हिमाचल में हालडा उत्सव का आगाज:गाहर घाटी में आधी रात को जलाई मशालें, अधीष्ठ देव की पूजा की, अब अलग-अलग घाटियों में मनेगा पर्व

कुल्लू8 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

जनजातिय ज़िला लाहौल स्पीति में नए साल के रूप में मनाये जाने वाले हालडा उत्सव आगाज गाहर घाटी से हो गया है। इसी के साथ अब अलग अलग घाटियों में अलग अलग तिथियों को हालडा उत्सव मनाया जायेगा। गुरुवार रात को गाहर घाटी में हालडा परम्परागत रीति रिवाज के साथ मनाया गया है। लोगों ने मशालें जलाई और अधीष्ठ देव की पूजा की। सभी लोगों ने एक जगह पर एकत्र होकर यह पर्व बड़े धूमधाम के साथ मनाया।

हालडा उत्सव लाहौल स्पीति का एक प्रमुख त्यौहार है, जिसे नए साल के रूप में भी मनाया जाता है। इस दौरान घाटी के लोग बुरी प्रेत आत्माओं को मशाल और जुलूस निकाल कर भगाने की कोशिश करते हैं। जिस में सभी मशाल वाले हाल डा हो, हाल डा हो, बोल कर शोर मचा कर इस पर्व को मनाते है।

लाहौल स्पीति की गाहर घाटी में हालडा उत्सव के दौरान मशालें जलाते लोग।
लाहौल स्पीति की गाहर घाटी में हालडा उत्सव के दौरान मशालें जलाते लोग।

घरों से नहीं निकलते फिर

बौद्ध पंचांग के अनुसार आरम्भ होने वाले हालडा उत्सव एवं नव वर्ष हर साल पारंपरिक रीतिनुसार मनाया जाता है। इस उत्सव को मनाने के बाद लोग अपने घरों से बाहर सप्ताह भर के लिए नहीं निकलते थे। न ही किसी से बात करते थे, लेकिन समय के साथ बदलाव आने के कारण अब 1 या 2 दिन तक ही लोग घरों के अंदर ही अपने परिजनों के साथ ही रहते हैं।

यह है मान्यता

कहा जाता है कि इन दिनों घाटी के सभी देवी देवता स्वर्ग प्रवास पर होते हैं। इस कारण घाटी में दैत्य शक्तियों का प्रभाव रहता है। इन ताकतों के प्रभाव से बचने के लिए ही आधी रात को मशालें जलाई जाती हैं। जानकारों का कहना है कि हालड़ा उत्सव लाहुल स्पीति का प्राचीन त्यौहार है। इसे हर वर्ष मनाया जाता है। इसे नववर्ष का प्रतीक भी माना जाता है। बौद्ध भिक्षू इसे मनाते हैं।

गाहर घाटी में रात को परंपरागत तरीके से हालडा मनाने जुटे लोग।
गाहर घाटी में रात को परंपरागत तरीके से हालडा मनाने जुटे लोग।

उत्सव तिथि निर्धारित

नव वर्ष के रूप में मनाया जाने बल हालडा आयोजन की तिथियां बौद्ध पंचांग के अनुसार निर्धारित की जाती हैं। लिहाजा बौद्ध लामाओं ने अलग अलग घाटी के लिए उत्सव आयोजन की तिथियां निर्धारित की हैं। जिसमें 13 जनवरी की रात गाहर घाटी से इस उत्सव की शुरुआत हुई और इसे दूसरी घाटियों में मनाया जाएगा।

अब यहां मनेगा हालडा

14 जनवरी- तोद घाटी 16 जनवरी- तिनंन घाटी 17 जनवरी- पट्टन घाटी 23 जनवरी- रंगलो

खबरें और भी हैं...