरों ने इसके निर्माण किया।

बॉर्डर रोड आर्गेनाइजेशन के माहिर अधिकारियों व मजदूरों की अथक मेहनत से तैयार अटल टनल।फाइल फोटो
बॉर्डर रोड आर्गेनाइजेशन के माहिर अधिकारियों व मजदूरों की अथक मेहनत से तैयार अटल टनल।फाइल फोटो

5 साल पिछड़ा टनल का लक्ष्य

इस टनल के निर्माण का काम पूरा करने का लक्ष्य वर्ष 2015 रखा गया था। लेकिन जब टनल की खुदाई का काम चला तो इसके भीतर सेरीनाला के पास पानी का रिसाव हो गया और टनल के भीतर दलदल मलबा भर गया। इस पानी के रिसाव को कम करने में बीआरओ को अढ़ाई से तीन साल का समय लग गया। जिसके चलते टनल निर्माण का कार्य पिछड़ गया। लेकिन अब यह टनल 5 साल देरी से तैयार हो रही है।

क्या कहते हैं अधिकारी

एडिशनल डायरेक्टर जनरल बीआरओ (नार्थ-वेस्ट) अनिल कुमार, चीफ इंजीनियर, केपी पुरूषोतमन रोहतांग का कहना है कि यह टनल 8.8 किलोमीटर बनाई जानी थी। लेकिन टनल के दोनों मुहानों पर टनल के बाहर बनाई गई। गैलरी के कारण इसकी लंबाई अब 9.02 किलोमीटर हो गई है।

कुछ ऐसे बढ़ा टनल का कार्य--

  • 28 जून, 2010 को रोहतांग टनल का शिलान्यास किया गया था। अटल टनल के दोनों छोर 2017 में मिले।
  • 25 दिसंबर 2019 को रोहतांग टनल से अटल टनल का नाम किया गया। इस टनल में 80 किमी प्रति घंटे की गति से वाहन दौड़ सकेंगे।
  • हर दिन तीन हजार वाहन गुजर सकेंगे टनल से। मुख्य टनल के नीचे एस्केप टनल है।
  • मुख्य टनल से प्रत्येक 500 मीटर की दूरी पर एस्केप टनल के लिए इमरजेंसी एग्जिट-वे, पूरी टनल में 18 रास्ते बनाएं गए हैं। एस्केप टनल में प्रवेश करने के।
  • इस टनल से मनाली से लेह के बीच कम होगी 46 किमी की दूरी। ढाई घंटे का समय और ईंधन बचेगा।
  • 100 मीटर के बाद ट्रैफिक इन्टेन्सिटी डिटेक्शन सिस्टम। हर 2 किलोमीटर के बाद वाहन मोड़ने और यू-टर्न लेने की सुविधा।
  • लाहौल-स्पीति जिला के लाहौल की 36 हजार की आबादी 12 महीने होगी कनैक्टीविटी।
  • एवलांच यानी भूस्खलन से बचने के लिए बेहद उच्च तकनीक का इस्तेमाल होगा।
  • भारतीय सीमा पर तैनात सैनिकों को रसद पहुंचाना आसान होगी, सेना की देखरेख में होगी टनल।
  • दस हजार फुट की ऊंचाई में वर्ल्ड की सबसे लंबी हाई-वे टनल होगी। दिन और रात का लाईटिंग सिस्टम।
  • 225 सीसीटीवी कैमरा लगे हैं टनल में, जिसमें 60 पीटीजैड कैमरा है शामिल, हर 50 मीटर बाद कैमरा।
  • टनल के भीतर लाउड स्पीकर, इमरजेंसी टेलीफोन सुविधा।
  • हादसा संभावित वाहन टनल के बाहर होंगे स्कैन, नहीं जा सकेंगे टनल के भीतर।

--हाईट डिटेक्टर बड़ी गाड़ियों को सैंस करेंगे।इन्होंने टनल निर्माण में दिया है महत्वपूर्ण योगदान3000 से ज्यादा मजदूरों ने किया टनल में काम इसके अलावा 750 इंजीनियर और स्पोटिंग स्टाफ ने निभाई अहम भूमिका। टनल में काम करने के लिए ज्यादातर समय साउथ पोर्टल में ही मिल पाया है जहां बीआरओ 12 महीने काम कर पाया है। जबकि नार्थ पोर्टल बर्फ के कारण 6 महीने बंद रहता था जिस कारण बीआरओ वहां साल में सिर्फ 6 महीने ही काम कर पाया है।

बीआरओ को सेरी नाला ने दी थी चुनौती

चीफ इंजीनियर, केपी पुरूषोतमन रोहतांग टनल परियोजना का कहना है कि बीआरओ ने जब टनल का कार्य शुरू किया तो 1800 मीटर टनल खुदाई करने पर ही सैरी नाला बाधक बन गया। यहां पानी 140 लीटर प्रति सैकंड की रफ्तार से निकल रहा था और साथ में मलबा भी। जिस कारण करीब 587 मीटर टनल की खुदाई और पानी को रोकने में 4 साल से ज्यादा का वक्त लग गया। बीआरओ ने लेटेस्ट टेकनॉलाजी में प्रूफिंग स्पोटिंग, लेटिस गिलडर और रॉक वोल्डिंग से पानी का रिसाब रोका।

--बीआरओ एक दिन में 6 मीटर टनल की खुदाई करते थे जहां रॉक मिलती थी लेकिन जहां मिटटी आदि थी वहां 3 मीटर से अधिक की खुदाई प्रति दिन होती थी। जिस कारण एक महीने में 180 मीटर तक टनल की खुदाई की लेकिन सेरीनाला में ऐसा समय आया जब दिन के बजाए एक महीने में 10 मीटर टनल की खुदाई कर पाए। कुछ महीने तो काम ही बंद पड़ गया था।यह होगा सामरिक महत्वदेश की सीमा में सुरक्षा व्यवस्था को आसान बनाने के लिए यह अटल ज्यादा सामरिक महत्व रखती है।

टनल के अंदर 80 किलोमीटर की रफ्तार से वाहन दौड़ सकते है। फाइल फोटो
टनल के अंदर 80 किलोमीटर की रफ्तार से वाहन दौड़ सकते है। फाइल फोटो

बीआरओ को 3488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा पर कुल 73 सामरिक महत्व की सड़क और टनल बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी। पिछले कुछ सालों में बीआरओ ने 61 सड़कें और टनल बनाकर तैयार कर ली हैं।

एवलांच प्रोटेक्शन

पीर पंजाल रेंज की इस श्रृंखला में सर्दियों के मौसम में काफी एवलांच यानि बर्फीले तूफान आते हैं। इसके लिए बीआरओ ने कुल्लू मनाली से रोहतांग टनल कए बीच खास एवलांच एंड मेट्रोलोजिकल-प्रोन छोटी छोटी सुरंग बनाई हैं ताकि वे एवलांच का भार सह सकें और आवाजाही पर कोई प्रभाव ना पड़े।

फॉर-जी कनेक्टिवेटी

उद्घाटन के बाद से ही टनल के अंदर मोबाइल यूजर्स को फॉर-जी कनेक्टिवेटी मिल सकेगी। इसके लिए बीएसएनएल के साथ बीआरओ ने खास इंतजाम किए हैं।

3 को होगा उद्घाटन

पीएम नरेंद्र मोदी 3 अक्तूबर को टनल का उदघाटन करने के लिए पहले मनाली के साहसे में हवाई यात्रा के माध्यम से पहुंचेंगे उसके बाद टनल के साउथ पोर्टल पहुंचेंगे जहां टनल का उदघाटन से पहले पूजा होगी और उसके बाद टनल का उदघाटन किया जाएगा। जहां से टनल का निरीक्षण करते हुए दूसरी तरफ सिस्सू पहुंचेंगे और यहां लाहौल के चुनिंदा लोगों के साथ मुलाकात करेंगे और संदेश देंगे उसके बाद वापस टनल के माध्यम से सोलंगनाला पहुंचेंगे यहां भी संबोधन का कार्यक्रम के बाद वे वापस लौटेंगे।

अटल टनल के नीचे एक और टनल बनाई गई जो हादसे के समय काम में आएगी। फाइल फोटो
अटल टनल के नीचे एक और टनल बनाई गई जो हादसे के समय काम में आएगी। फाइल फोटो
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