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पहाड़ पर कांग्रेस:हिमाचल में मंडी सीट पर प्रतिभा सिंह 7490 वोटों से जीती, तीनों विस सीटें भी कांग्रेस को, महंगाई का मुद्दा भाजपा पर भारी

कुल्लूएक वर्ष पहले
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हिमाचल प्रदेश में मंडी लोकसभा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी और पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह ने भाजपा कैंडिडेट और कारगिल वॉर के हीरो रिटायर्ड ब्रिगेडियर खुशहाल सिंह को 7490 वोटों से हराया। प्रतिभा सिंह को कुल 3 लाख 69 हजार 565 और ब्रिगेडियर खुशहाल सिंह को 3 लाख 62 हजार 75 वोट मिले।

मंडी संसदीय सीट पर बीती 30 अक्टूबर को हुए मतदान में कुल 7 लाख 53 हजार 566 वोटरों ने वोट दिए। इनमें से कांग्रेस की प्रतिभा सिंह को कुल 369565 वोट मिले। यह कुल वोटिंग का 49.14% रहा। इसी तरह भाजपा कैंडिडेट खुशहाल सिंह को कुल 362075 वोट मिले जो वोटिंग का 48.10% रहा। इस तरह यहां कांग्रेस ने भाजपा से 1.04% अधिक वोट लेकर जीत दर्ज की। मंडी संसदीय सीट पर उपचुनाव में 12661 वोटा NOTA को गए। अन्य प्रत्याशियों में अंबिका श्याम को 3617, मुंशीराम ठाकुर को 1262, अनिल कुमार को 1119 और सुभाष मोहन स्नेही को 1772 वोट मिले। इसके अलावा 1495 वोट रिजेक्ट हो गए।

मंडी संसदीय सीट के वोटों की गिनती में प्रतिभा सिंह सुबह से ही आगे चल रही थीं और 9 बजे तक उन्होंने भाजपा उम्मीदवार पर 3 हजार वोटों की बढ़त बना ली थी, लेकिन 9.30 बजे भाजपा कैंडिडेट ब्रिगेडियर खुशहाल सिंह 4099 वोटों से आगे निकल गए। हालांकि वे अपनी लीड बरकरार नहीं रख सके तो आधे घंटे बाद ही फिर दूसरे नंबर पर पहुंच गए। उसके बाद प्रतिभा सिंह लगातार आगे बनी रहीं। हालांकि उनकी लीड कभी भी 10 हजार के आंकड़े तक नहीं पहुंची।

अगर विधानसभा वाइज वोटों की संख्या देखी जाए तो प्रतिभा सिंह मंडी संसदीय सीट के तहत आती 17 विधानसभा सीटों में से 9 विधानसभा सीटों पर आगे रही वहीं खुशहाल सिंह को 8 सीटों पर बढ़त मिली। पोस्टल बैलेट में भी खुशहाल सिंह को प्रतिभा सिंह से 1276 वोट कम मिले। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की विधानसभा सीट से खुशहाल सिंह को सबसे अधिक 21659 वोटों की बढ़त मिली वहीं प्रतिभा सिंह को सबसे अधिक 19955 वोटों की लीड रामपुर विधानसभा सीट पर मिली।

रामपुर में प्रतिभा सिंह को 19955 वोट की लीड मिलने पर जश्न मनाते कांग्रेसी।
रामपुर में प्रतिभा सिंह को 19955 वोट की लीड मिलने पर जश्न मनाते कांग्रेसी।
विधानसभा सीट वाइज वोट और लीड
सीट का नामप्रतिभा सिंहखुशहाल सिंहप्रतिभा सिंह की लीड/गैप
भरमौर21150158935257
लाहौल-स्पीति773455872147
मनाली23092217781841
कुल्लू25675217783897
बंजार21591197131878
आनी27965209227043
करसोग1923020643-1413
सुंदरनगर2184923761-1912
नाचन26993244222571
सिराज1673538394-21659
द्रंग2373126352-2621
जोगिंद्रनगर2084927993-7144
मंडी1882722073-3246
बल्ह2191922875-956
सरकाघाट1926021109-1849
रामपुर315071155219955
किन्नौर17543125664977
पोस्टल बैलेट39155191-1276
कुल3695653620757490

अर्की में संजय अवस्थी ने बरकरार रखा गढ़ अर्की विधानसभा सीट पर कांग्रेस के संजय अवस्थी ने भाजपा उम्मीदवार रतन सिंह पाल को 3219 वोटों से हराया। अर्की शुरू से ही कांग्रेस का गढ़ मानी जाती रही है। पार्टी ने लगातार तीसरी बार यहां जीत हासिल की। इससे पहले वर्ष 2012 और 2017 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने इस सीट पर कब्जा जमाया था। यहां मंगलवार सुबह 8 बजे मतगणना शुरू होने के साथ ही संजय अवस्थी ने बढ़त बना ली और आखिर तक पहले नंबर पर बने रहे। 30 अक्टूबर को हुए मतदान में अर्की सीट पर कुल 60550 वोट पड़े थे और कांग्रेस के संजय अवस्थी को इसमें से 30798 मत मिले।

दूसरे नंबर पर रहने वाले भाजपा के रतन सिंह पाल को 27579 वोट मिले। इन दोनों के अलावा जीतराम को 547 और NOTA को 1626 वोट मिले। संजय अवस्थी मतगणना के दौरान 11.26 बजे तक 3922 वोट, दोपहर 12.38 बजे तक 4373 वोट और दोपहर 1.28 बजे तक 5047 वोटों से आगे चल रहे थे। आखिरी राउंड में भाजपा प्रत्याशी को अधिक वोट मिले मगर वह संजय अवस्थी की लीड को पार नहीं कर पाए और 3219 वोटों से हार गए।

जुब्बल-कोटखाई में चेतन बरागटा की अनदेखी पड़ी भारी
जुब्बल-कोटखाई सीट पर सुबह से ही मुकाबला कांग्रेस के रोहित ठाकुर और भाजपा से बागी होकर, निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले चेतन बरागटा के बीच रहा। यहां रोहित ठाकुर ने बरागटा को 6293 वोटों से हराया। उपचुनाव के दौरान जुब्बल-कोटखाई सीट पर 30 अक्टूबर को कुल 56607 लोगों ने वोट दिया। इसमें से रोहित ठाकुर को 29955 वोट मिले।

भाजपा के पूर्व मंत्री नरेंद्र बरागटा के बेटे और निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले चेतन सिंह बरागटा दूसरे नंबर पर रहे। उन्हें 23662 मत मिले। हालांकि मतगणना के दौरान सुबह 10.37 बजे तक बरागटा 4231 वोटों से आगे चल रहे थे मगर वह लीड को बरकरार नहीं रख पाए और सवा 11 बजे के बाद रोहित ठाकुर पहले नंबर पर आ गए और उसके बाद उनकी बढ़त लगातार बढ़ती चली गई। दोपहर 1.28 बजे रोहित ठाकुर ने 6293 वोटों की लीड ले ली और उन्हें विजयी घोषित कर दिया गया।

जुब्बल-कोटखाई सीट पर भाजपा ने चेतन बरागटा की जगह नीलम सरैइक को टिकट दिया था जो कभी भी मुकाबले में नजर नहीं आईं। सुबह से ही तीसरे नंबर पर रहीं नीलम को महज 2644 वोट मिले। उनके अलावा सुमन कदम को 170 और NOTA को 176 वोट मिले।

फतेहपुर : साढ़े 12 बजे के बाद बढ़ने लगी पठानिया की लीड
फतेहपुर विधानसभा सीट पर कांग्रेस के भवानी सिंह पठानिया और भाजपा उम्मीदवार बलदेव ठाकुर के बीच आखिरी डेढ़ घंटे से पहले तक कांटे का मुकाबला रहा और उसके बाद पठानिया ने 5789 वोट से जीत दर्ज की।30 अक्टूबर को हुए मतदान में फतेहपुर विधानसभा सीट पर कुल 57095 लोगों ने वोट दिया था। इसमें से 24449 वोट लेकर कांग्रेस के भवानी सिंह पठानिया ने जीत दर्ज की।

दूसरे नंबर पर रहे भाजपा के बलदेव ठाकुर को 18660 वोट मिले। इन दोनों के अलावा डाॅ. राजन सुशांत को 12927, पंकज कुमार दर्शी को 375, डॉ. अशोक कुमार सोमल को 295 और NOTA को 389 वोट मिले।

फतेहपुर विधानसभा सीट पर मतगणना के दौरान कभी भवानी सिंह पठानिया तो कभी बलदेव ठाकुर पहले नंबर पर रहे। यहां सुबह 8 बजे मतगणना शुरू होते ही कांग्रेस के भवानी सिंह पठानिया आगे निकल गए मगर 10.37 बजे भाजपा फिर पहले नंबर पर आ गई। लगभग दो घंटे तक दूसरे नंबर पर रहने के बाद दोपहर 12.38 बजे कांग्रेस के भवानी सिंह पठानिया एक बार फिर पहले नंबर पर पहुंच गए। पौने 1 बजे के बाद पहली बार दोनों दलों के बीच वोटों का अंतर एक हजार के पार निकला। उसके बाद पठानिया की लीड बढ़ती चली गई और उन्होंने 5789 वोटों से जीत दर्ज की।

कांग्रेस को मिले सहानुभूति वोट

प्रतिभा सिंह को प्रदेश के 6 बार मुख्यमंत्री रहे उनके पति स्व. वीरभद्र सिंह के नाम पर सहानुभूति वोट मिले। कांग्रेस के दिग्गज नेता वीरभद्र सिंह के 8 जुलाई 2021 को हुए निधन के बाद हिमाचल प्रदेश में यह पहला उपचुनाव रहा। कांग्रेस ने इसमें वीरभद्र सिंह की पत्नी और पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह को उतारा ताकि उन्हें सहानुभूति वोटों का फायदा मिल सके। प्रतिभा सिंह ने चुनाव प्रचार में इसे भुनाया और कांग्रेस की यह रणनीति सफल भी रही। हालांकि प्रदेश में भाजपा की सरकार होने और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का गृह जिला मंडी होने की वजह से समझा जा रहा था कि यहां उन्हें चुनौती मिल सकती है मगर अंतत: परिणाम प्रतिभा सिंह के पक्ष में रहा।

महंगाई का मुद्दा पड़ा भाजपा पर भारी

मंडी संसदीय क्षेत्र में आने वाली 17 विधानसभा सीटों में से 8 को भाजपा का गढ़ समझा जा रहा था। इसके बावजूद चुनाव प्रचार के दौरान युवा और लोग बढ़ती महंगाई से खफा दिखे और इसका नुकसान भाजपा को उठाना पड़ा। प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के बावजूद काम न होने और बेरोजगारी से परेशान लोगों ने भी अपना गुस्सा इस उपचुनाव में कांग्रेस को वोट देकर निकाला। मंडी संसदीय क्षेत्र में आते 17 विधानसभा क्षेत्रों में 30 अक्टूबर को अपेक्षा के मुकाबले वोटिंग कम रहने के बाद से ही भाजपा की राह मुश्किल मानी जा रही थी। सियासी जानकारों के अनुसार, भाजपा का वोटबैंक समझा जाने वाला यूथ वोट डालने के लिए आगे ही नहीं आया।

किन्नौर में कांग्रेस को 4977 की लीड मिलने पर जश्न मनाते पार्टी कार्यकर्ता।
किन्नौर में कांग्रेस को 4977 की लीड मिलने पर जश्न मनाते पार्टी कार्यकर्ता।

भाजपा का सैनिक कार्ड फेल
कांग्रेस की रणनीति को फेल करने के लिए भाजपा ने यहां सैनिक कार्ड चला और कारगिल युद्ध के हीरो रहे ब्रिगेडियर खुशहाल सिंह को मैदान में उतारा। ब्रिगेडियर खुशहाल सिंह की यूनिट 18 ग्रेनेडियर ने ही कारगिल युद्ध के दौरान सबसे मुश्किल मानी जाने वाली चोटियों तोलोलिंग और टाइगर हिल पर भारतीय झंडा फहराया था। मंडी संसदीय हलके में पूर्व सैनिकों के अच्छे-खासे वोट हैं और भाजपा ने इन वोटों को अपने पक्ष में करने के लिए ही ब्रिगेडियर खुशहाल सिंह को मैदान में उतारा था। पार्टी की रणनीति कुछ हद तक सफल भी रही मगर उसे जीत नहीं मिल पाई।