तिब्बत के नए 'सिक्योंग' ने ली शपथ:5 लोगों की मौजूदगी में पेंपा सेरिंग ने संभाला निर्वासित सरकार के अध्यक्ष का पद, समारोह का LIVE प्रसारण हुआ

शिमलाएक वर्ष पहले
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प्रधानमंत्री पद के लिए पेंपा सेरिंग का मुकाबला केलसंग दोरजे के साथ था। - Dainik Bhaskar
प्रधानमंत्री पद के लिए पेंपा सेरिंग का मुकाबला केलसंग दोरजे के साथ था।

तिब्बत की निर्वासित संसद के पूर्व अध्यक्ष पेंपा त्सेरिंग को गुरुवार को केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के नए अध्यक्ष (सिक्योंग) के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के मुख्य न्यायधीश सोनम नोरबू डगपो ने उन्हें CTA कार्यालय में शपथ दिलाई। इस कार्यक्रम में केवल पांच ही लोग मौजूद रहे। इनमें नवनिर्वाचित अध्यक्ष प्रधानमंत्री त्सेरिंग, पूर्व प्रधानमंत्री डा. लोबसंग सांग्‍ये, मुख्य न्यायाधीश के अलावा दो अन्य लोग मौजूद थे। तिब्बत टीवी पर इस समारोह का सीधा प्रसारण किया गया। इसमें वर्चुअली तिब्बतियों के आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने भी भाग लिया। इस बार के केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के चुनाव में पेंपा त्सेरिंग ने CTA के अध्यक्ष के रूप में जीत हासिल की है। कोविड-19 महामारी के कारण शपथ ग्रहण समारोह को बिल्कुल सादा रखा गया था।

केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के नए अध्यक्ष बने पेंपा त्सेरिंग

प्रधानमंत्री पेंपा सेरिंग ने चुनाव में 34 हजार 324 मत हासिल किए थे जबकि उनके प्रतिद्वंदी केसलंग दोरजे को 28 हजार 907 मत प्राप्त हुए। नए अध्यक्ष पेंपा सेरिंग के साथ 45 सांसदों का भी चुनाव किया गया है। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के नए अध्यक्ष पेंपा त्सेरिंग को बधाई देते हुए अमेरिका ने कहा कि 'यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका तिब्बत के नए अध्यक्ष पेंपा त्सेरिंग को केंद्रीय तिब्बती प्रशासन का चुनाव जीतने के लिए बधाई देता है। हम उनके साथ आगे काम करेंगे और CTA ग्लोबल तिब्बतन समुदाय को सपोर्ट कर पाए, इसमें हम उनकी मदद करेंगे।

पेंपा त्सेरिंग को शपथ दिलाते मुख्य न्यायधीश सोनम नोरबू डगपो।
पेंपा त्सेरिंग को शपथ दिलाते मुख्य न्यायधीश सोनम नोरबू डगपो।

कौन हैं तिब्बत के नए अध्यक्ष पेंपा त्सेरिंग

तिब्बत की निर्वासित सरकार के नये PM पेंपा सेरिंग का जन्म भारत के कर्नाटक शहर में बेलाकूपी में साल 1967 में हुआ था और उन्होंने स्कूल ऑफ तिबेतन बेवाकूपी से जमा दो तक की पढ़ाई की। इसके बाद वो आगे की पढ़ाई करने के लिए मद्रास आ गए। जहां उन्होंने क्रिश्चियन कॉलेज चेन्नई से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया और फिर तिब्बत की आजादी के संघर्ष में शामिल हो गये। बचपन से ही पेंपा त्सेरिंग तिब्बतियन फ्रीडम मूवमेंट से जुड़े रहे हैं और 2001 से 2008 तक नई दिल्ली में तिब्बतियन पार्लियामांट एंड रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर रहे। पेंपा त्सेरिंग साल 1996, 2001, 2006 और 2011 में सांसद बन चुके हैं। वे आठ साल तिब्बती संसद के अध्यक्ष और कुछ समय तक अमेरिका में दलाई लामा के प्रतिनिधि रह चुके हैं।

पेंपा त्सेरिंग के सामने चुनौतियां

पेंपा त्सेरिंग के सामने बतौर अध्यक्ष कई तरह की चुनौतियां हैं। सबसे बड़ी चुनौती होगा चीन के साथ बातचीत के सिलसिले को आगे बढ़ाना। वहीं, तिब्बत के मुद्दे को जोर-शोर के साथ UN में रखना भी उनके लिए बड़ी चुनौती साबित होगी। वहीं, भारत सरकार के शीर्ष नेतृत्व से भी अच्छा संबंध बनाना पेंपा त्सेरिंग के लिए बेहद जरूरी होगा। पिछले साल अमेरिका ने तिब्बतियन नीति एवं समर्थन अधिनियम 2020 को पास कर चीन को बड़ा झटका देते हुए तिब्बत के मुद्दे को फिर से हवा दी थी।

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