अफगानिस्तान से हिमाचल लौटे नवीन की आंखों देखी:बोले- भगदड़ में मर रहे बूढ़े, बच्चे और महिलाएं, तालिबानी जब चाहे कर रहे फायरिंग; एयरपोर्ट के बाहर जुटी है भीड़

शिमला3 महीने पहले
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अफगानिस्तान से सुरक्षित घर लौटे हिमाचल प्रदेश के सरकाघाट के नवीन ठाकुर ने बताया कि वहां हालात बेहद खराब हैं। जो भी भारत का मीडिया तालिबान को लेकर दिखा रहा है, वह सिर्फ 5 फीसदी है। मैंने इससे ज्यादा खौफनाक मंजर वहां पर देखा है। बच्चे, बूढ़े और महिलाएं सड़कों पर मर रहे हैं। भगदड़ में महिलाओं के हाथ से बच्चे छूटकर लोगों के पैरों के नीचे कुचले जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि भारत आने से पहले वो काबुल के बैरन होटल में पहुंचे। यहां पर ब्रिटिश आर्मी की ओर से कैंप बनाया गया है। जिस भी शख्स को एयरपोर्ट के अंदर जाना है पहले उसकी यहां पर चेकिंग की जा रही है। इसके बाद ही यहां से उसे आगे भेजा जा रहा है। यहां से एयरपोर्ट तक 5 किलोमीटर का सफर है।

500 किलोमीटर जैसा लगा 5 किलोमीटर का सफर
नवीन ठाकुर ने बताया कि 5 किलोमीटर का सफर उन्हें 500 किलोमीटर के सफर जैसा गया, क्योंकि यहां से बाहर निकलते ही तालिबानी लड़ाके दिखना शुरू हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि हालांकि एयरपोर्ट तक पहुंचाने के लिए डेनमार्क आर्मी ने उन्हें एस्कॉर्ट किया, लेकिन एयरपोर्ट के पहले के ढाई किलो मीटर का सफर काफी डरावना है। लोग हजारों की संख्या में एयरपोर्ट के बाहर डटे हुए हैं, जो वहां से निकलना चाहते हैं। तालिबानी लड़ाके उनके आसपास है जो उन्हें वहां से जाने नहीं देना चाहते हैं। कभी भी वहां फायरिंग शुरू हो जाती है और लोगों को मार दिया जाता है। उन्होंने बताया कि तीन से चार गोलियां उनके कान के पास से निकली हैं।

अफगानिस्तान से लौटने के बाद अपनी बहनों और परिजनों के साथ नवीन ठाकुर।
अफगानिस्तान से लौटने के बाद अपनी बहनों और परिजनों के साथ नवीन ठाकुर।

एयरपोर्ट पर गोरों ने की मदद
नवीन ठाकुर ने बताया कि जब वह एयरपोर्ट पर पहुंचे तो उनके साथ 90 लोग थे। कुछ लोग बीमार भी थे। ऐसे में डेनमार्क कंपनी के कर्मचारियों ने उनकी काफी मदद की। वो लोग उनके लिए खाना लाते थे, इसके अलावा जो बीमार लोग थे उनके कपड़े भी खुद धोना शुरु कर देते थे।

कजाकिस्तान से हुई उनकी वापसी
नवीन ठाकुर समेत अन्य 90 लोगों को भारतीय कार्गो विमान से कजाकिस्तान ले जाया गया हालांकि डेनमार्क कंपनी उन्हें अपने साथ ले जाना चाहती थी, लेकिन भारत में ऐसा करने से मना कर दिया। कजाकिस्तान ले जाने पर 16 से 17 घंटे उन्हें वहां पर रखा गया। इसके बाद वहां से उन्हें एक फ्लाइट में दिल्ली पहुंचा दिया गया। यहां पर भारतीय एयरफोर्स के जवानों ने उन्हें काफी सपोर्ट किया।

भारतीय एंबेसी में भी मिलने आए थे 8 से 10 तालिबानी लड़ाके
नवीन ठाकुर ने कहा कि जब वो भारतीय एंबेसी में थे, तो वहां पर 8 से 10 तालिबानी लड़ाके उनसे मिलने आए थे। उन्होंने उनसे वहां पर आकर कहा कि उन्हें डरने की जरूरत नहीं है। यहां की सरकार भाग चुकी है सेना भी जा चुकी है। अब उनकी सरकार है और उनकी सिक्योरिटी एंबेसी के बाहर तैनात हैं। ऐसे में उन्हें किसी भी तरह की चिंता की जरूरत नहीं है। जब तक रहना है तब तक रहे। उन्हें किसी भी तरह की कोई दिक्कत नहीं होगी।

कई प्रांतों के नेता अभी भी सेना के साथ लड़ रहे तालिबानी लड़ाकों से
अफगानिस्तान में अभी भी कई प्रांतों के नेता अपनी सेना के साथ तालिबानी लड़ाकों से लड़ रहे हैं। जगह-जगह से लड़ाई की सूचनाएं मिल रही है। इन प्रांतों के नेताओं के पास अपनी सेना है। जिसमें 20 से 25000 सैनिक है। यह सभी तालिबानी लड़ाकों से लड़ रहे हैं। आए दिन कई प्रांतों से युद्ध होने की सूचनाएं मिलती रहती हैं।

अफगानिस्तान में शुरू हुआ शरिया कानून
अफगानिस्तान में शरीयत कानून शुरू हो चुका है। इसके मुताबिक ही महिलाओं को जीना पड़ रहा है। इस कानून में इस्ला‍मिक समाज के उन नियमों का एक समूह है, जिससे पूरी दुनिया में इस्ला‍मिक समाज संचालित किया जाता है। शरीयत कानून इस्लाम के भीतर सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से जीवन जीने के व्याख्या करता है। शरीयत कानून के अनुसार बताया गया है कि इन तमाम नियमों के बीच एक मुसलमान को कैसे जीवन व्यतीत करना चाहिए। वैसे अगर देखा जाए तो हर समाज और धर्म के भीतर लोगों के रहने के तौर-तरीके, नियम होते हैं। उसी तरह मुसलमानों के लिए भी कुछ नियमों को तैयार कर शरीयत कानून बनाया गया है।

अफगानी बोल रहे-यहां से नहीं निकले तो कर लेंगे सुसाइड
नवीन ठाकुर ने बताया कि हालात इतने खराब है कि अफगानी तालिबान से पूरी तरह से डर गए हैं। जिस तरह का नरसंहार उन्होंने पहले किया था वही खौफ अभी भी उन लोगों के दिल में हैं। अफगानियों का कहना है कि अगर वो यहां से बाहर नहीं निकल सके तो वह सुसाइड कर लेंगे। काबुल में पूरी तरह से सन्नाटा पसरा हुआ है।

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