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  • Mahakumbh Of The Gods In The Field Of Dhalpur Today, This Time 332 Gods Are Invited, They Also Have The Responsibility Of Controlling The Crowd.

ढालपुर में आज होगा देवताओं का महाकुंभ:इस बार 332 देवताओं को निमंत्रण, भीड़ कंट्रोल करने की जिम्मेदारी भी इन्हीं को

कुल्लूएक महीने पहलेलेखक: गौरीशंकर
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पिछले साल सिर्फ 15 देवी देवताओं की मौजूदगी में निभाई थी उत्सव की रस्म, माता हिडिंबा की भूमिका अहम है। - Dainik Bhaskar
पिछले साल सिर्फ 15 देवी देवताओं की मौजूदगी में निभाई थी उत्सव की रस्म, माता हिडिंबा की भूमिका अहम है।

ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में आज श्रद्घा और आस्था के प्रतीक देवी-देवताओं का महाकुंभ लगेगा। पिछले साल कोरोना महामारी के चलते सिर्फ 7 देवी देवताओं को निमंत्रण दिया गया था और 15 देवी देवता भाग लेने पहुंचे थे लेकिन इस बार दशहरा उत्सव समिति की ओर से 332 देवी देवताओं को निमंत्रण भेजा गया है। लिहाजा, रघुनाथ के रथ को हजारों की तादाद में उमड़े लोग और सैकड़ों की संख्या में घाटी के देवी-देवता अधिष्ठाता रघुनाथ के रथ को खींचने और उसके साथ चलने में अपनी अहम भूमिका निभांएगे।

ढालपुर के ऐतिहासिक मैदान में कोविड प्रोटोकाल का पालन करवाने के लिए प्रशासन की ओर से व्यवस्था की गई है। मैदान में प्रवेश करने के लिए दस एंट्री प्वाईंट बनाए गए हैं जहां पुलिस जवान तैनात होकर कोविड प्रोटोकाल के नियमों का निर्धारण करेंगे। ढालपुर मैदान में होने वाली रथ यात्रा के दौरान ऊझी घाटी हलाण-1 के देवता धूमल को रथ खींचते समय लोगों की भीड़ को नियंत्रित करने और रास्ता बनाने की कमान होती है। लोगों की भीड़ पर काबू पाने के लिए धूमल देवता भीड़ को दूर करता है।

वहीं पुलिस जवानों ने भी अपने दल-बल सहित कुल्लू को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया है। कुल्लू के प्रवेश द्वार बजौरा में वाहनों को जांच पड़ताल करके कुल्लू की ओर भेजा जा रहा है। जिला में आने वाले अपने-अपने देवी-देवताओं के साथ 2 दर्जन से अधिक हारियान उन्हें कई घंटों की पैदल यात्रा करके कंधों पर उठाकर लाते हैं। देवताओं के साथ दशहरा के दौरान वे तपस्वियों सा जीवन व्यतीत करते हैं।

इस दौरान वे देवताओं के अस्थाई शिविरों में ही सोते हैं। देव समाज के लोगों का कहना है कि इन देव परंपराओं को निभाते कुल्लू की देव परंपरा को बल मिलता है। दूर दराज के देवी देवता एक सप्ताह पहले से ही उत्सव के लिए रवाना हुए हैं जो आनी निरमंड जैसे दूर दराज क्षेत्रों से पैदल यात्रा कर कुल्लू पहुंचेंगे। ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार 200 से अधिक देवी देवता उत्सव में शिरकत करेंगे।

कोरोना संकट को देखते हुए इस बार नहीं लगेंगी अस्थाई दुकानें

उत्सव के दौरान हालांकि मैदान को अस्थाई दुकानें लगाने के लिए नीलाम किया जाता है और अलग अलग व्यवस्थित बाजार सजाए जाते हैं लेकिन इस बार अभी कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए व्यापारिक मेला लगाने के लिए दुकानें नहीं लगाई जा रही है।

वहीं घाटी में देवताओं की दादी कही जाने वाली माता हिडिंबा की अहम भूमिका होती है, उसके बगैर दशहरा उत्सव अधूरा माना जाता है। कुल्लू के राज दरबार के साथ देवी हिडिंबा का इतिहास है। देवी हिडिंबा ने ही कुल्लू के प्रथम राजा विहंगमणिपाल को गांव में आतंक फैलाने वाले पीति ठाकुरों का नाश कर उन्हेें राजा बनाया था।