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ओशो की निजी सचिव नहीं रहीं:मां योग नीलम का निधन, बेटी को अंतिम समय के एक-एक पल का अपडेट दिया

धर्मशालाएक महीने पहले
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मां योग नीलम ने 2016 में पहली बार कैंसर की बीमारी का सामना किया था। 1969 में लुधियाना में ओशो से मुलाकात हुई और 1972 में संन्यास लिया था। - Dainik Bhaskar
मां योग नीलम ने 2016 में पहली बार कैंसर की बीमारी का सामना किया था। 1969 में लुधियाना में ओशो से मुलाकात हुई और 1972 में संन्यास लिया था।

ओशो निसर्ग हिमालय ध्यान केंद्र धर्मशाला की संस्थापक और ओशो की निजी सचिव रहीं मां योग नीलम का लंबी बीमारी के बाद धर्मशाला में निधन हो गया। वे कुछ सालों से बीमार थीं। उनका जन्म 19 मार्च 1949 को हुआ था। वे पहली बार 1969 में लुधियाना में ओशो से मिली थीं और 1972 में संन्यास लिया। वह अक्सर पुणे में ओशो के आश्रम में आती थीं और रजनीशपुरम् में चार साल रहीं।

अपनी आखिरी रात अपनी सांसों को देखते हुए बिताई, जितना संभव हो सका क्रॉस-लेग करके बैठीं। अपनी बेटी और प्राथमिक केयरटेकर को अपडेट करती रहीं कि उनकी सांस कैसी चल रही है। उन्होंने अपनी बेटी मां प्रिया से आखिरी शब्द में कहा, अब यह सब आपके माध्यम से होना है। बस आत्मविश्वास रखें और उन्होंने अंतिम सांस ली।

1985 में ओशो के साथ अमेरिका से लौटी थीं
नवंबर 1985 में वे ओशो के साथ भारत लौटीं और फिर उन्हें भारत के लिए ओशाे की निजी सचिव के रूप में नियुक्त किया गया। ओशो ने उन्हें इनर सर्कल के सदस्य के रूप में भी नियुक्त किया था। 1990 में जब ओशो का निधन हुआ तो मां योग नीलम पुणे कम्यून में रहीं और ओशो के कामों को आगे बढ़ाती रहीं। 1996 से 1999 तक, वे हर साल यूरोप के आठ विभिन्न देशों की यात्रा कर प्रमुख ध्यान कार्यक्रम में भाग लेती थीं।

नया केंद्र बनाने में विनोद खन्ना ने मदद की थी
मां योग नीलम ने 1999 में पुणे का कम्यून छोड़ दिया था। वे इनर सर्कल (21 सदस्यों का समूह) का हिस्सा थीं। पुणे का ओशो कम्यून बंट गया तो साल 2000 में मां नीलम और स्वामी आनंद तथागत ने धर्मशाला के शिल्ला गांव में ओशो निसर्ग हिमालय ध्यान केंद्र बनाया। इसमें बॉलीवुड कलाकार विनोद खन्ना ने उनकी मदद की थी। विनोद खन्ना भी ओशो के शिष्य थे। मां योग नीलम ने 2016 में पहली बार कैंसर का सामना किया और इसे केवल एक और चुनौती के रूप में लिया।

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