मजबूरी / बरोट से सहारनपुर और बंगाल के लिए पैदल निकल पड़े मजदूर

बरोट से सहारनपुर व पश्चिमी बंगाल जाते प्रवासी मजदूर। बरोट से सहारनपुर व पश्चिमी बंगाल जाते प्रवासी मजदूर।
X
बरोट से सहारनपुर व पश्चिमी बंगाल जाते प्रवासी मजदूर।बरोट से सहारनपुर व पश्चिमी बंगाल जाते प्रवासी मजदूर।

  • बरोट में पुल का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद फंस गए मजदूर, मजदूर अन्य क्षेत्रों में भी परेशानी में

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 07:12 AM IST

मंडी. कोरोना महामारी के कारण लगाए गए लाॅकडाउन में प्रवासी मजदूरों का पलायन जारी है। बरोट में पुल का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद तीन प्रवासी मजदूरों के पास रहने का ठिकाना छिन जाने पर दो मजदूर पैदल ही उत्तर प्रदेश के सहारनपुर व एक पश्चिमी बंगाल  में अपने घर के लिए निकल पड़े। इनकी जेब में न तो इतना पैसा है कि ये मजदूर  गाड़ी करके अपने घर तक पहुंच सकें। प्रवासी मजदूर  नितिन कुमार (24) पुत्र सुखवीर और सलमान (23) पुत्र गुफरान निवासी सहारनपुर उत्तर प्रदेश और गणेश (25) पुत्र धर्म पाल पश्चिम बंगाल के हैं।

लेबर सप्लायर के माध्यम से बरोट में पुल निर्माण के कार्य करने के लिए बरोट में पहुंचे थे। लॉकडाउन के बाद बरोट में बन रहे पुल का निर्माण कार्य बंद होने के कारण वह वहीं पर फंस गए थे। जबकि इन प्रवासी मजदूरों के साथ पहले ही अपने घर चले गए थे। प्रशासन से घर जाने के लिए पास बनाने के बाद तीनों मजदूरों ने शुक्रवार सुबह छह बजे बरोट से पैदल चलना शुरू किया। 

क्वारेंटाइन सेंटर में गिन-गिन कर काटे दिन, अब घर पहुंचाने के बजाए स्वारघाट में छोड़ दिया

लाॅकडाउन के दौरान दिल्ली और वेस्ट बंगाल जैसे राज्यों से जैसे-तैसे हिमाचल पहुंचे जिन लोगों को बरोटीवाला में इंस्टिट्यूशनल क्वारेंटाइन किया गया था। क्वारेंटाइन पीरियड पूरा होने के बाद घर पहुंचाने के बजाए नालागढ़ उपमंडल प्रशासन ने उन्हें शनिवार को स्वारघाट में लाकर छोड़ दिया। हैरानी इस बात की है कि गैरजिम्मेदाराना रवैया अपनाने वाले नालागढ़ प्रशासन ने स्वारघाट उपमंडल प्रशासन को भी इसकी सूचना देने की जहमत नहीं उठाई। ऐसे में पिछले कई दिनों से इंस्टीट्यूशनल क्वारेंटाइन रहते हुए एक-एक दिन गिनने वाले इन लोगों के सामने घर पहुंचने की विकट समस्या खड़ी हो गई है।

प्रवासी मजदूराें की घर वापसी नहीं करवा पाई सरकार

लॉकडाउन के चलते जाे प्रवासी मजदूर अपने घराें काे वापिस जाना चाहते थे सरकार ने उनकी सूची ताे बनवाई लेकिन उनके घर जाने की आज तक व्यवस्था नहीं हाे पाई। गृह राज्याें से भी इन्हें मदद नहीं मिल पाई। अब इन मजदूराें ने स्वयं ही घर जाने के लिये बसाें काे हायर करना शुरू दिया है। बसाें के लिये इन्हें भारी भरकम राशि चुकानी पड़ रही है। इसके लिये ये मजदूर कर्ज लेने काे मजबूर हैं। ये अपने घराें से कर्ज लेकर पैसे मंगवा रहे हैं। क्याेंकि जाे थाेड़े बहुत पैसे इन लाेगाें के पास थे वह लाॅकडाउन के दाैरान खान पान पर खर्च हाे चुके हैं।

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना