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गुड़िया दुष्कर्म और हत्याकांड:मासूम को मिला इंसाफ; दोषी चरानी अनिल उर्फ नीलू को आजीवन कारावास की सजा, दुराचार के बाद की थी हत्या

शिमलाएक महीने पहले
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दोषी चरानी अनिल और नीलू को लेकर जाती पुलिस। - Dainik Bhaskar
दोषी चरानी अनिल और नीलू को लेकर जाती पुलिस।

हिमाचल प्रदेश के जिला शिमला के बहुचर्चित गुड़िया दुष्कर्म और हत्या मामले में दोषी अनिल उर्फ नीलू को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। शुक्रवार को जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर चक्कर में विशेष अदालत में सुनवाई हुई। CBI द्वारा पेश किए गए चलान को आधार मानते हुए कोर्ट ने दोषी नीलू को उम्रकैद की सजा सुनाई।

दोषी को दुष्कर्म मामले में उम्रकैद (टिल फॉर नैचुरल डेथ) और हत्या मामले में उम्रकैद और 10 हजार जुर्माना की सजा सुनाई गई है। विशेष अदालत ने अनिल को 28 अप्रैल को दोषी करार दिया था। इससे पहले बीते मंगलवार को दोषी की सजा पर सुनवाई की प्रक्रिया पूरी हो गई थी। CBI ने पूरी घटना को अमानवीय कृत्य बताते हुए मौत की सजा देने की मांग की थी।

ये था पूरा मामला

4 जुलाई, 2017 को शिमला जिले के कोटखाई की एक छात्रा स्कूल से लौटते समय लापता हो गई थी। 6 जुलाई को कोटखाई के तांदी के जंगल में उसका शव मिला था। जांच में पाया गया कि छात्रा की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी। इस केस की जांच पहले SIT कर रही थी। तत्कालीन IG जहूर जैदी की अध्यक्षता में गठित SIT ने रेप-मर्डर के आरोप में एक स्थानीय युवक सहित 6 लोगों को गिरफ्तार किया।

इनमें से एक नेपाली युवक सूरज की कोटखाई थाने में पुलिस हिरासत के दौरान मौत हो गई थी। उधर, जब इस मामले में न्याय की मांग को लेकर लोग सड़कों पर उतर आए और हिमाचल प्रदेश में कई जगह उग्र प्रदर्शन हुए तो यह केस CBI के हवाले कर दिया गया था। CBI ने ही इस मामले का खुलासा किया था। CBI ने गुड़िया रेप-मर्डर और सूरज हत्याकांड में दो अलग-अलग मामले दर्ज किए।

सूरज हत्याकांड में IG जैदी सहित 9 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया और इनके खिलाफ कोर्ट में चालान भी पेश किया गया। हाल ही में 28 अप्रैल को इस बहुचर्चित केस में शिमला जिला अदालत में विशेष न्यायाधीश राजीव भारद्वाज की अदालत ने 28 वर्षीय अनिल कुमार उर्फ नीलू उर्फ चरानी को दोषी करार दिया है। धारा 372 (2) (I) और 376 (A) के तहत दुराचार का दोषी माना।