अंतर्राष्ट्रीय दशहरा उत्सव-2020:धारा 144 के लिए आदेश 23 अक्तूबर से लागू; इस बार महज 200 लोगों के साथ रथ यात्रा होगी और सात देवता ही शामिल हो पाएंगे

कुल्लूएक वर्ष पहले
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आदेश के अनुसार भगवान रघुनाथ की यात्रा में हरियानों व देवलूओं सहित केवल 200 श्रद्धालु ही भाग ले सकेंगे और सभी की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव होनी चाहिए। इस दौरान सभी लोगों ने फेसकवर व दस्ताने पहने हों तथा सामाजिक दूरी को बनाए रखना होगा। - Dainik Bhaskar
आदेश के अनुसार भगवान रघुनाथ की यात्रा में हरियानों व देवलूओं सहित केवल 200 श्रद्धालु ही भाग ले सकेंगे और सभी की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव होनी चाहिए। इस दौरान सभी लोगों ने फेसकवर व दस्ताने पहने हों तथा सामाजिक दूरी को बनाए रखना होगा।
  • आगामी 25 से 31 अक्तूबर तक आयोजित किया जाएगा अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव 2020

आगामी 25 से 31 अक्तूबर तक आयोजित किए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय दशहरा-2020 के सुचारू आयोजन को लेकर डीएम ऋचा वर्मा ने धारा 144 के अंतर्गत आदेश जारी किए हैं। ये आदेश 23 अक्तूबर से लागू होंगे।

आदेश के अुनसार रघुनाथ, मनाली की माता हिडिंबा, नग्गर की माता त्रिपुरा सुंदरी, खराहल घाटी के देवता बिजली महादेव, पीज के देवता जमलू, खोखण के देवता आदी ब्रह्मा, सैंज-रैला के देवता लक्षमी नारायण तथा ढ़ालपुर के देवता बीरनाथ को सीमित संख्या में बजंतरियों, गुर, पुजारी, कारदार, हरियान सहित दशहरा उत्सव में भाग लेने की अनुमति प्रदान की गई है।

इनकी संख्या को एसडीएम की अध्यक्षता वाली समिति ने निर्धारित की है। इन व्यक्तियों की आवाजाही संबंधित देवता के बैठने के स्थल तक प्रतिबंधित की गई है। आदेश में कहा गया है कि प्रत्येक देवता के कारदार 23 अक्तूबर से पूर्व देवता के साथ रहने वाले लोगों की सूची प्रस्तुत करेंगे ताकि स्वास्थ्य अधिकारी कोविड-19 के तहत इन व्यक्तियों के सैंपल ले सकें। उक्त देवताओं के अलावा, कोई भी देवता उत्सव में भाग नहीं ले सकेंगे।

उत्सव के पहले और अंतिम दिन रथ यात्रा के दौरान ढ़ालपुर मैदान का आंतरिक व बाह्य भाग को पूरी तरह से सील कर दिया जाएगा। रथ यात्रा में केवल वही लोग भाग ले सकेंगे जिन्हें इसकी अनुमति होगी। 65 वर्ष से अधिक आयु के लोग, को-मोरडिटीज वाले व्यक्ति, गर्भवती महिलाएं 10 साल की आयु से कम के बच्चों को उत्सव में भाग न लेने की सलाह दी गई है।

आदेश के अनुसार भगवान रघुनाथ की यात्रा में हरियानों व देवलूओं सहित केवल 200 श्रद्धालु ही भाग ले सकेंगे और सभी की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव होनी चाहिए। इस दौरान सभी लोगों ने फेसकवर व दस्ताने पहने हों तथा सामाजिक दूरी को बनाए रखना होगा।

17वीं सदी के जुड़ा है मेले का इतिहास

यह बेहद महत्वपूर्ण इवेंट है जिसका इतिहास 17वीं सदी से जुड़ा है। प्रदेश के सीएम और राज्यपाल व अन्य बड़ी शख्सियतें खुद हर साल इसमें शामिल होती हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस इवेंट में हर साल विश्वभर से लाखों की तादाद में लोग शामिल होते हैं। हिमाचल के बड़े देवता भी इसमें शामिल होते हैं। एक बार 356 देवता इसमें शामिल हुए थे और पिछली बार 280 देवता इस समारोह में उपस्थित हुए थे। लेकिन कोविड 19 के चलते इस बार मेले में सिर्फ रसमें ही होंगी। महज 200 लोगों के साथ रथ यात्रा होगी और सात देवता शामिल होंगे। ऐसी स्थिति 1962 में चीन से विवाद के चलते हुई थी और तब महज पांच देवताओं के साथ इस मेले की रस्में निभाई गई थीं।

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