कृषि बिल का समर्थन:कांगड़ा-चंबा के सांसद किशन कपूर ने कहा- कृषि विधेयकों का विरोध किसानों को गुमराह करने के लिए किया जा रहा है

धर्मशाला2 वर्ष पहले
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कांगड़ा-चंबा के सांसद किशन कपूर ने कहा किसानों को भ्रमित कर रहे कुछ राजनैतिक दल। फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
कांगड़ा-चंबा के सांसद किशन कपूर ने कहा किसानों को भ्रमित कर रहे कुछ राजनैतिक दल। फाइल फोटो
  • कपूर ने कहा कि प्रधानमंत्री ने किसानों के हितों के लिए सार्थक कदम उठाए

कांगड़ा-चंबा लोकसभा क्षेत्र के सांसद किशन कपूर ने कहा है कि कुछ राजनैतिक दलों द्वारा कृषि विधेयकों का विरोध सिर्फ किसानों को गुमराह करने के लिए किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने वर्ष 2014 से ही किसानों के हितों कि रक्षा के लिए कई सार्थक कदम उठाए हैं । इसके परिणामस्वरूप किसान आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हुए हैं।

कपूर ने कहा कि संसद द्वारा पारित उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सरलीकरण), कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन एवं कृषि सेवा पर करार और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक सही मायनों में किसानों को अपनी फसल के भंडारण और बिक्री की आजादी देंगे और बिचौलियों के चंगुल से उन्हें मुक्त करेंगे।

उन्होंने कहा कि उत्पाद, व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन एवं सरलीकरण) विधेयक किसानों को यह अधिकार देगा कि वे अपनी उपज को देश के किसी भी भाग में किसी भी व्यक्ति या संस्था को अपने इच्छित और उचित मूल्य पर बेच पाएं। उन्होंने यह भी कहा कि यह विधेयक एक देश एक बाजार सोच के साथ किसानों कि फसलों की लागत कम कर उनकी आय की वृद्दि का मार्ग प्रशस्त करता है।

इस विधेयक से किसानों की आढ़तियों पर निर्भरता कम होगी और बिचौलियों का वर्चस्व समाप्त होगा। यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि इस विधेयक से सरकार की न्यूनतम समर्थन मूल्य नीति पर कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा जो बिल्कुल निराधार है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कर दिया है किया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद बंद नहीं होगी।

कांग्रेस और अन्य विरोधी दलों का विरोध केवल राजनैतिक हितों कि पूर्ति से है अन्यथा देश कि आजादी से ले कर वर्ष 2014 तक देश के अन्नदाता का जो हाल था वह किसी से छिपा नहीं। सांसद किशन कपूर ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और उनके सहयोगी अन्य विपक्षी दल केवल राजनैतिक स्वार्थों कि पूर्ति के लिए किसानों के प्रति झूठी सहानुभूति दर्शाते हैं, ऐेसे दल निश्चय ही जनता में बेनकाब होते हैं।

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