ढके रहने दो इन मुद्दों को / 69 नेशनल हाईवेज, रेलवे लाइन, शिमला-मटौर फोरलेन, मेडिकल कॉलेज के नए कॉम्प्लेक्स का निर्माण अधर में

हमीरपुर: नादान इलाके में 66 मेगावाॅट क्षमता वाली धौलासिद्ध विद्युत परियोजना के बांध स्थल का निरीक्षण करते एसजेवीएन के अधिकारी व अन्य। हमीरपुर: नादान इलाके में 66 मेगावाॅट क्षमता वाली धौलासिद्ध विद्युत परियोजना के बांध स्थल का निरीक्षण करते एसजेवीएन के अधिकारी व अन्य।
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हमीरपुर: नादान इलाके में 66 मेगावाॅट क्षमता वाली धौलासिद्ध विद्युत परियोजना के बांध स्थल का निरीक्षण करते एसजेवीएन के अधिकारी व अन्य।हमीरपुर: नादान इलाके में 66 मेगावाॅट क्षमता वाली धौलासिद्ध विद्युत परियोजना के बांध स्थल का निरीक्षण करते एसजेवीएन के अधिकारी व अन्य।

  • कहां खो गई धनेटा की सुरंग, गलोड़ का सेंट्रल स्कूल और नादौन का स्पाइस पार्क, सभी की फाइलों पर धूल

दैनिक भास्कर

Jun 30, 2020, 08:29 AM IST

हमीरपुर. (विक्रम ढटवालिया) अब ना ही तो घोषित 69 नेशनल हाई-वेज का शोर सुन रहा है, ना ही ऊना-हमीरपुर रेलवे लाइन का हल्ला। धनेटा की सुरंग का पता नहीं, हमीरपुर के मेडिकल कॉलेज के निर्माण का किसी को अभी भरोसा नहीं। समीरपुर से होकर निकलने वाले नेशनल हाईवे की जमीन एक्वायर करने में अभी कागजी दांव-पेंच कब मुकम्मल होंगे?नादौन का स्पाइस पार्क क्या बनेगा? प्रस्तावित गलोड़ सेंट्रल स्कूल की बुनियाद का पता नहीं, दियोटसिद्ध में रज्जू मार्ग का सपना, सभी मुद्दे गौण हो चुके हैं। जीवित है तो सिर्फ धौलासिद्ध प्रोजेक्ट जिस पर काम की उम्मीद जारी है। 
हमीरपुर से जुड़े इन मुद्दों को ना कोई हिलोरा देता है और ना ही भुनाने की प्रयास कर रहा। कोविड-19 महामारी ने तो इन मुद्दों को अब बहुत दूर धकेल दिया है। क्या यह नेताओं की पहुंच से दूर हो गए हैं,या फिर जनता इस उम्मीद में अभी भी है कि उनकी यह योजनाएं मुकम्मल होंगी। कभी-कभार चर्चा होती है, बस इतना ही काम हो रहा है, बाकी सब कुछ गौण है क्या? यही सवाल भी हो रहे हैं।

दरअसल में यहां तमाम योजनाएं इस इलाके के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और चुनावों के समय इनका शोर भी खूब सुनाई देता है। अहम बात यह है कि शिमला-मटौर फोरलेन की जरूरत अब ज्यादा हो गई है। मगर 2 साल से एनएचएआई का दफ्तर सुना है, वहां कोई हलचल नहीं है। जमीन एक्वायर करने का प्रोसेस शांत है। मानो उस पर किसी की नजर लग गई हो। 
ऊना हमीरपुर रेल लाइन का मसला प्रदेश सरकार के हिस्से के बीच में फंस गया है। 69 नेशनल हाईवे का मामला भी ऐसा फंसा है कि अब यह दलील दी जा रही है कि प्राथमिकता के आधार पर कौन-कौन से बनाए जाएं? घोषणा के समय दो 5 दर्जन से ज्यादा का ऐलान कर दिया था। चुनावों के समय धनेटा-बंगाणा के बीच सुरंग का शोर भी सैद्धांतिक मंजूरी तक पहुंच गया था, मगर अब इसकी चर्चा शांत है।

हमीरपुर के मेडिकल कॉलेज के नए कंप्लैक्स के निर्माण का जिमाऊ सीपीडब्ल्यूडी के सुपुर्द किए हुए लंबा समय हो गया है। मगर काम कब शुरू होगा इस पर भी कहीं किसी की नजर लग गई लगती है। जालंधर-मनाली-टोनी देवी होकर निकलने वाले नेशनल हाईवे के विस्तार और जमीन एक्वायर करने के काम में भी अब कोरोना का ग्रहण लग गया है।

रही बात नादौन के स्पाइस पार्क और गर्ल ओढ़ के प्रस्तावित सेंट्रल स्कूल की इनका शोर भी चुनावों के समय ही सुना जाता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि पिछले 20 साल से 66 मेगावाट क्षमता वाली जिस धौलासिद्ध परियोजना के निर्माण की चमक फीकी पड़ गई थी, उसका निर्माण शुरू होने वाला है। क्योंकि 75 परसेंट से ज्यादा जमीन एक्वायर हो चुकी है और बांध जिस जगह पर बनना है, उसका काम भी अब शुरू होने वाला है।

मुख्यमंत्री से फिर से होगी बात
मसला चाहे नेशनल हाईवेज का हो या ऊना- हमीरपुर रेलवे लाइन का। हमीरपुर के सांसद एवं केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर यह कह चुके हैं कि कितने नेशनल हाईवे प्राथमिकता के साथ शुरू हों, इसका फैसला प्रदेश सरकार को ही करना है। जबकि रेलवे लाइन के निर्माण के लिए उनका कहना था कि इसमें प्रदेश सरकार की हिस्सेदारी कितनी हो सकती है, इस बाबत प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से फिर से बात होगी।

उधर भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सत्ती का कहना है कि इन प्रोजेक्टों में समय तो लगता ही है। कांग्रेस ने इतने साल कुछ नहीं किया। भाजपा इनके निर्माण के लिए प्रयासरत है। ऊना का फ्लाईओवर लोगों के विरोध के कारण स्थगित कर दिया गया है। लेकिन ऊना-हमीरपुर ट्रेन की सोच भाजपा की देन है। हमें मालूम है निर्माण इतना जल्दी आसान नहीं है,लेकिन होगा तो सही।

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