• Hindi News
  • Local
  • Himachal
  • Shimla
  • Apple Growers Of Hill State Will Protest At Jantar Mantar Delhi On March 6 | Block Level Demonstration On 10 January

जंतर-मंतर में 6 मार्च को धरना देंगे बागवान:एपल फेडरेशन ऑफ इंडिया के सम्मेलन में निर्णय; 10 जनवरी को ब्लाक स्तर पर प्रदर्शन

शिमला2 महीने पहले
एपल फेडरेशन ऑफ इंडिया के सम्मेलन के दौरान पुस्कर को लांच करते हुए यूसफ तारागामी

जम्मू कश्मीर और हिमाचल का सेब उद्योग संकट के दौर से गुजर रहा है। इसे बचाने के लिए बागवान सड़कों पर उतरेंगे। एपल फेडरेशन ऑफ इंडिया के सोमवार को शिमला में संपन्न सम्मेलन में अगले साल 6 मार्च को दिल्ली के जंतर-मंतर में धरना देने का निर्णय लिया गया।

एपल फेडरेशन ऑफ इंडिया के संयोजक सोहन ठाकुर ने बताया कि जंतर-मंतर में धरना देने से पहले 10 जनवरी को हिमाचल के सभी ब्लाक लेवल पर सेब बागवान प्रदर्शन करेंगे। इस दौरान सेब की बागवानी पर आए संकट को केंद्र व राज्य सरकार के समक्ष उठाया जाएगा।

उन्होंने बताया कि सेब पर बीते तीन सालों में इनपुट-कॉस्ट दोगुना हुई है। ऐसे वक्त में सरकार कृषि इनपुट पर सब्सिडी खत्म कर रही है। इससे खाद, बीज और दवाइयां किसानों-बागवानों की पहुंच से दूर हो रही है।

एपल फेडरेशन के सम्मेलन के दौरान बोलते हुए ठियोग के विधायक राकेश सिंघा
एपल फेडरेशन के सम्मेलन के दौरान बोलते हुए ठियोग के विधायक राकेश सिंघा

मोदी ने अब तक नहीं निभाया वादा: सोहन

सोहन ठाकुर ने बताया कि पहाड़ी राज्य हिमाचल, जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड के बागवान सालों से सेब पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी ने भी प्रदेश के बागवानों से दो बार सेब पर आयात शुल्क बढ़ाने का वादा किया था, लेकिन आज तक इसे पूरा नहीं किया गया।

इससे पहाड़ी राज्यों के सेब बागवान मुश्किल में है। दुनिया के 44 मुल्कों से थोक में सेब के आयात होने की वजह से हिमाचल और जम्मू कश्मीर के सेब बागवानों को उचित दाम नहीं मिल पा रहे है। इससे सेब की खेती अब घाटे का सौदा साबित होने लगी है।

शिमला में आयोजित सम्मेलन में हिमाचल के अलावा जम्मू कश्मीर के बागवान भी मौजूद रहे। इस दौरान सेब पर आधारित एक किताब का भी विमोचन किया गया।

10-15 दिन सड़क किनारे खड़े रहे सेब के ट्रक: युसफ

जम्मू कश्मीर के माकपा नेता एवं एपल फेडरेशन के पदाधिकारी युसफ तारागामी ने कहा कि जिस तरह के हमले सेब उद्योग पर हो रहे हैं, उसे बचाने के लिए बागवानों को संगठित होना होगा।

युसफ तारागामी ने कहा कि सरकार की अनदेखी की वजह से इस साल भी सेब के ट्रक 10 से 15 दिन तक सड़क किनारे खड़े रहे। इससे बागवानों की फसल खराब हुई और उन्हें नुकसान उठाना पड़ा है। केंद्र और राज्य सरकारें बिल्कुल भी गंभीर नहीं है।

आक्रमणकारी ताकतों से लड़ने को संगठन जरूरी: सिंघा

ठियोग के विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि आक्रमणकारी ताकतों से निटपने के लिए संगठन को होना जरूरी है। लिहाजा अब एपल फेडरेशन सेब बागवानों के आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर लड़ेगी​​​​​​​। उन्होंने कहा कि सरकारें कॉर्पोरेट घरानों के पालन-पोषण के लिए सेब उद्योग को संकट में डाल रही है। बागवानों को इसके खिलाफ संगठित होकर लड़ाई लड़नी होगी।