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  • Kangra Valley Rail Line Failed In Election Promise, No Attempt To Convert 120 Km Of Rail Track Into Broad Gauge Line In 70 Years

आश्वासन :कांगड़ा घाटी रेल लाइन चुनावी वायदे में फेल, 70 सालों में 120 किलोमीटर के रेल ट्रैक को ब्रॉडगेज लाइन में बदलने का कोई प्रयास नहीं

धर्मशाला15 दिन पहले
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रेलवे की उदासीनता के चलते पिछले 70 सालों में 164. 6 किलोमीटर के रेल ट्रैक को ब्रॉड गेज लाइन में बदलने का कोई प्रयास नहीं किया। फाइल फोटो
  • क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली कांगड़ा रेल लाइन का बुरा हाल
  • 91 साल पुरानी पठानकोट-जोगिंदरनगर नैरोगेज लाइन आजादी से पहले मई 1926 में अंग्रेजों ने बनाई
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(प्रेम सूद). सामरिक दृष्टि एवं क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली कांगड़ा घाटी रेल लाइन चुनावी वायदे में फेल होकर रह गई है। रेलवे की उदासीनता के चलते पिछले 70 सालों में 164. 6 किलोमीटर के रेल ट्रैक को ब्रॉड गेज लाइन में बदलने का कोई प्रयास नहीं किया। इन सभी सालों में ट्रैक में एक भी ईंट नहीं जोड़ी गई है। नैरोगेज लाइन को ब्रॉडगेज लाइन में बदलने के लिए कई योजनाऐं बनाई गईं, लेकिन सभी फाइलों तक ही सीमित रहीं।

रेल ट्रैक सात दशकों से बना रहा चुनावी मुद्दा
पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेलवे ट्रैक पिछले सात दशकों से विधानसभा और लोकसभा चुनावों में बड़ा मुद्दा रहा है। इस रेलवे ट्रैक को ब्राडगेज में तबदील करने के लिए दो बार सर्वे भी किया जा चुका है। इसके अलावा कांगड़ा-चंबा के तत्कालीन सांसद शांता कुमार इस रेलवे ट्रैक को ब्राडगेज करने की मांग उठाते रहे हैं। लेकिन दिसंबर 2018 में तत्कालीन रेलवे मंत्री पीयूष गोयल ने धर्मशाला प्रवास के दौरान बयान दिया कि शिमला-कालका और पठानकोट-जोगिंद्रनगर नैरोगेज ट्रैक देश की ऐतिहासिक धरोहरें हैं। इसलिए इन्हें नैरोगेज से ब्रॉडगेज नहीं किया जाएगा। इनका विस्तारीकरण कर छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। इसके बजाए दोनों रेल लाइनों की पुरानी पटरियां बदली जाएंगी। पुरानी गाड़ियों को भी बदल कर नए कोच चलाए जाएंगे। जिसके बाद नैरोगेज रेल ट्रैक पर 12 नए इंजनों को दौड़ाने का रोड मैप तैयार किया गया। कांगड़ा रेलवे स्टेशन को हेरिटेज की तरह तैयार किया जाना प्रस्तावित था। यहां कांगड़ा की संस्कृति और पेंटिंग को दर्शाने के लिए म्यूजियम बनाया बनाया जाना प्रस्तावित है जिससे कांगड़ा घाटी में घूमने आने वाले देशी-विदेशी पर्यटक संस्कृति से रूबरू हो सकें।

स्टीम इंजन पठाकोट रेलवे स्टेशन में फांक रहा है धूल
स्टीम इंजन सितंबर 2018 में पपरोला रेलवे स्टेशन पहुंचा था। एक बार को छोड़कर यह हर दफा रास्ते में ही दम तोड़ जाता है। कभी चढ़ाई न चढ़ पाने और कभी कलपुर्जे टूटना इसके बंद होने का मुख्य कारण है। इंजन को पालमपुर से पपरोला तक ही चलाने के लिए विभाग को डेढ़ लाख रुपए खर्च करने पड़ते हैं। स्टीम इंजन को चलाने के लिये 20 क्विंटल कोयले की जरूरत होती है। साथ में इसके लिए मैकेनिकल स्टाफ भी बाहर से मंगवाया जाता है। सबसे पहले अक्टूबर 2018 में ब्रिटिश पर्यटकों के दल ने इसे एक लाख सैंतालीस हजार रुपए के किराए में पालमपुर से पपरोला के लिए बुक कराया था लेकिन उसके बाद इसकी बुकिंग नहीं हुई। फिर स्कूली बच्चों को इसमें घूमाने की योजना विभाग ने बनाई लेकिन वह भी सिरे नहीं चढ़ पाई। इसके बाद से स्टीम इंजन पपरोला रेलवे स्टेशन में धूल फांक रहा था जिसे अब 6 माह पूर्व पठानकोट वापस भेज दिया गया है।

स्टीम इंजन सितंबर 2018 में पपरोला रेलवे स्टेशन पहुंचा था। अब इसे पठानकोट वापस भेज दिया गया है।

12 अगस्त तक नहीं चलेंगी इस ट्रैक पर ट्रेनें
डीआरएम फिरोजपुर राजेश अग्रवाल ने 21 मार्च को आदेश जारी कर हिमाचल की लाइफ लाइन कही जाने वाले पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेल सैक्शन पर चलने वाली 14 ट्रेनों को अगले आदेशों तक निरस्त कर दिया था। 12 अगस्त तक पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेलवे ट्रैक पर कोई भी ट्रेन संचालित नहीं की जाएगी। इस संबंध में फिरोजपुर रेल मंडल ने मंगलवार को ही रेलवे स्टेशन मास्टरों को पत्र भेज कर सूचित किया है।

मई 1926 में अंग्रेजों ने रेलवे लाइन की योजना बनाई और 1929 में चालू की
91 साल पुरानी पठानकोट-जोगिंदर नगर नैरोगेज लाइन आजादी से पूर्व मई 1926 में अंग्रेजों ने रेलवे लाइन की योजना बनाई और 1929 में चालू की । 164. 6 किलोमीटर लंबी लाइन पर मौजूदा समय में रोजाना 7 ट्रेनें अप और 7 डाउन चलती हैं। ये ट्रेनें देश के मैदानी इलाकों से कांगड़ा घाटी को जोड़ती हैं। रेलवे इसको कालका-शिमला और दार्जिलिंग रेल मार्ग की तरह वर्ल्ड हेरिटेज बनाना चाहता है।

पठानकोट से लेह तक बिछेगी 400 किमी नई रेल लाइन
सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पठानकोट-लेह मार्ग को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। अभी तक केवल जम्मू-कश्मीर के रास्ते ही लेह तक सीधा पहुंचा जाता है, जबकि रोहतांग का रास्ता तीन महीने के लिए गर्मी में खुलता है, बाकी सारा साल इलाका बर्फ से ढका रहता है। ऐसे में लेह में बढ़ते चीन की सेना के दखल को देखते हुए पठानकोट-लेह रेलमार्ग को महत्वपूर्ण तौर से देखा जा रहा है ताकि युद्ध की स्थिति बनती है तो जेएंडके का रास्ता बंद होने पर सेना तक असलहा पहुंचने के लिए रेल लाइन का इस्तेमाल किया जा सके। मंडी से वाया कुल्लू-मनाली और रोहतांग से लेह पहुंचेगी ट्रेन। पिछले रेल बजट में लेह को रेलमार्ग से जोड़ने के लिए पठानकोट से लेह के बीच 400 किलोमीटर तक नई रेल लाइन बिछाने का सर्वे कराने का प्रावधान किया गया था जोकि अभी चल रहा है। लाइन के सर्वे का पहला चरण चल रहा है। इस बार के बजट में लेह तक लाइन बिछाने का दूसरे चरण का सर्वे शुरू होगा। वहीं, पठानकोट-जोगिंदर नगर नैरोगेज को ब्रॉडगेज करने के अलावा उसे आगे मंडी तक ले जाया जाएगा। इसके लिए जोगिंदर नगर से मंडी 48 किमी में नई ब्रॉडगेज लाइन बिछाई जाएगी। उसके बाद मंडी से कुल्लू-मनाली, रोहतांग होते हुए ट्रेन को लेह लद्दाख तक पहुंचाने की योजना रेल मंत्रालय की है।

मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने 6 फरवरी 2019 को कांगड़ा जिले के बैजनाथ पपरोला रेलवे स्टेशन से बैजनाथ पपरोला से पठानकोट के बीच नई एक्सप्रेस ट्रेन नंबर 52476 को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था

12 अगस्त तक ट्रैक बंद
बैजनाथ-पपरोला रेलवे स्टेशन प्रभारी एसएस रविंद्र रावत ने बताया कि 12 अगस्त तक पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेलवे ट्रैक पर कोई भी ट्रेन संचालित नहीं की जाएगी। इस संबंध में फिरोजपुर रेल मंडल से आज ही (मंगलवार) को पत्र मिला है। स्टीम इंजन पपरोला रेलवे स्टेशन में खड़ा था। 6 माह पूर्व इसे पठानकोट वापस भेज दिया है।

कांगड़ा के विकास काे प्राथमिकता

जिला कांगड़ा से राज्यसभा के लिए नामांकित सांसद इंदु गोस्वामी ने कहा कि कोरोना महामारी के चलते अभी वो दिल्ली नहीं जा पा रही है। जैसे ही इस पद की शपथ लेंगी तो कांगड़ा के विकास को प्राथमिकता के आधार पर सांसद किशन कपूर के सहयोग से पुरजोर ढंग से उठायेंगे। सामरिक व कांगड़ा घाटी पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेलवे ट्रैक एक महत्वाकांक्षी योजना है। पूर्व में केंद्र की भाजपा सरकार ने इस ट्रैक पर नई एक्सप्रेस ट्रेन शुरू की है वहीं पालमपुर और बैजनाथ के बीच भाप (स्टीम) हेरिटेज ट्रेन भी चलाई है। पठानकोट-लेह के लिए प्रस्तावित रेलवे ट्रैक को ब्राडगेज करने का सर्वेक्षण शीघ्र हो इसकी मांग की जाएगी।

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