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अलविदा 2020:2020 में हिमाचल को मिली अटल राहें

कुल्लू2 महीने पहले
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  • कोविड-19 ने इस साल हिमाचल प्रदेश में रोकी विकास की राहें
  • दुनिया की सबसे अधिक ऊंचाई पर सबसे लंबी है अटल टनल

वर्ष 2020 हिमाचल प्रदेश के कुल्लू और जनजातीय जिला लाहौल स्पीति के लोगों के लिए बेहद यादगार रहा। इस साल में कुल्लू और लाहौल स्पीति के लिए ही नहीं हिमाचल प्रदेश को अटल राहें के रूप में नई पहचान मिली है। इस वर्ष के 3 अक्टूबर को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 32 सौ करोड़ की लागत से बनी दुनिया की सबसे अधिक ऊंचाई पर सबसे लंबी अटल टनल रोहतांग को देश के लिए समर्पित किया है।

यह टनल सिर्फ जनजातीय जिला लाहौल के लोगों को सर्दियों के दिनों में दुनिया से जोड़ने का काम ही नहीं बल्कि गर्मियों के दिनों में देश की सीमा पर तैनात सैनिकों के लिए रसद पहुंचाने में भी रास्ता आसान करेगी। इस टनल के बनने से दिल्ली से लेह पहुंचने में 6 घंटे की दूरी कम होगी। लाहौल स्पीति जिला के लोगों को अब सर्दियों के दिनों में हेलीकॉप्टर की राहें नहीं देखनी पडे़गी।

बर्फबारी के बीच भी टनल होते हुए वाहन दौड़ रहे हैं। बर्फबारी के दौरान जरूर बीआरओ को मशीनरियों के माध्यम से सड़क से बर्फ हटाने का कार्य और तेज करना होगा, लेकिन लाहौल के लोग अब 12 महीने इस टनल के माध्यम से दूसरे जिलों से जुडे़ रहेंगे।

यह खासियत है अटल टनल रोहतांग की, हर दिन 3000 वाहन गुजर सकेंगे टनल से

  • 28 जून, 2010 को रोहतांग टनल का शिलान्यास।
  • पहले 8.8 किलोमीटर लंबाई थी अब बनी 9.02किलोमीटर लंबी।
  • अटल टनल के दोनों छोर 2017 में मिले।
  • 25 दिसंबर 2019 को रोहतांग टनल से अटल टनल का नाम किया गया।
  • सितंबर 2020 में राष्ट्र को समर्पित होगी।
  • इस टनल में 80 किमी प्रति घंटे की गति से वाहन दौड़ सकेंगे।
  • हर दिन तीन हजार वाहन गुजर सकेंगे टनल से।
  • मुख्य टनल के नीचे एस्केप टनल
  • मुख्य टनल से हर 500 मीटर की दूरी पर एस्केप टनल को इमरजेंसी एग्जिट-वे, पूरी टनल में 18 रास्ते हैं एस्केप टनल में प्रवेश करने के।
  • मनाली से लेह के बीच कम होगी 46 किमी की दूरी।
  • अढाई घंटे का समय और ईंधन का होगा बचाव।
  • सौ मीटर के बाद ट्रैफिक इन्टेन्सिटी डिटेक्शन सिस्टम।
  • 2 किलोमीटर के बाद होगी वाहन मोड़ने और यू-टर्न लेने की सुविधा।
  • लाहौल-स्पीति जिला के लाहौल की 36 हजार की आबादी 12 महीने होगी कनैक्टीविटी।
  • एवलांच से बचने के लिए बेहद उच्च तकनीक का होगा इस्तेमाल।
  • भारतीय सीमा पर तैनात सैनिकों को रसद पहुंचानी होगी आसान, सेना की देखरेख में होगी टनल।
  • दस हजार फुट की ऊंचाई में वल्र्ड की सबसे लंबी हाई-वे टनल होगी।
  • डे-एण्ड नाईट लाईटिंग सिस्टम।
  • 225 सीसीटीवी कैमरा लगे हैं टनल में, जिसमें 60 पीटीजैड कैमरा है शामिल, हर 50 मीटर बाद कैमरा।
  • टनल के भीतर लाउड स्पीकर, इमरजेंसी टेलीफोन सुविधा।
  • हादसा संभावित वाहन टनल के बाहर होंगे स्कैन, नहीं जा सकेंगे टनल के भीतर।
  • हाईट डिटेक्टर बड़ी गाड़ियों को सैंस करेंगे।
  • 3000 से ज्यादा मजदूरों ने किया टनल में काम इसके अलावा 750 इंजीनियर और स्पोर्टिंग स्टाफ ने निभाई अहम भूमिका। टनल में काम करने के लिए ज्यादातर समय साउथ पोर्टल में ही मिल पाया है जहां बीआरओ 12 महीने काम कर पाया है। जबकि नार्थ पोर्टल बर्फ के कारण 6 महीने बंद रहता था जिस कारण बीआरओ वहां साल में सिर्फ 6 महीने ही काम कर पाया है।
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