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72 कर्मचारियों ने की वैक्सीन के 1052 नमूनों की जांच:रेगुलेटर और सेंट्रल लैब ने तौर-तरीके बदले तो 7-8 वर्ष में आने वाली वैक्सीन एक वर्ष में लगने लगी, गुणवत्ता भी रही बरकरार

कसौली2 महीने पहलेलेखक: पवन कुमार
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देश में वैक्सीन के हर बैच के नमूनों की जांच करने वाली संस्था सीडीएल कोरोना काल में 72 कर्मचारियों के सहारे ही वैक्सीन के करीब 1050 नमूने जांच चुकी है। - Dainik Bhaskar
देश में वैक्सीन के हर बैच के नमूनों की जांच करने वाली संस्था सीडीएल कोरोना काल में 72 कर्मचारियों के सहारे ही वैक्सीन के करीब 1050 नमूने जांच चुकी है।

देश में कोरोना संक्रमण के दुष्प्रभाव से लोगों को बचाने के लिए ड्रग्स रेगुलेटर और सेंट्रल ड्रग्स लैबोरेट्री ने वैक्सीन की गुणवत्ता से समझौता किए बिना अपने काम के तौर-तरीके में बदलाव लाकर 7 से 8 वर्ष में होने वाले काम को एक वर्ष में पूरा किया। यही वजह रही कि एक वर्ष से भी कम समय में वैक्सीन की 120 करोड़ से ज्यादा डोज लगाई जा चुकी है। देश में वैक्सीन के हर बैच के नमूनों की जांच करने वाली संस्था सेंट्रल ड्रग्स लैबोरेट्री (सीडीएल) कोरोना काल में अपने 72 कर्मचारियों के सहारे ही काेरोना वैक्सीन के करीब 1050 नमूने जांच चुकी है।

कोरोना वैक्सीन के विकास में प्री-क्लीनिकल ट्रायल से फेज थ्री के ट्रायल को पूरा करने में ड्रग्स रेगुलेटर ने हर स्तर पर बदलाव किया। जानवरों पर किए जाने वाले प्री-क्लीनिकल ट्रायल में टॉक्सिीटी और इम्यूनोजेनेसिटी की जांच में पहले कम से कम छह माह तक अध्ययन होता था। उसके बाद ही रिपोर्ट सीडीएससीओ स्वीकार करता था। कोरोना काल में एक महीने के अध्ययन के बाद ही अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर सीडीएससीओ ने पहले फेज के क्लीनिकल ट्रायल को स्वीकार किया।

इन बदलावों से मिली सफलता

  • कोरोना काल से पहले आमतौर पर तीन से छह माह में सीडीएल से किसी नई वैक्सीन के नमूनों को जांच के बाद बाजार में इस्तेमाल के लिए भेजा जाता था। वर्तमान में 20 से 25 दिनों में कोविड वैक्सीन जांच की प्रक्रिया पूरी करने के बाद इस्तेमाल की इजाजत दी जा रही है। इस दौरान जांच की पहले वाली चेकलिस्ट को ही फॉलो किया जा रहा है। हां, यह जरूर है कि अभी कोविड वैक्सीन की जांच को प्राथमिकता में रखा गया।
  • पहले फेज के क्लीनिकल ट्रायल करने के लिए इजाजत देने पर पहले तीन से छह माह का समय लगता था, जो अब तीन से छह दिन में पूरा किया जा रहा है। पहले फेज के क्लीनिकल ट्रायल को पहले 180 दिनों तक फॉलोअप किया जाता था, लेकिन अब एक माह में ही अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर पहले चरण के साथ ही दूसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल को इजाजत दे दी गई।
  • दूसरे फेज के क्लीनिकल ट्रायल में पहले 208 दिनों तक फॉलोअप किया जाता था, जो अब 56 दिनों की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर किया गया। इसके बाद तीसरे फेज के क्लीनिकल ट्रायल को अनुमति दी गई।
  • तीसरे फेज में 56 दिन की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर वैक्सीन को आपात स्थिति में इस्तेमाल की इजाजत दी गई। इस्तेमाल की इजाजत देने से पहले सेफ्टी, इम्यूनोजेनेसिटी और वैक्सीन के प्रभावी होने के वैज्ञानिक आधार के ठोस सबूत मिलने के बाद ही सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी की सिफारिश के आधार पर रेगुलेटर ने वैक्सीन इस्तेमाल की अनुमति दी।
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