किन्नौर हादसा:4 और शव निकाले, एनएच से 100 फीट नीचे गहरी खाई में मिला बस का मलबा

रामपुर बुशहर/रिकांगपिओ5 महीने पहलेलेखक: अनिल नेगी और जीता सिंह नेगी
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शवों को निकालने का अभियान दूसरे दिन भी जारी। - Dainik Bhaskar
शवों को निकालने का अभियान दूसरे दिन भी जारी।
  • मृतकों की संख्या 14 हुईं, घटनास्थल पर पहुंचे सीएम
  • एलान-मृतकों को 4-4 लाख सरकार व 1-1 लाख परिवहन विभाग देगा, घायलों को 50-50 हज़ार दिए जाएंगे

जिला किन्नौर के निगुलसरी के पास एनएच 5 पर बुधवार को हुए दर्दनाक हादसे में मृतकों की संख्या अब 14 हो गई है। वीरवार को 4 और शव मलबे से निकाले गए हैं। वहीं हादसाग्रस्त बस का मलबा भी रेस्क्यू टीम को मिल गया है। वीरवार को सीएम जयराम ठाकुर भी हादसे की जगह पर पहुंचे और राहत व बचाव कार्यों का जायजा लिया।

राज्य सरकार इस हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को चार-चार लाख रुपए और गंभीर रूप से घायल लोगों को 50-50 हजार रुपये प्रदान करेगी। वहीं, परिवहन विभाग इस हादसे में जान गंवाने वाले बस यात्रियों को एक-एक लाख रुपए देगा। लापता हुए लोगों को खोजने के लिए रेस्क्यू टीमें वीरवार को भी जुटी रहीं।

इन टीमों में आर्मी की डोगरा रेजिमेंंट, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, पुलिस, होम गार्ड, एसजेवीएन के सीआईएसएफ टीमों के जवान शामिल हैं। वीरवार सुबह 3 बजे से सर्च ऑपरेशन शुरू हुआ, करीब 9 बजे तक सर्च ऑपरेशन टीम ने 3 शव बरामद कर दिए थे। लेकिन 10 बजे के बाद पहाड़ी से बीच-बीच में पत्थर गिरने लगे थे।

इसके बावजूद रेस्क्यू टीम सर्च ऑपरेशन में डटी रही। 11 बजे ऑपरेशन टीन ने एक और शव को बरामद किया। मलबे से निकाले गए शवों की हालत इतनी क्षत-विक्षत थी कि पहचान करना मुश्किल हो रहा था। इसी बीच साढे़ 11 बजे मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने हेलीकॉप्टर से हाईवे सर्वेक्षण भी किया।

उसके बाद वह वापस झाकड़ी गए, जहां पर एसजेवीएन के हैलीपैड में मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर ने लैंड किया। उसके सड़क मार्ग होते हुए साढ़े 12 बजे घटनास्थल पर पंहुचे। मुख्यमंत्री ने वहां पहुंचते ही रेस्क्यू टीम से स्थिति के बारे में जानकारी हासिल की। इस दौरान सीएम ने ड्रोन कैमरे से स्थिति का जायजा लेते हुए राहत कार्य का आकलन किया।

पहले ही सड़क से नीचे खोज करते तो कई लोग बचाए जा सकते थे

घटनास्थल पर दूसरे दिन बचाव दलों के साथ-साथ लाेग भी अपने रिश्तेदारों की तलाश करते रहे। घटनास्थल पर अपनों को तलाशने पहुंचे कई परिजनों का यह भी कहना था कि यदि शुरू में ही रेस्क्यू ऑपरेशन सड़क से नीचे से किया गया होता तो और कई जानें बचाई जा सकती थीं।

उनका कहना था कि पहले रेस्क्यू ऑपरेशन सड़क पर गिरे मलबों को हटाने से किया गया। इस दौरान मलबे और पत्थरों को सड़क से नीचे फेंका गया। लोगों की मानें तो अभी भी करीब बस में सवार 15 से 20 सवारियों के शव और मिलने बाकी हैं।

घायलों के परिजनों के ठहरने और भोजन की उचित व्यवस्था करने के निर्देश

घटनास्थल पर वीरवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी पहुंचे और उन्होंने रेस्क्यू ऑपरेशन का जायजा लिया। उन्होंने मृतकों और लापता लोगों के परिजनों से मिलकर आश्वासन दिया कि उन्हें हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री ने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भावानगर पहुंचकर घायलों का कुशलक्षेम भी जाना और चिकित्सा अधिकारियों को घायलों को बेहतर उपचार सुविधा प्रदान करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार घायलों को निशुल्क उपचार सुविधा प्रदान कर रही है।

मुख्यमंत्री ने आईटीबीपी, एनडीआरएफ, सीआईएसएफ, राज्य पुलिस बलों और स्थानीय लोगों द्वारा राहत और बचाव अभियान कार्य के लिए उनकी सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार इस क्षेत्र का भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण भी करवाएगी।

मुख्यमंत्री ने भावानगर में अधिकारियों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता करते हुए बचाव टीमों, लापता लोगों और घायलों के परिजनों के ठहरने और भोजन की समुचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राहत और बचाव कार्य संवेदनशीलता के साथ किया जाना चाहिए।

बस बुरी तरह क्षतिग्रस्त थी, कुछ ही पुर्जे मिले

हादसे में क्षतिग्रस्त बस के कुछ पुर्जे वीरवार को बचाव दलों को मिले। अाशंका थी कि बस सड़क पर मलबे के नीचे दबी होगी। लेकिन मार्ग बहाली के बाद बस मलबे में नही बल्कि एनएच से करीब 100 फ़ीट गहरी खाई में मिली। बस के परखच्चे उड़े हुए थे।

डीसी ने जिम्मेदार प्रशासक की भूमिका निभाई

सीएम जयराम किन्नौर जिला के निगुलसरी हादसे में किन्नौर प्रशासन व एनडीआरएफ, आर्मी, आईटीबीपी, पुलिस व होमगार्ड की भूमिका सराहनीय रही। इस दौरान डीसी किन्नौर सहित एसपी किन्नौर घटनास्थल पर रहे। इस घटना के दौरान प्रशासन सहित रेस्क्यू टीम नेे विपरीत परिस्थितियों में भी बेहतर कार्य करने पर खुद मुख्यमंत्री सीएम ने प्रशासन व टीमों की सराहना भी की।

बहसबाजी नहीं करते तो शायद कम होता मौत का आंकड़ा

भास्कर ने जब घटनास्थल पर पहुंचकर लोगों से जानकारियां जुटाईं तो बताया गया कि जिस स्थान पर पहाड़ी से चट्टानें गिरीं, वहां पहले से ही पत्थर गिरे थे। इन्हें राहगीरों ने हटाया, इसके बाद आगे निकलने की दौड़ में दो वाहन चालक पासिंग को लेकर उलझते रहे। कई वाहन उन वाहनों के पीछे थे। इस दौरान पलक झपकते ही पहाड़ी से चट्टानें गिरने लगी थीं।

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