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सतर्कता:काेविड केयर सेंटर डीडीयू अस्पताल में खिड़कियों व खुली जगहों काे ग्रिल लगाकर किया जाएगा बंद

शिमला9 दिन पहले
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डीडीयू अस्पताल जहां अभी खिड़कियों से कोई भी बाहर निकल सकता है। इसलिए यहां ग्रिल लगाई जाएंगी। इससे खिड़कियाें से बंदर के वार्डाें में घुसने का डर भी नहीं रहेगा।
  • मरीज द्वारा आत्महत्या किए जाने के बाद प्रशासन ने लिया फैसला

काेविड केयर सेंटर डीडीयू अस्पताल में फेंसिंग की जाएगी। अस्पताल में खिड़कियाें और खुली जगहाें पर बंद किया जाएगा। इसमें सभी खिड़कियाें और खुली जगह में ग्रिल लगाई जाएगी। अस्पताल में करीब दाे माह पहले महिला के सुसाइड मामले के बाद प्रशासन ने यह निर्णय लिया है। महिला ने अस्पताल के बरामदे में सुसाइड कर लिया था।

ऐसे में प्रशासन का तर्क है कि काेविड केयर सेंटर में खिड़कियाें में भी केवल शीशे लगाए गए हैं, ऐसे में यहां से कभी भी काेई बाहर निकल सकता है। भविष्य में इस तरह की काेई घटना ना हाे ताे अब प्रशासन ने पूरे अस्पताल काे फेंसिंग का निर्णय लिया है।

इससे जहां अब मरीजाें की सेफ्टी हाेगी, वहीं खिड़कियाें भी प्राेटेक्ट हाे जाएंगी। इसके लिए प्रशासन ने काम शुरू करवा दिया है। जल्द ही पूरे अस्पताल परिसर में खिड़कियाें अाैर खुली जगहाें की फेंसिंग कर दी जाएगी।

92 काेविड पेशेंट रहते हैं एडमिट
डीडीयू अस्पताल काे काेविड केयर सेंटर बनाया गया है। यहां पर शिमला और किन्नाैर के मरीजाें काे रखा जाता है। इसके अलावा साेलन और सिरमाैर के गंभीर मरीजाें काे भी यहीं पर रेफर किया जा रहा है। इसके अलावा वीआईपी काे भी यहीं पर रखा जा रहा है।

आईजीएमसी से भी यहीं पर कई मरीजाें काे भेजा जाता है। यहां पर करीब 92 बैड काेराेना मरीजाें के लिए लगाए गए हैं। इन दिनाें सभी बैड पर पेशेंट हैं। ऐसे में यहां पर भविष्य में किसी भी अनहाेनी घटना से बचने के लिए प्रशासन सतर्क हाे गया है।

डिप्रेशन में रहते हैं काेराेना मरीज
काेराेना मरीजाें के साथ ना ताे काेई परिजन हाेता है और ना ही काेई उनसे मिलने जा सकता है। जिससे की काेराेना मरीज अक्सर डिप्रेशन में रहते हैं। डिप्रेशन में रहने वाले मरीजाें के सुसाइड जैसी घटनाओं के ज्यादा मामले हाेते हैं। इससे पहले भी जिस महिला ने डीडीयू में सुसाइड किया था वह अकेलेपन के कारण डिप्रेशन में थी। ऐसे में प्रशासन ने अब इस तहर की घटनाओं से बचने के लिए अस्पताल परिसर में फेंसिंग करवाने का निर्णय लिया है।

फेंसिंग होेने से मरीज सुरक्षित रहेंगे: डॉ. रमेश चौहान
अस्पताल के नए भवन की खिड़कियाें और खाली जगहाें पर फेंसिंग करवाई जा रही है। इसमें खिड़कियाें में ग्रिलें लगा दी जाएंगी ताकि यहां से काेई बाहर ना निकल पाए। इससे जहां भविष्य में काेई अनहाेनी घटना हाेने का डर नहीं रहेगा, वहीं बंदर भी खिड़कियाें से वार्डाें में नहीं आ सकेंगे।

इसके लिए काम शुरू कर दिया गया है। जल्द ही पूरे परिसर में ग्रिलें लगा दी जाएंगी। उसके बाद यहां पर मरीज काफी सुरक्षित हाे जाएंगे।
-डाॅ. रमेश चाैहान, एमएस डीडीयू अस्पताल शिमला

लिफ्ट के पास पुल पर भी फेंसिंग के बाद नहीं हुआ सुसाइड

काेर्ट राेड़ पर लिफ्ट के पास पुल से कूदकर भी कई लाेगाें ने सुसाइड किया था, जिसके बाद प्रशासन ने वहां फेंसिंग करवा दी थी। यहां पर तारें लगाकर पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। जब से वहां पर फेंसिंग करवाई उसके बाद वहां पर एक भी सुसाइड का मामला नहीं आया है।

हालांकि डीडीयू अस्पताल का फेंसिंग का एक ओर कारण भी है। यह अस्पताल काफी ऊंचा है। यहां पर कई तरह के मरीज आते हैं। ऐसे में यहां पर काेई भी अनहाेनी हाे सकती है। ऐसे में यहां पर फेंसिंग लगाना जरूरी था।

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