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मरीजों को मिलेगी सुविधा:तीसरी लहर से पहले रिपन अस्पताल में चाइल्ड आईसीयू बनाने का काम शुरू

शिमला24 दिन पहले
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  • पांच आईसीयू में बच्चाें काे किया जाएगा एडमिट, सेंट्रलाइज्ड ऑक्सीजन की सुविधा भी है

काेराेना की दूसरी लहर में अस्पतालाें में सबसे ज्यादा परेशानी अस्पतालाें में आईसीयू काे लेकर आई। आईजीएमसी काे छाेड़कर किसी भी अस्पताल में आईसीयू बेड नहीं थे। जहां कहीं थे भी तो वहां पर पर्याप्त मात्रा में मरीजाें काे सुविधा नहीं मिल पाई। इसी कमी के कारण कई मरीजाें की माैत भी हाे गई।

अब काेराेना की तीसरी लहर काे और ज्यादा घातक बताया जा रहा है। चिकित्सकाें के अनुसार यह बच्चाें पर ज्यादा असर करेगी। इसी से निपटने के लिए अब डीडीयू प्रशासन ने पहले ही तैयारी कर दी है। यहां पर चिल्ड्रन वार्ड में बच्चाें के लिए पांच नए आईसीयू तैयार किए जाएंगे।

इसमें काेराेना के दाैरान सीरियस हाेने वाले बच्चाें काे यहीं पर रखा जाएगा। इसके लिए प्रशासन ने सरकार काे मंजूरी के लिए पत्र लिखा है। मंजूरी मिलते ही यहां पर पांच नए आईसीयू बेड तैयार कर दिए जाएंगे। हालांकि यहां पर बेड तैयार करने के लिए कई सामान उपलब्ध है। जाे सामान नहीं है उसके लिए प्रशासन की ओर से बाल रोग विभाग के वार्ड में इस्तेमाल होने वाले जरूरी सामान के लिए ऑर्डर कर दिया है।

दूसरी लहर में भी नहीं थे यहां आईसीयू

​​​​​ काेराेना की पहली और दूसरी दाेनाें लहर में रिपन अस्पताल काे काेविड अस्पताल बनाया गया था। पहली लहर में यहां पर 92 जबकि दूसरी लहर में 140 बेड लगाए गए थे। मगर यहां पर आईसीयू बेड नहीं लगाए गए थे। यहां पर एडमिट मरीजाें की तबीयत खराब हाेने पर उन्हें आईजीएमसी रेफर किया जाता था।

हालांकि यहां पर वेंटिलेटर थे, मगर उसके बावजूद बेड नहीं लगाए गए थे, ऐसे में यहां पर मरीजाें काे काफी दिक्कतें आई क्याेंकि आईजीएमसी में भी मात्र 37 आईसीयू बेड काेराेना मरीजाें के लिए लगाए गए थे, जाे कम हाे गए थे।

बच्चों के लिए घातक हाे सकती है तीसरी लहर

काेराेना की तीसरी लहर आने वाले समय में बच्चों पर अपना असर दिखा सकती है। विशेषज्ञ पहले ही दावा कर रहे हैं कि बच्चाें पर यह लहर घातक हाे सकती है। क्याेंकि पहली लहर में बुजुर्गाें पर काफी असर पड़ा था, जबकि दूसरी लहर में 20 से 49 साल के बीच के लाेग ज्यादा प्रभावित हुए थे। अब तीसरी लहर बच्चाें पर अपना असर दिखा सकती है। जाे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियाें के लिए चिंता का विषय है। ऐसे में विभाग अभी से सतर्क हाे गया है।

आईसीयू इसलिए जरूरी

आईसीयू विशेष वॉर्ड होता है, जहां गंभीर रूप से बीमार लोगों के इलाज किया जाता है। आईसीयू में मरीजाें की संख्या कम होती है और मेडिकल स्टाफ की संख्या ज्यादा ताकि जरूरत पड़ने पर हर मरीज का पर्याप्त ध्यान रखा जा सके। आईसीयू में मरीज की गहन निगरानी के लिए उपकरण लगे होते हैं। आईसीयू में ऑक्सीजन सिलेंडर, वेंटिलेटर समेत कई जरूरी उपकरण हाेते हैं।

काेराेना के दाैरान जब किसी मरीज की हालत गंभीर हाे जाती है ताे उसे आईसीयू में एडमिट करना पड़ता है। इसमें वेंटिलेटर का इस्तेमाल इसलिए होता है ताकि मरीज की सांसें चलती रहे। इसमें एक मास्क के जरिए ऑक्सीजन हल्के दबाव के साथ दी जाती है। गंभीर सर्जरी के बाद उनकी रिकवरी के लिए भी मरीजाें काे आईसीयू में रखा जाता है।

स्टाफ की किल्लत भी नहीं

​​​​​​​डीडीयू अस्पताल में आईसीयू बनाने के लिए बाल रोग विभाग में पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध है। इसके अलावा वार्ड में ऑक्सीजन की उपलब्धता को भी सुनिश्चित किया जा रहा है। अस्पताल में आक्सीजन प्लांट से रोजाना जरूरत से अधिक ऑक्सीजन उत्पादन होता है।

इस कारण आगामी समय में भी ऑक्सीजन की कमी नहीं होगी। इसके अलावा अस्पताल के बच्चों वाले वार्ड में ऑक्सीजन की सेंट्रलाइज्ड सप्लाई उपलब्ध है, इसलिए वार्ड में ऑक्सीजन सिलेंडर से ऑक्सीजन की उपब्धता कम नहीं होगी। इस वार्ड के प्रत्येक बिस्तर पर सेंट्रल सप्लाई की सुविधा है।

अस्पताल के चिल्ड्रन वार्ड में पांच नए आईसीयू बनाए जाएंगे। सरकार से मंजूरी के लिए लिखा गया है। सामान भी अस्पताल में उपलब्ध है। जैसे ही मंजूरी मिलती है, यहां पर आईसीूय तैयार कर दिए जाएंगे। इससे यदि काेराेना की तीसरी लहर आती है और बच्चाें पर असर करती है ताे प्रशासन की तैयारी पहले ही रहेगी।-डाॅ. रविंद्र मोक्टा, वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक रिपन

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