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सरकारी काम में देरी से परेशानी:धर्मशाला में 163 परिवारों को 13 साल बाद भी नहीं मिले घर, 38 लोग कर्जा लेकर भर चुके पैसा

धर्मशाला (प्रेम सूद)6 महीने पहले
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धर्मशाला महानगर में चराण के निकट केंद्र सरकार की स्कीम IHSDP के जरूरतमंद परिवारों के लिए बनाए जा रहे मकान। - Dainik Bhaskar
धर्मशाला महानगर में चराण के निकट केंद्र सरकार की स्कीम IHSDP के जरूरतमंद परिवारों के लिए बनाए जा रहे मकान।

कोरोना महामारी ने शहरी गरीबों को बेरोजगार करने के साथ आर्थिक विनाश के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। उनके जीवन को कैसे पटसी बीच दैनिक भास्कर उन 163 परिवारों के हित की बात कर रहा है, जिन्हें पिछले 13 साल से सिर पर पक्की छत नसीब नहीं हुई है। लंबे समय से इंटेग्रेटिड हाउसिंग एंड स्लम डेवलपमेंट प्रोग्राम (IHSDP) का काम अधर में लटका होने के कारण इन्हें मकान आबंटित नहीं हुए हैं। हालांकि इनमें से 39 लोग 2019 में ही विभिन्न बैंकों और सोसाइटीज से लोन लेकर नगर निगम के बैंक खाते में डेढ़-डेढ़ लाख रुपए जमा करवा चुके हैं।

बता दें कि धर्मशाला महानगर में चराण के निकट केंद्र सरकार की स्कीम IHSDP के जरूरतमंद परिवारों के लिए 163 मकानों का निर्माण किया जा रहा है। इसके लिए वर्ष 2006-2007 में हुए सर्वे के अनुसार 156 मकानों का निर्माण किया जाना था। केंद्र सरकार ने वर्ष 2012 में तत्कालीन नगर परिषद को करीब 3.87 करोड़ की राशि मंजूर की थी। पहले तो भूमि के चयन को लेकर मामला कई वर्षों तक लटकता रहा। बाद में भूमि चयन होने पर वर्ष 2016 में निदेशक शहरी नगर निकाय हिमाचल प्रदेश ने फरवरी 2016 को 9.45 करोड़ रुपए का टेंडर लगाया था। यह कार्य शुरू होने से करीब छह माह में ही पूरा होना था, लेकिन मौजूदा हालात ये हैं कि अभी तक 120 मकान ही तैयार हो पाए हैं, ये भी आवंटित नहीं हो पाए हैं।

गरीब परिवारों ने जमा करवाए हैं डेढ़ लाख रुपए
तत्कालीन धर्मशाला नगर परिषद ने वर्ष 2008 में शहरी गरीब एवं बेघर लोगों को अलॉटमेंट के लिए प्रार्थना पत्र आमंत्रित किए थे। इसके बाद नगर परिषद को लोगों के आवेदन मिले और इनसे एक मकान का डेढ़ लाख रुपए लेना था। 21 जून 2019 में धर्मशाला नगर निगम ने चयनित गरीब एवं बेघर लोगों को पत्र लिखकर सूचित किया कि उनका चयन वर्ष 2008 में इंटिग्रेटेड हाउसिंग एंड स्लम डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत आवास आबंटन के लिए हुआ था। अतः इस योजना के तहत आवास बन के तैयार हैं। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा निर्धारित 1.5 लाख रुपए नगर निगम में जमा करवाने होंगे। जिसके चलते 38 आवेदन कर्ताओं ने दिसंबर 2019 को 1.5 लाख रुपए निगम कार्यालय में जमा करवा दिए। जबकि दो आवेदन कर्ताओं ने 50-50 हज़ार रुपए जमा करवाए लेकिन उन्हें आज दिन तक मकान आवंटित नहीं हुए। ऐसे में पैसे जमा करा चुके लोगों के सामने दोहरी समस्या है, एक तो कोरोना काल में रहने की दिक्कत और दूसरी बेरोजगारी के बावजूद लोन की किश्त चुकाना।

कौन क्या कहता है

  • इस बारे में नगर निगम कमिश्नर प्रदीप ठाकुर से बात की गई तो उनका कहना था कि मकानों का निर्माण कार्य चल रहा है। कोरोना महामारी के चलते बिजली-पानी और अन्य व्यवस्थाएं करने का काम अभी बाकी है। प्रथमिकता के आधार पर इनका निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन आवंटन अभी समय लगेगा।
  • पूर्व मेयर देवेंद्र जग्गी की राय है कि कोरोना महामारी के चलते शहरी गरीबों को मकान आवंटन में बिलंब हुआ है। जिन लोगों ने औपचरिकताएं पूरी की हैं उन्हें तुरंत मकान आवंटित होने चाहिए। कोरोना काल में उन्हें इसकी जरूरत है ऐसे में प्राथमिकता के आधार पर निगम की आगामी बैठक में चर्चा कर निर्णय लिया जाएगा। जो मकान तैयार हो चुके हैं, उन्हें तो 40 लोगों को अलॉट कर ही देना चाहिए।
  • उधर मेयर ओंकार नैहरिया कहते हैं कि मकानों का निर्माण कार्य चल रहा और चलता भी रहेगा। एक ब्लॉक जो तैयार है उसे आवंटित किया जा सकता है। इसके लिए शीघ्र निर्णय लिया जाएगा।